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कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी बंद, मरीज परेशान
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लारी की इमरजेंसी बंद, सांसत में दिल के मरीजों की जान
निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर मरीज
150 मरीज रोजाना पहुंचते थे लारी इमरजेंसी, ट्रॉमा में पहुंचे सिर्फ 19
केस 1
गोंडा निवासी शिवप्यारी (60) को हार्ट अटैक पड़ा। उनका बेटा राजेश निजी वाहन से लेकर लारी कार्डियोलॉजी पहुंचा। यहां पता चला कि इमरजेंसी बंद हो गई है। इस पर वह ट्रॉमा पहुंचा। गेट पर करीब आधे घंटे इंतजार करता रहा। लेकिन अंदर नहीं घुस पाया। इस पर विवशता में निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ा।
केस 2
उन्नाव के हिलौली निवासी रामकुमार (70) को लेकर उनके परिवारीजन लारी कार्डियोलॉजी पहुंचे। यहां से उन्हें ट्रॉमा भेजा गया। वे ट्रॉमा में गए, जहां कैजुअल्टी में जांच की गई। इसके बाद फिर लारी कार्डियोलॉजी भेज दिया गया। यहां गेट पर करीब घंटेभर इंतजार करते रहे। इसके बाद निजी अस्पताल लेकर चले गए।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी बंद होने से दिल के मरीजों को लौटाए जाने के ये दो मामले ही नहीं हैं। यहां शनिवार को दिनभर मरीज लारी से लेकर ट्रॉमा के बीच चक्कर काटते रहे। अव्यवस्था का आलम यह है कि लारी कार्डियोलॉजी में दीवार पर इमरजेंसी बंद होने की नोटिस चस्पा कर दिया गया है, लेकिन वहां ट्रॉमा जाने के बारे में बताने वाला कोई नहीं है। ग्रामीण इलाके से आने वाले मरीज कभी इमरजेंसी की गेट पर तो कभी आईसीयू के गेट पर भटक रहे हैं। दिल के गंभीर मरीज घंटे-दो घंटे चक्कर काटने के बाद निजी अस्पताल जाने को विवश हैं।
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गौरतलब है कि लारी कार्डियोलॉजी में शुक्रवार को मरीज अब्दुला की मौत के बाद तीमारदारों ने हंगामा किया था। इस पर रेजीडेंटों ने जानलेवा हमले का आरोप लगा इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी। इमरजेंसी बंद होने के बाद से ट्रॉमा में मरीज देखने का फैसला लिया गया है। ट्रॉमा में दो रेजीडेंट और एक टेक्नीशियन की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी है। आमतौर पर लारी कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में 150 से 160 मरीज आते हैं। इसमें 25 से 30 मरीजों को भर्ती किया जाता है। शनिवार को ट्रॉमा सेंटर में दिल के गंभीर 19 मरीज ही पहुंचे। इसमें आठ को भर्ती किया गया। ये आंकड़े बता रहे हैं कि कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी बंद होने के बाद हृदय रोग के गंभीर मरीजों की हालत खराब है।
ट्रॉमा की भीड़ बनी मुसीबत
केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि दिल के गंभीर मरीजों को ट्रॉमा में इलाज दिया जा रहा है, लेकिन जानकारी का अभाव और ट्रॉमा की भीड़ हृदयरोग के मरीजों के लिए समस्या बनी है। गंभीर रूप से पीड़ित मरीज पहले लारी कार्डियोलॉजी पहुंचते हैं। काफी जद्दोजहद के बाद पता चलता है कि ट्रॉमा जाना है। ट्रॉमा में पहले से ही मरीजों की लाइन लगी रहती है। ऐसे में हृदय रोग से पीड़ित मरीज के परिवारीजन निजी अस्पताल जाने के लिए विवश हैं।
मंगलवार को होगा फैसला
केजीएमयू प्रशासन लारी कार्डियोलॉजी में इमरजेंसी चलाने के बारे में मंगलवार को फैसला करेगा। पहले तय था कि सोमवार को बैठक करके सुरक्षा व्यवस्था चुस्त एवं दुरुस्त कर ली जाएगी। इसके बाद इमरजेंसी सेवा चालू कर दी जाएगी, लेकिन रेजीडेंटों की जिद है कि वे लारी में इमरजेंसी सेवाएं नहीं देंगे। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने पैर खींच लिया है। अब मंगलवार को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक होगी। इस बैठक में इमरजेंसी संचालन पर रणनीति बनेगी।
बैठक में तय होगा- कब चलेगी इमरजेंसी
लारी कार्डियोलॉजी में पुलिस चौकी खुलने के बाद भी घटनाएं थमी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों की जान को खतरा है। वे इमरजेंसी में काम करने को तैयार नहीं हैं। अभी वैकल्पिक तौर पर ट्रॉमा में मरीज देखे जा रहे हैं। जहां तक मरीजों के भटकने का सवाल है तो कुछ दिन में सभी लोगों को पता चल जाएगा कि इमरजेंसी के लिए ट्रॉमा ही जाना है। फिलहाल मंगलवार को केजीएमयू प्रशासन और पुलिस के बीच बैठक होगी। इसमें तय होगा कि इमरजेंसी चलाई जाए या नहीं।
-डॉ. अक्षय प्रधान, मीडिया प्रभारी, कार्डियोलॉजी विभाग, केजीएमयू
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निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर मरीज
150 मरीज रोजाना पहुंचते थे लारी इमरजेंसी, ट्रॉमा में पहुंचे सिर्फ 19
केस 1
गोंडा निवासी शिवप्यारी (60) को हार्ट अटैक पड़ा। उनका बेटा राजेश निजी वाहन से लेकर लारी कार्डियोलॉजी पहुंचा। यहां पता चला कि इमरजेंसी बंद हो गई है। इस पर वह ट्रॉमा पहुंचा। गेट पर करीब आधे घंटे इंतजार करता रहा। लेकिन अंदर नहीं घुस पाया। इस पर विवशता में निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ा।
केस 2
उन्नाव के हिलौली निवासी रामकुमार (70) को लेकर उनके परिवारीजन लारी कार्डियोलॉजी पहुंचे। यहां से उन्हें ट्रॉमा भेजा गया। वे ट्रॉमा में गए, जहां कैजुअल्टी में जांच की गई। इसके बाद फिर लारी कार्डियोलॉजी भेज दिया गया। यहां गेट पर करीब घंटेभर इंतजार करते रहे। इसके बाद निजी अस्पताल लेकर चले गए।
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी बंद होने से दिल के मरीजों को लौटाए जाने के ये दो मामले ही नहीं हैं। यहां शनिवार को दिनभर मरीज लारी से लेकर ट्रॉमा के बीच चक्कर काटते रहे। अव्यवस्था का आलम यह है कि लारी कार्डियोलॉजी में दीवार पर इमरजेंसी बंद होने की नोटिस चस्पा कर दिया गया है, लेकिन वहां ट्रॉमा जाने के बारे में बताने वाला कोई नहीं है। ग्रामीण इलाके से आने वाले मरीज कभी इमरजेंसी की गेट पर तो कभी आईसीयू के गेट पर भटक रहे हैं। दिल के गंभीर मरीज घंटे-दो घंटे चक्कर काटने के बाद निजी अस्पताल जाने को विवश हैं।
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गौरतलब है कि लारी कार्डियोलॉजी में शुक्रवार को मरीज अब्दुला की मौत के बाद तीमारदारों ने हंगामा किया था। इस पर रेजीडेंटों ने जानलेवा हमले का आरोप लगा इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी। इमरजेंसी बंद होने के बाद से ट्रॉमा में मरीज देखने का फैसला लिया गया है। ट्रॉमा में दो रेजीडेंट और एक टेक्नीशियन की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन यह व्यवस्था नाकाफी है। आमतौर पर लारी कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में 150 से 160 मरीज आते हैं। इसमें 25 से 30 मरीजों को भर्ती किया जाता है। शनिवार को ट्रॉमा सेंटर में दिल के गंभीर 19 मरीज ही पहुंचे। इसमें आठ को भर्ती किया गया। ये आंकड़े बता रहे हैं कि कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी बंद होने के बाद हृदय रोग के गंभीर मरीजों की हालत खराब है।
ट्रॉमा की भीड़ बनी मुसीबत
केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि दिल के गंभीर मरीजों को ट्रॉमा में इलाज दिया जा रहा है, लेकिन जानकारी का अभाव और ट्रॉमा की भीड़ हृदयरोग के मरीजों के लिए समस्या बनी है। गंभीर रूप से पीड़ित मरीज पहले लारी कार्डियोलॉजी पहुंचते हैं। काफी जद्दोजहद के बाद पता चलता है कि ट्रॉमा जाना है। ट्रॉमा में पहले से ही मरीजों की लाइन लगी रहती है। ऐसे में हृदय रोग से पीड़ित मरीज के परिवारीजन निजी अस्पताल जाने के लिए विवश हैं।
मंगलवार को होगा फैसला
केजीएमयू प्रशासन लारी कार्डियोलॉजी में इमरजेंसी चलाने के बारे में मंगलवार को फैसला करेगा। पहले तय था कि सोमवार को बैठक करके सुरक्षा व्यवस्था चुस्त एवं दुरुस्त कर ली जाएगी। इसके बाद इमरजेंसी सेवा चालू कर दी जाएगी, लेकिन रेजीडेंटों की जिद है कि वे लारी में इमरजेंसी सेवाएं नहीं देंगे। इस पर केजीएमयू प्रशासन ने पैर खींच लिया है। अब मंगलवार को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक होगी। इस बैठक में इमरजेंसी संचालन पर रणनीति बनेगी।
बैठक में तय होगा- कब चलेगी इमरजेंसी
लारी कार्डियोलॉजी में पुलिस चौकी खुलने के बाद भी घटनाएं थमी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों की जान को खतरा है। वे इमरजेंसी में काम करने को तैयार नहीं हैं। अभी वैकल्पिक तौर पर ट्रॉमा में मरीज देखे जा रहे हैं। जहां तक मरीजों के भटकने का सवाल है तो कुछ दिन में सभी लोगों को पता चल जाएगा कि इमरजेंसी के लिए ट्रॉमा ही जाना है। फिलहाल मंगलवार को केजीएमयू प्रशासन और पुलिस के बीच बैठक होगी। इसमें तय होगा कि इमरजेंसी चलाई जाए या नहीं।
-डॉ. अक्षय प्रधान, मीडिया प्रभारी, कार्डियोलॉजी विभाग, केजीएमयू