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मुख्यमंत्री योगी की पहल लाई रंग, यूपी के 5.12 लाख उद्यमियों को मिला 22800 करोड़ का ऋण
Sun, 20 Dec 2020 09:47 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 20 Dec 2020 09:47 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : एएनआई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना काल के दौरान उद्योगों का पहिया चलाने के लिए जो पहल की थी, उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। वैश्विक मंदी में भी देश में सबसे ज्यादा यूपी की पांच लाख 12 हजार सूक्ष्म और लघु उद्योग इकाइयों ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए 22 हजार 800 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। इस राशि से उन्होंने जहां कोरोना काल में उत्पादन बढ़ाया, वहीं बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।
देश की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई सेक्टर ने भले ही कोरोना काल में काफी मुसीबतों का सामना किया हो, पर राज्य सरकार की नीति के कारण यूपी में सूक्ष्म और लघु इकाइयों को काफी राहत मिली है। सीएम योगी ने खुद कई बार लोन मेले के माध्यम से एमएसएमई को लोन वितरित कराया। बैंकों को निर्देश जारी किए कि कारोबारियों को लोन देने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इसका परिणाम यह हुआ कि देश में सीजीटीएमएसई (सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट) के तहत सूक्ष्म और लघु इकाइयां ऋण लेने में पहले पायदान पर पहुंच गई हैं।
सीजीटीएमएसई के सीईओ संदीप वर्मा ने बताया कि इस स्कीम के तहत छोटे उद्यमियों को लोन की गारंटी दी जाती है। ऐसे उद्यमी जिनके पास बैंक गारंटी देने के लिए नहीं है, वे इस स्कीम के तहत लोन लेकर अपने कारोबार को और बढ़ा सकते हैं। सीजीटीएमएसई के तहत लोन की गारंटी ली जाती है, इसलिए बैंकों को भी लोन देने में दिक्कत नहीं होती। इसमें नए और पुराने दोनों इकाइयां होती हैं।
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वसूली व्यवस्था में बदलाव
केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु उद्योग मंत्रालय और सिडबी की संयुक्त पहल से सीजीटीएमएसई का संचालन किया जा रहा है। सीजीटीएमएसई देश में कार्यरत सूक्ष्म और लघु उद्योग वर्ग की इकाइयों के सदस्य बैंकों से प्राप्त ऋण राशि की क्षतिपूर्ति करता है। सीजीटीएमएसई ने सूक्ष्म और लघु वर्ग के उद्योगों को दी गई राशि की प्रतिभूति जारी करने के लिए वसूली की व्यवस्था में परिवर्तन किया है, ताकि ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जो लोन का दुरुपयोग नहीं करते हैं।
यह है पैमाना
सूक्ष्म उद्योग में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने प्लांट और मशीनरी में एक करोड़ रुपये तक का निवेश किया है और उनका वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम टर्नओवर पांच करोड़ तक है। लघु उद्योग में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने प्लांट और मशीनरी में एक करोड़ से ऊपर और 10 करोड़ तक का निवेश किया है। उनका वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम टर्नओवर पांच करोड़ से 50 करोड़ तक है। ऐसे ही मध्यम उद्योगों में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने 10 करोड़ से 50 करोड़ तक का निवेश किया है और वित्तीय वर्ष के दौरान उनका टर्नओवर 50 से 250 करोड़ रुपये तक है।
ऋण लेने में टॉप टेन प्रदेश
प्रदेश आवेदन धनराशि
उत्तर प्रदेश 512668 2280079
तमिलनाडु 471560 2078528
महाराष्ट्र 413832 2873043
कर्नाटक 394483 2216215
केरल 340879 932694
पश्चिम बंगाल 241919 1274760
गुजरात 220907 1737453
मध्य प्रदेश 207884 1081612
उड़ीसा 202777 912874
आंध्र प्रदेश 202259 585404
(नोट- सभी आंकड़े सितंबर तक और धनराशि लाख रुपये में है)
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देश की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई सेक्टर ने भले ही कोरोना काल में काफी मुसीबतों का सामना किया हो, पर राज्य सरकार की नीति के कारण यूपी में सूक्ष्म और लघु इकाइयों को काफी राहत मिली है। सीएम योगी ने खुद कई बार लोन मेले के माध्यम से एमएसएमई को लोन वितरित कराया। बैंकों को निर्देश जारी किए कि कारोबारियों को लोन देने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इसका परिणाम यह हुआ कि देश में सीजीटीएमएसई (सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट) के तहत सूक्ष्म और लघु इकाइयां ऋण लेने में पहले पायदान पर पहुंच गई हैं।
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सीजीटीएमएसई के सीईओ संदीप वर्मा ने बताया कि इस स्कीम के तहत छोटे उद्यमियों को लोन की गारंटी दी जाती है। ऐसे उद्यमी जिनके पास बैंक गारंटी देने के लिए नहीं है, वे इस स्कीम के तहत लोन लेकर अपने कारोबार को और बढ़ा सकते हैं। सीजीटीएमएसई के तहत लोन की गारंटी ली जाती है, इसलिए बैंकों को भी लोन देने में दिक्कत नहीं होती। इसमें नए और पुराने दोनों इकाइयां होती हैं।
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वसूली व्यवस्था में बदलाव
केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु उद्योग मंत्रालय और सिडबी की संयुक्त पहल से सीजीटीएमएसई का संचालन किया जा रहा है। सीजीटीएमएसई देश में कार्यरत सूक्ष्म और लघु उद्योग वर्ग की इकाइयों के सदस्य बैंकों से प्राप्त ऋण राशि की क्षतिपूर्ति करता है। सीजीटीएमएसई ने सूक्ष्म और लघु वर्ग के उद्योगों को दी गई राशि की प्रतिभूति जारी करने के लिए वसूली की व्यवस्था में परिवर्तन किया है, ताकि ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जो लोन का दुरुपयोग नहीं करते हैं।
यह है पैमाना
सूक्ष्म उद्योग में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने प्लांट और मशीनरी में एक करोड़ रुपये तक का निवेश किया है और उनका वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम टर्नओवर पांच करोड़ तक है। लघु उद्योग में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने प्लांट और मशीनरी में एक करोड़ से ऊपर और 10 करोड़ तक का निवेश किया है। उनका वित्तीय वर्ष के दौरान अधिकतम टर्नओवर पांच करोड़ से 50 करोड़ तक है। ऐसे ही मध्यम उद्योगों में वे इकाइयां आती हैं, जिन्होंने 10 करोड़ से 50 करोड़ तक का निवेश किया है और वित्तीय वर्ष के दौरान उनका टर्नओवर 50 से 250 करोड़ रुपये तक है।
ऋण लेने में टॉप टेन प्रदेश
प्रदेश आवेदन धनराशि
उत्तर प्रदेश 512668 2280079
तमिलनाडु 471560 2078528
महाराष्ट्र 413832 2873043
कर्नाटक 394483 2216215
केरल 340879 932694
पश्चिम बंगाल 241919 1274760
गुजरात 220907 1737453
मध्य प्रदेश 207884 1081612
उड़ीसा 202777 912874
आंध्र प्रदेश 202259 585404
(नोट- सभी आंकड़े सितंबर तक और धनराशि लाख रुपये में है)