योगी राज में अब तक 44 बदमाश ढेर, 1339 एनकाउंटर, जमानत रद्द करा रहे अपराधी
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कड़क छवि वाले योगी आदित्यनाथ ने जिस दिन प्रदेश की सत्ता संभाली, उन्हें भरोसा था कि सपा सरकार की कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाकर आई यह सरकार पलक झपकते ही सब ठीक कर देगी। कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने एनकाउंटर समेत कई कदम उठाए हैं, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। एक साल में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया बदला है लेकिन कई घटनाओं ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
ताबड़तोड़ एनकाउंटर से अपराधियों में ऐसा खौफ पैदा हुआ कि कई बदमाशों ने अदालतों में सरेंडर कर दिया तो कुछ ट्रैक बदलकर मुख्यधारा में वापस लौट आए। हालांकि कुछ जिलों में फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से पुलिस खुद को दूर नहीं रख सकी। नोएडा पुलिस पर सुमित गुर्जर के फर्जी एनकाउंटर को लेकर धरना-प्रदर्शन और पंचायतें तक हुईं। एक जिम संचालक को दरोगा के गोली मारने पर नोएडा पुलिस की फिर फजीहत हुई। मेरठ में पति की हत्या के गवाह मां-बेटे को गोलियों से छलने जैसी कई घटनाओं ने पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े किए।
बदमाशों से निपटने की खुली छूट
कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। जोन और रेंज में वरिष्ठ अफसरों को तैनात करने की कवायद को भी इसी नजरिये से देखा गया। पुलिस को बदमाशों से निपटने की खुली छूट दी गई। एक साल में प्रदेश में पुलिस और अपराधियों के बीच 1339 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 3140 बदमाशों को पकड़ा गया। 188 के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की गई और गैंगस्टर एक्ट के तहत 175 अपराधियों की 147 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस... पर अफसरों का रवैया ढुलमुल
सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कही, लेकिन पुलिस के जिन अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, उनके प्रति आला अफसरों का रवैया ढुलमुल रहा। बाराबंकी के पुलिस कप्तान पर थाना बेचने का आरोप लगा। जांच डीआईजी फैजाबाद से कराई गई।
हालांकि, आरोप लगाने वाला सिपाही न सिर्फ अपने आरोपों से पलट गया, बल्कि उस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज करा दिया जिसने उसका वीडियो वायरल किया था। इसी तरह, बांदा में अवैध खनन व अवैध परिवहन के आरोपों की जांच करने पहुंचे दो आईपीएस अधिकारियों के साथ हाथापाई तक की नौबत आ गई। पुलिस इस मामले में मारपीट की घटना से इनकार करती रही। हालांकि भ्रष्टाचार के छोटे-मोटे मामले में सिपाही को सस्पेंड करने और फिर बर्खास्त करने में पुलिस के आला अफसरों ने कोई देर नहीं की।
कोई बड़ा दंगा नहीं... लेकिन सहारनपुर और कासगंज ने लगा दिया दाग
यूपी में पिछले एक साल में कोई बड़ा दंगा तो नहीं हुआ, लेकिन सहारनपुर व कासगंज में जातीय व सांप्रदायिक संघर्ष का दाग लगा गया। गणतंत्र दिवस पर कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई तो बवाल बढ़ गया।
राजधानी से एक आईपीएस अधिकारी को कासगंज में कैंप करने के लिए भेजना पड़ा। इस हिंसा पर सोशल मीडिया में लंबी बहस भी चली। सहारनपुर में जातीय हिंसा भी सरकार की किरकिरी की वजह बनी। यहां भाजपा के सांसद पर ही आरोप लगा कि उन्होंने पुलिस अधिकारी के घर में घुस कर तोड़फोड़ कराई।
आंकड़े बोलते हैं...
3140 बदमाश गिरफ्तार
1999 इनामी बदमाश गिरफ्तार
332 बदमाश घायल हुए
4 पुलिसकर्मी शहीद
292 पुलिसकर्मी घायल
1339 एनकाउंटर
44 बदमाश मारे
एनकाउंटर का खौफ
डर के मारे बदमाशों ने कोर्ट में सरेंडर किए, तो अपराध न कर, मेहनत-मजदूरी करने के वादे भी किए।
सुस्त पड़ा एंटी रोमियो स्क्वॉयड
सरकार बनने के तुरंत बाद महिलाओं से संबंधित अपराध रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉयड का गठन किया गया। कई जगह तो दोस्त, भाई-बहन तक पुलिस के निशाने पर आए। सीएम योगी को निर्देश देना पड़ा कि मर्जी से घूमने वालों को परेशान किया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। शुरुआत में एंटी रोमियो स्क्वॉयड की धूम अधिक थी, लेकिन साल पूरा होते-होते इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई। इसी तरह एंटी भूमाफिया स्क्वॉयड भी बड़े भू-माफिया पर कार्रवाई करती नजर नहीं आई।