मोदी की फोटो से डरी, सपा नहीं बांटेगी लैपटॉप!
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रोज नई-नई पार्टी की हार की वजहें बताने वाली सपा सरकार का कहना है कि लैपटॉप स्कीम से सपा को कम, भाजपा को ज्यादा फायदा मिला और अब यह स्कीम बंद की जा सकती है।
सपा के कद्दावर नेता गायत्री प्रसाद प्रजापति ने लखनऊ से सटे जिले अमेठी के गौरीगंज में इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि लैपटॉप हमने दिया लेकिन आरएसएस ने उसे प्रचार का साधन बना लिया।
आरएसएस और भाजपा ने उससे नरेंद्र मोदी का प्रचार किया। लैपटॉप में नरेंद्र मोदी की फोटो चलने लगी, जिससे युवा गुमराह होकर भाजपा के पक्ष में चला गया।
कई योजनाओं की होगी समीक्षा
लैपटॉप योजना को बंद करने जैसे बयान को व्यक्तिगत राय बताते हुए भू-तत्व एवं खनिकर्म मंत्री ने कहा कि इसके मद का पैसा बिजली, पानी व सड़क पर लगाया जाए।
कार्यकर्ता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि सपा सरकार लैपटॉप वितरण, बेरोजगारी भत्ता, पढ़े बेटियां बढ़े बेटियां, कब्रिस्तान के पुनरुद्धार जैसी योजनाओं की समीक्षा करेगी।
बताते चलें कि चुनाव पूर्व जब सपा का मैनिफेस्टो तैयार किया गया था तो कई वरिष्ठ नेताओं ने इस योजना की बजाय लोगों की आम जरूरतों पर ध्यान दिए जाने की बात कही थी।
पहले से ही लग रही थीं अटकलें
चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही ऐसा अनुमान लगाया जाने लगा था कि यह योजना बंद हो सकती है।
प्रजापति ने यह भी कहा कि सोमवार को हुई पार्टी समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई कि इस योजना से मनमाफिक परिणाम पार्टी को नहीं मिला।
ऐसे में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के करीबी नेता होने की वजह से प्रजापति के बयान को पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि पहले यह माना जा रहा था कि सरकार इस योजना के लिए जारी बजट में धीरे-धीरे कटौती कर सकती है।
आठ करोड़ से भी ज्यादा होता व्यय
अगर सरकार इस स्कीम को जारी रखती है तो सरकार को करीब 40 लाख छात्रों को लैपटॉप देना होगा, जिन्होंने साल 2013-2014 में बारहवीं की परीक्षा पास की है।
इस तरह इस योजना पर होने वाला अनुमानित व्यय आठ करोड़ से भी ज्यादा होता।
साल 2013-2014 में सरकार को योजना आयोग की ओर से 2,700 करोड़ लागत की लैपटॉप योजना को वितरित करने की अनुमति मिल चुकी है।
क्या कहा मुख्यमंत्री ने?
हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बात को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी में लोकतंत्र है और हर नेता अपनी बात कहने के लिए स्वतंत्र हैं।
सीएम ने कहा कि प्रजापति का यह बयान उनकी निजी राय हो सकती है और इसमें पार्टी का कोई रोल नहीं है।
तो क्या सरकार यह योजना बंद कर सकती है? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है और ना ही पार्टी ने इस पर कोई विचार किया है।