लखनऊ के एक रेस्तरां में लिखी जोशी ने पहली प्रकाशित कहानी, बेहद रोचक है शीर्षक बदलने का कारण
विज्ञान के विद्यार्थी मनोहर श्याम जोशी को लेखक बनने की धुन कुछ इस कदर चढ़ी कि उनका समय बाहर की किताबें पढ़ने में बर्बाद होने लगा। कम ही लोगों को पता होगा कि मनोहर श्याम जोशी की चर्चित कहानी ‘और गीत बंद हो गए’ पहली प्रकाशित रचना है।
यह कहानी उन्होंने लखनऊ में लिखी थी। किस्सा कुछ यूं है। कई बार क्लास से गायब होकर अपने कदम वह पुस्तकालय की ओर न बढ़ाकर कुमाऊं रेस्तरां की ओर बढ़ा देते। कारण, जोशी जी की विचित्र आदत थी कि वह एकांत में बैठकर पढ़ तो सकते थे लेकिन एकांत में लिख कुछ नहीं सकते थे।
कुमाऊं रेस्तरां में एक कमरा आगे था और एक पीछे। पीछे वाले कमरे में दिन के समय कोई नहीं रहता था। इसलिए जोशी जी अपनी धुनी वहीं रमाते और पढ़ते। मनोहर श्याम जोशी ने खुद अपने संस्मरण में लिखा है, वे अंदर ही बैठे रहते। पढ़ते रहते। पर, जब उन्हें शोरगुल और बाहर की दुनिया देखने की इच्छा होती या लिखने का मन होता तो वह बाहर वाले कमरे में आकर बैठ जाते।
किसी छात्र के साथ चाय पीते या गप्पे लगाते। कोई न होता तो रेस्तरां के मालिक टाइगर पंडित से ही बतिया लेते। इसके बाद वह अंदर कमरे में जाकर कहानी लिखते तो टाइगर पंडित से आग्रह करके रेडियो ऑन करा देते। रेडियो पर संगीत बजता और जोशी कहानी लिखते रहते।
संगीत सुनते कहानी लिखना उन्हें काफी अच्छा जो लगता था। कहानी पूरी हुई। जोशी ने इसका नाम रखा ‘धुआं।’ इस कहानी को उन्होंने ‘सरगम’ के संपादक ख्वाजा अहमद अब्बास के पास छपने को भेजा। ख्वाजा साहब को पता था कि जोशी ने यह कहानी रेस्तरां में बैठकर और वह भी रेडियो पर संगीत सुनते हुए लिखी है। उन्होंने कहानी का शीर्षक बदलकर ‘और गीत बंद हो गए’ कर दिया।’