फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   land allotment becomes mere a joke in uttar pradesh

प्रदेश में मजाक बन गया है भूमि आवंटन

Thu, 19 Dec 2013 01:01 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Thu, 19 Dec 2013 01:01 PM IST
विज्ञापन
land allotment becomes mere a joke in uttar pradesh

महाराजगंज में 12 जमींदार परिवार हैं। इनके पास दो हजार एकड़ से भी ज्यादा जमीन है।

विज्ञापन


1900 में से 18 परिवारों के पास तीन एकड़ जमीन है। बाकी के पास कोई जमीन ही नहीं।

बुधवार को पर्यटन भवन में रोजगार हक अभियान में हुई जनसुनवाई में जमीन पर अधिकार नहीं होने का मुद्दा उठा।

महाराजगंज से आए मुसहर सेवा संस्थान के दिनेश सिंह ने बताया कि उनके यहां आज भी चंद परिवार ही पूरी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।

12 परिवारों की खेती हमेशा जलमग्न रहती है। वहीं, छह लोगों की भूमि जंगल और पानी से घिरी हुई है। उनके समर्थन में सोशल एक्टिविस्ट संजय विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश में भूमि आवंटन मजाक बनकर रह गया है। बड़े शर्म की बात है कि आज भी 84 प्रतिशत ग्रामीण खेतिहर मजदूरों में से 38 प्रतिशत भूमिहीन हैं।

एक्शन एड संस्था के कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद कुमार ने कहा कि आज़ादी के बाद भूमि सुधार तो हुआ लेकिन, तमाम संवैधानिक उपबंधों के बाद भी सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक रूप से वंचित तबकों तक इसका लाभ नहीं पहुंचा।
विज्ञापन


आज भी इनके पास न तो आवासीय भूमि है, न ही कृषि योग्य भूमि। बहुत से ऐसे मामले हैं जिनमें पट्टाधारक का पट्टा होने के बरसों बाद भी उस जमीन पर उसका कब्जा नहीं हो पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कमेरी दुनिया के संपादक और दलित चिंतक आरए दिवाकर ने कहा, यह दु:खद है कि आज़ादी के 66 साल बाद भी दलित भूमिहीनों को आवासीय और कृषि योग्य भूमि के लिए भटकना पड़ रहा है। इस दौरान संयोजक अजय शर्मा और विज्ञान फाउंडेशन के संदीप खरे ने भी अपनी बात रखी।

कॉरपोरेट लूट के शिकार दलित
एपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताहिरा हसन ने कहा कि मौजूदा दौर में कॉरपोरेट की लूट ने दलित और आदिवासी समुदाय के लोगों को भूमि से वंचित किया है। हमारी सरकारों ने ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिससे गरीबों और वंचितों के हिस्से की जमीन पूंजीपतियों को औने-पौने दी जा रही है।


जब दलित आदिवासी अपनी भूमि के लिए संघर्ष करता है तो उस पर लाठियां बरसाई जाती हैं। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है।

महिला किसानों से सौतेला व्यवहार
एक्शन एड की कार्यक्रम अधिकारी मनीषा ने कहा, भारतीय समाज में शुरू से ही महिलाओं के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। जीवन के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी महिलाएं उपेक्षा की शिकार हैं। उनके नाम पर न तो आवासीय पट्टे हैं और न ही कृषि योग्य भूमि।

यह कहानी सिर्फ  दलित और आदिवासी समाज की महिलाओं की नहीं बल्कि सभी महिलाओं की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed