फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   kgmu will now adopt few patient system

केजीएमयू में सीमित मरीज देखने का प्रस्ताव, बढ़ेगी परेशानी

Thu, 21 Feb 2019 01:40 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सौरभ दिक्षित Updated Thu, 21 Feb 2019 01:40 AM IST
विज्ञापन
kgmu will now adopt few patient system
डेमो - फोटो : डेमो

लखनऊ। एसजीपीजीआई की तर्ज पर अब केजीएमयू में भी निर्धारित मरीज ही देखने की योजना बनाई जा रही है। हॉस्पिटल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में प्रस्ताव रखा जा चुका है। हालांकि अभी इस पर मुहर नहीं लगी है। इस फैसले से मरीजों का दर्द बढ़ेगा। ऐसे में बीच का रास्ता निकालने हुए तय किया गया है कि सभी विभागाध्यक्ष अपनी सुविधा अनुसार मरीज देखें। इनकी संख्या सीमित कर लें, लेकिन एसजीपीजीआई से अधिक मरीज देखे जाएं।

विज्ञापन

केजीएमयू में ओपीडी में रोजाना छह से आठ हजार मरीज होते हैं। कार्डियोलॉजी, गठिया, मेडिसिन, आंकोलॉजी, न्यूरोलॉजी सहित कई विभागों की ओपीडी आठ से नौ सौ मरीजों के बीच रहती है। इसमें आधे नए मरीज होते हैं। जिन विभागों में मरीजों की संख्या ज्यादा होती है उन्हें शाम तक रुकना पड़ता है। हॉस्पिटल एडवाइजरी कमेटी की जनवरी में हुई बैठक में कार्डियोलॉजी विभाग की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि ओपीडी में मरीज देखने की अधिकतम संख्या तय की जाए और उनका एप्वाइंटमेंट लेने की प्रणाली भी दुरुस्त की जाए। तर्क दिया गया कि एसजीपीजीआई में ऐसी व्यवस्था चल रही है। सूत्रों की मानें तो कमेटी के ज्यादातर सदस्य इस पर राजी थे। हालांकि, कुछ सदस्यों ने मरीजों से सहानुभूति दिखाने की अपील की। तय किया गया कि केजीएमयू में अभी ई- हॉस्पिटल व्यवस्था पूरी तरह से लागू नहीं है। यहां ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के मरीज आते हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या बाद में तय होगी। तब तक संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष अपनी सुविधा अनुसार ओपीडी में मरीज देखें। हालांकि इसका ध्यान रखा जाए कि पीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से कम मरीज न देखें जाएं।
विज्ञापन


एसजीपीजीआई में यह व्यवस्था
यहां रोजाना ओपीडी में 40 नए मरीज देखे जाते हैं। इसके अलावा फॉलोअप वाले मरीजों को देखा जाता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने अभी मरीजों की संख्या के आधार पर ओपीडी तय नहीं की है। हालांकि दोपहर दो बजे के बाद ओपीडी बंद हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मरीज निर्धारित करने के पीछे यह भी तर्क
केजीएमयू में सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक पर्चा बनता है। ओपीडी में मरीज दो बजे तक देखे जाते हैं। ऐसे में जिन विभागों में मरीजों की संख्या ज्यादा होती है, उन्हें देर तक रुकना पड़ता है। जिन विभागों में मरीजों की संख्या कम होती है वे दो बजे खाली हो जाते हैं और डॉक्टर निकल लेते हैं। मरीजों की संख्या तय होने से सभी विभाग के चिकित्सा विशेषज्ञ दो बजे तक खाली हो जाएंगे।

कार्डियोलॉजी में 12 बजे तक ही बनता पर्चा
केजीएमयू की ओपीडी में एक बजे तक पर्चा बनने का प्रावधान है, लेकिन कमेटी की बैठक के बाद से कार्डियोलॉजी की ओपीडी में दोपहर 12 बजे तक ही पर्चा बनता है। काउंटर के कर्मचारियों को स्पष्ट आदेश है कि वे 12 बजे के बाद कोई पर्चा न बनाएं। इसके बाद आने वाले मरीजों को अगले दिन का इंतजार करना होगा। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. वीएन नारायण का कहना है कि 12 बजे तक जितने मरीजों का पर्चा बन जाता है, उतने को सही तरीके से देखने में शाम हो जाती है। चिकित्सा की गुणवत्ता बनाए रखने को ऐसी व्यवस्था बनाई गई है।

...तो हजारों मरीजों को लौटना पड़ेगा
केजीएमयू में पूरे प्रदेश से मरीज आते हैं। विभिन्न जिलों से आने वाले मरीज दोपहर तक पहुंच पाते हैं। एक बजे तक पर्चा बन जाने से वे दोपहर बाद तक चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद शाम तक लौट जाते हैं। अब यदि संख्या तय कर दी गई तो मरीजों को केजीएमयू में ही रुकना पड़ सकता है।

ट्रॉमा सेंटर में भी नो बेड, नो एडमिशन
कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट की अध्यक्षता वाली बैठक में यह भी तय किया गया कि बेड़ खाली होने पर ही मरीज को भर्ती किया जाए। बेड फुल हों तो आने वाले मरीजों को सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाए। ऐसे में दुर्घटनाओं के बाद इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जान बचाना मुश्किल होगा। इसका कारण है कि ट्रॉमा सेंटर में अभी तक ज्यादातर विभाग बेड फुल होने से स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती करते हैं। मरीज के वार्ड में शिफ्ट होने पर स्ट्रेचर वाले को बेड मिलता है। सबसे ज्यादा परेशानी मेडिसिन, न्यूरो सर्जरी और जनरल सर्जरी में होती है। बैठक में यह भी तय किया गया कि मरीज को रेफर करते समय उसके अटेंडेंट की काउंसलिंग की जाए। जब तक मरीज कैजुअल्टी में रहे, उसका इलाज किया जाए। फिलहाल ट्रॉमा सेटंर में 410 बेड हैं। करीब सौ से दो सौ मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती किए जाते हैं। ट्रॉमा के रिकॉर्ड के मुताबिक कैजुअल्टी में हर 24 घंटे में दो से ढाई सौ मरीज आते हैं।


केजीएमयू का फैक्ट फाइल
रोजाना ओपीडी में मरीज - छह से आठ हजार
पिछले साल कुल ओपीडी में मरीज - 16 लाख 33 हजार
संकाय सदस्य - करीब 556
रेजीडेंट - करीब 750
कर्मचारी - करीब 5000 से ज्यादा


स्वविवेक से मरीज देखेंगे विभागाध्यक्ष
हॉस्केजीएमयू के सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार ने बताया कि हॉस्पिटल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव आया था। ओपीडी के समय और ट्रॉमा सेंटर में बेड की समस्या पर बात हुई थी। हालांकि मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए अभी ओपीडी में यह व्यवस्था लागू नहीं की गई है। सभी विभागाध्यक्षों को स्वविवेक से ओपीडी में अधिक से अधिक मरीज देखने की बात कही गई है। ट्रॉमा में भीड़ की वजह से गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। ऐसे में जो गंभीर नहीं हैं, उन्हें सरकारी अस्पतालों में रेफर करने की व्यवस्था बनाई गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed