खुशखबरीः अब मरीजों को आसानी से मिल सकेगी किडनी
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डॉ.राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भी गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू होगा। एसीजीपीआई और केजीएमयू के बाद ये प्रदेश का तीसरा चिकित्सा संस्थान होगा जहां ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। इसके लिए दो नेफ्रोलॉजिस्ट और दो यूरोलॉजिस्ट की टीम बन चुकी है।
मॉड्यूलर ओटी,आईसीयू,डायलिसिस यूनिट भी लगभग तैयार है। सब कुछ ठीक रहा तो तीन-चार महीने में प्रदेश के एक और संस्थान में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो जाएगी।
किसी भी संस्थान में गुर्दा प्रत्यारोपण में सबसे बड़ी बाधा नेफ्रोलॉजिस्ट का न मिलना है। लेकिन लोहिया इंस्टीट्यूट ने इस संकट से निजात पा ली है। संस्थान में दो गुर्दा रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) डॉ. शिवेंद्र और डॉ. अभिलाष की नियुक्ति की गई है।
तीन महीने में शुरू हो जाएगी ये सुविधा
प्रत्यारोपण के पहले और बाद में मरीज की देखभाल के लिए दो नेफ्रोलॉजिस्ट के साथ ही रेजीडेंट डॉक्टर भी संस्थान को मिल चुके हैं। ट्रांसप्लांट यूनिट और एमआईसीयू को तैयार किया जा रहा है।
जिसमें लगभग दो महीने लगने की संभावना है। इसी के साथ लोहिया इंस्टीट्यूट में सभी ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी सभी संसाधन पूरे हो जाएंगे। संस्थान प्रशासन ने शासन से ट्रांसप्लांट शुरू करने की अनुमति लेने के लिए पत्र भेज दिया है।
आरएमएलआईएमएस के निदेशक प्रो.नुजहत हुसैन ने बताया कि शासन से अनुमति मिलने के बाद प्रत्यारोपण शुरू कर दिया जाएगा। लगभग तीन से चार महीने इन प्रक्रिया को पूरा करने में लगेगा।
एसजीपीजीआई में छह महीने से एक साल की वेटिंग
वहीं किडनी ट्रांसप्लांट के लिए संजय गांधी पीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभाग में छह महीने से एक साल की वेटिंग है। इससे भी बुरा हाल कार्डियोवस्कुलर थोरेसिक सर्जरी में हैं। किडनी ट्रांसप्लांट का नंबर तीन से छह माह में आता है।
हीमेटोलॉजी में कीमोथेरेपी के लिए भी रोजाना मरीजों की लंबी लाइन लगती है। सीटी स्कैन और एमआरआई के लिए भी मरीजों को एक से डेढ़ महीने का इंतजार करना पड़ रहा है।
सुपर स्पेशिएलिटी सुविधाएं देने वाले संजय गांधी पीजीआई का एक चेहरा ये भी है। किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) के लिए वहां मरीजों की लंबी लाइन है। इस सुविधा को उपलब्ध कराने वाला ये प्रदेश का इकलौता संस्थान है।
एसजीपीजीआई के वेबसाइट पर गुर्दा प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों की लिस्ट पर नजर डालें तो 450 से अधिक नाम उसमें लिखे हैं। जबकि एसजीपीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण की क्षमता इस समय साल में 120 से 130 है। इस तरह 450वें नंबर के मरीज के प्रत्यारोपण का नंबर साढ़े तीन साल बाद आएगा।