जानिए आइसोलेशन और क्वारंटीन में क्या है अंतर, कोरोना से बचाव में है बेहद कारगर
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कोरोना के संक्रमण की वजह से इन दिनों दो शब्द क्वारंटीन व आइसोलेशन स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर आम लोगों तक की जुबान पर हैं। इन दोनों के अलग मायने हैं। चिकित्सकीय भाषा में कोरोना संदिग्ध मरीज के लिए क्वारंटीन शब्द का प्रयोग किया जाता है, जबकि पॉजिटिव मिले मरीजों के लिए आइसोलेशन शब्द का प्रयोग हो रहा है। आप भी जानिये दोनों में बुनियादी तौर पर क्या अंतर है।
क्या है आइसोलेशन
इसमें संक्रमित व्यक्ति को अलग कमरे में रखा जाता है और दूसरे लोगों से दूरी बनी रहती है। जब तक बहुत जरूरी न हो कोई भी उस कमरे में नहीं जाता है।
संक्रमण का शक हो तो आइसोलेशन के दौरान हवादार कमरे में रहें। अलग बाथरूम का इस्तेमाल करें। हॉस्पिटल न जाएं। जांच करानी हो तो फोन से सूचना दें, जिससे स्वास्थ्य विभाग की टीम सुरक्षित तरीके से सैंपल ले सके। जांच के लिए लार देते समय सावधानी बरतें। सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल डॉक्टर से बात करें। जरूरत के हिसाब से अस्पताल में रहें। अपने आप से दवा न लें। सार्वजनिक यातायात, कैब, टैक्सी आदि से भी बचें।
क्वारंटीन का मतलब आपके लिए क्या है
इसमें घर के एक कमरे में अलग रहना होता है। परिवार के सदस्य या किसी बाहरी से सीधा संपर्क नहीं रखा जाता है। संदिग्ध के कमरे में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं जाए। बाथरूम नियमित तौर पर साफ हो। दूसरा व्यक्ति इसे इस्तेमाल न करे। संदिग्ध से छह फीट दूर रहना चाहिए। बाहर निकलें तो मास्क पहन लें । घर में अकेले हैं तो अपना जरूरी सामान किसी से मंगवाए। एक ही किचन है तो एक ही व्यक्ति वहां जाए। खुद किचन में जाने से बचें। बार-बार साबुन से हाथ धुलते रहें। अपना कचरा इधर-उधर न फेंके।