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भावी सियासत का संकेत है शिवपाल का ताजा बयान, सपा से बनाएंगे दूरी
Sat, 12 Dec 2020 12:36 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 12 Dec 2020 12:36 PM IST
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शिवपाल सिंह यादव
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए उसके सहित अन्य छोटे दलों से गठबंधन करने का एलान कर भावी सियासत का संकेत दे दिया है।
ये भी साफ कर दिया है कि 2022 के विधानसभा चुनाव के मैदान में प्रसपा का झंडा और उम्मीदवार कई सीटों पर रहेंगे। अखिलेश के प्रस्ताव के अनुसार, शिवपाल सिर्फ जसवंतनगर सीट तक सीमित रहकर संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
दरअसल, शिवपाल की सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात और ओवैसी से 2022 को लेकर बातचीत की स्वीकारोक्ति यह बताने के लिए पर्याप्त है कि वे प्रदेश में एक अलग मोर्चे पर काम कर रहे हैं। अगर उन्हें सपा से ही मिलकर चुनाव लड़ना होता तो वे मोर्चा बनाने की कवायद में क्यों जुटते?
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यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजभर व अखिलेश का साथ छूट चुका है जबिक ओवैसी और अखिलेश लगातार एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। ऐसे में अगर शिवपाल इन नेताओं से बातचीत कर रहे हैं तो साफ है कि सपा को लेकर वे बहुत उत्सुक नहीं है। इसलिए वे अपनी ताकत बनाए रखना चाहते हैं।
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ये भी साफ कर दिया है कि 2022 के विधानसभा चुनाव के मैदान में प्रसपा का झंडा और उम्मीदवार कई सीटों पर रहेंगे। अखिलेश के प्रस्ताव के अनुसार, शिवपाल सिर्फ जसवंतनगर सीट तक सीमित रहकर संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
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दरअसल, शिवपाल की सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात और ओवैसी से 2022 को लेकर बातचीत की स्वीकारोक्ति यह बताने के लिए पर्याप्त है कि वे प्रदेश में एक अलग मोर्चे पर काम कर रहे हैं। अगर उन्हें सपा से ही मिलकर चुनाव लड़ना होता तो वे मोर्चा बनाने की कवायद में क्यों जुटते?
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यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजभर व अखिलेश का साथ छूट चुका है जबिक ओवैसी और अखिलेश लगातार एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। ऐसे में अगर शिवपाल इन नेताओं से बातचीत कर रहे हैं तो साफ है कि सपा को लेकर वे बहुत उत्सुक नहीं है। इसलिए वे अपनी ताकत बनाए रखना चाहते हैं।
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अखिलेश के प्रस्ताव पर उनका रुख सकारात्मक नहीं
भले ही सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पिछले दिनों चाचा शिवपाल के लिए जसवंतनगर सीट छोड़ने और सरकार बनने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाने की बात कहकर प्रसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दिया था। लेकिन अब शिवपाल ने जिस तरह यह कहा कि अखिलेश का मुझे एक सीट या कैबिनेट मंत्री पद देना एक मजाक है।
हम आगामी 21 दिसंबर को मेरठ में रैली कर यूपी विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकेंगे। इसके बाद गांव-गांव में पदयात्रा करेंगे। इससे साफ है कि अखिलेश के प्रस्ताव पर उनका रुख सकारात्मक नहीं है। एक तरह शिवपाल का यह बयान सपा से दूरी बनाकर चलने का संकेत ही है। उधर, अखिलेश लगातार यह कह रहे हैं कि एक सीट और कैबिनेट मंत्री का पद देंगे और क्या चाहिए? मतलब, अखिलेश भी इससे ज्यादा नहीं देना चाहते।
हम आगामी 21 दिसंबर को मेरठ में रैली कर यूपी विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकेंगे। इसके बाद गांव-गांव में पदयात्रा करेंगे। इससे साफ है कि अखिलेश के प्रस्ताव पर उनका रुख सकारात्मक नहीं है। एक तरह शिवपाल का यह बयान सपा से दूरी बनाकर चलने का संकेत ही है। उधर, अखिलेश लगातार यह कह रहे हैं कि एक सीट और कैबिनेट मंत्री का पद देंगे और क्या चाहिए? मतलब, अखिलेश भी इससे ज्यादा नहीं देना चाहते।
ये नजरिया भी है खास
प्रसपा प्रवक्ता दीपक मिश्र कहते हैं कि उनकी पार्टी भाजपा को रोकना और सभी पंथ निरपेक्ष तथा गैर सांप्रदायिक दलों को साथ लेकर चलना चाहती है। कोशिश है कि पंथ निरपेक्ष और समाजवादी विचारधारा को मानने वाले सभी दल प्रसपा के साथ जुड़ें और वे प्रदेश में भाजपा के राजनीतिक विकल्प की धुरी बने।
यह तथ्य भाजपा विरोधी किसी दल को नहीं भूलना चाहिए कि प्रसपा के बिना कोई मजबूत विकल्प और गठबंधन बनना मुश्किल है। रही बात प्रसपा की तो लोहियावादी सम्मान से समझौता नहीं कर सकते।
यह तथ्य भाजपा विरोधी किसी दल को नहीं भूलना चाहिए कि प्रसपा के बिना कोई मजबूत विकल्प और गठबंधन बनना मुश्किल है। रही बात प्रसपा की तो लोहियावादी सम्मान से समझौता नहीं कर सकते।