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जानिए इन दिनों इस वजह से तबाह है यूपी की बिजली

Thu, 01 Oct 2015 11:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Oct 2015 11:36 AM IST
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know the reasons behind power crisis in uttar pradesh

मानसून की बेरुखी और बिजलीघरों के उत्पादन में कमी के चलते सूबे की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई है। केंद्र और राज्य के बिजलीघरों की कई इकाइयों के बंद हो जाने से प्रदेश में बिजली का जबरदस्त संकट खड़ा हो गया है।

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बारिश न होने से जहां बिजली की मांग बढ़ गई है वहीं बिजलीघरों के उत्पादन में कमी हो जाने से आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मांग और उपलब्धता में 1500-2000 मेगावाट का भारी अंतर होने की वजह से आपूर्ति पटरी पर रखना अभियंताओं के लिए काफी मुश्किल हो रहा है।
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हालात संभालने के लिए बुधवार को आनन-फानन में एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने का भी फैसला किया गया लेकिन मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने की वजह से महानगरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अतिरिक्त आपात कटौती करनी पड़ रही है।
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प्रदेश में बिजली की मांग 13,500 मेगावाट से ऊपर पहुंच रही है जबकि अधिकतम उपलब्धता 11,500 मेगावाट के आसपास ही है। गरमी के कारण शहरों में तो बिजली की मांग ज्यादा है ही, बारिश न होने से ग्रामीण इलाकों में भी सिंचाई के लिए ज्यादा बिजली की दरकार है।

बंद हुईं कई इकाइयां भी

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केंद्रीय सेक्टर के रिहंद सुपर, सिंगरौली, नरौरा, टिहरी आदि बिजलीघरों की 1500 मेगावाट से ज्यादा क्षमता की इकाइयां बंद होने से केंद्र से यूपी को मिलने वाली बिजली में कमी हो गई है। इस बीच ललितपुर की 660 मेगावाट, अनपरा डी की 500 मेगावाट तथा पारीछा की 110 मेगावाट क्षमता की एक इकाई भी बंद चल रही है।

अभियंताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य के बिजलीघरों की इकाइयों के बंद होने का आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा है।
पावर कॉर्पोरेशन ने आनन-फानन में एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने का फैसला किया। हाथ-पांव मारने के बाद 500 मेगावाट बिजली ही मिल पाई।

आधी रात के बाद एनर्जी एक्सचेंज से बिजली मिलने की उम्मीद है। आपूर्ति में थोड़ा-बहुत सुधार हो सकता है लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में वक्त लग सकता है। अभियंताओं के मुताबिक बारिश न होने से इस साल रिहंद जलाशय भी पूरी तरह नहीं भर सका है।

पिछले साल के मुकाबले इस साल रिहंद का जलस्तर लगभग पांच फिट नीचे चला गया है इसलिए जल विद्युत इकाइयों को भी अपरिहार्य परिस्थितियों में ही चलाया जा रहा है। जलस्तर और नीचे होने पर तापीय इकाइयों के लिए पानी की किल्लत हो सकती है।

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