फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Kgmu saves child

केजीएमयूके चिकित्सक ने दी बच्चे को नई जिंदगी

Thu, 05 Sep 2019 01:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Sep 2019 01:00 AM IST
विज्ञापन
Kgmu saves child
गुरुग्राम के निजी अस्पताल में आठ बार सर्जरी फेल, केजीएमयू में मिली नई जिंदगी
विज्ञापन

जिस 12 साल के बच्चे की पेशाब की नली को गुरुग्राम के निजी अस्पताल के डॉक्टर आठ बार सर्जरी करने के बाद भी दुरुस्त नहीं कर सके, उसे केजीएमयू के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दे दी।
केजीएमयू के डॉक्टरों का दावा है कि बच्चे को जन्मजात बीमारी हाइपोस्पेडियास से एक सर्जरी में ही निजात दिला दी गई। बच्चे को बुधवार को घर भेज दिया गया।
हर 15 दिन में उसे फॉलोअप के लिए बुलाया गया है। सर्जरी पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष पद्मश्री प्रो. एसएन कुरील ने की। यह बीमारी जन्म लेने वाले 250 में से एक बच्चे में होने की आशंका रहती है।
विज्ञापन

प्रो. कुरील ने बुधवार को वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट की मौजूदगी में हरदोई निवासी बच्चे और उसके परिवारीजनों के सामने सर्जरी की पूरी तकनीक की जानकारी दी।
बताया कि 2015 में बच्चे को गुरुग्राम के अस्पताल ले जाया गया। वहां दो साल में आठ बार सर्जरी हुई। करीब आठ लाख रुपये खर्च हुए पर सफलता नहीं मिली।
इस पर परिवारीजन जनवरी 2019 में केजीएमयू आए। यहां 19 अगस्त को सर्जरी की गई। इसमें करीब 85 हजार रुपये खर्च हुए।
ऑपरेशन करने वालों में प्रो. कुरील के साथ डॉ. अर्चिका गुप्ता, डॉ. राहुल कुमार, एनेस्थीसिया से डॉ. विनीता सिंह की टीम व ओटी सिस्टर वंदना की टीम थी।
जानिए, क्या थी समस्या
प्रो. कुरील ने बताया कि हाइपोस्पेडियास से जूझ रहे बच्चे का लिंग जन्म से धनुष की तरह मुड़ा था। पेशाब का रास्ता लिंग की ओर न होकर अंडकोष की ओर था। इस बीमारी की कई वजहें हैं। इसमें पेस्टीसाइडयुक्त खान-पान है। स्ट्रोजन का प्रयोग, गर्भ ठहरने के बाद लगातार गर्भनिरोधक गोली खाना भी कारण हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे हुआ ऑपरेशन
प्रो. कुरील ने बताया कि लिंग की चार प्रमुख नसें होती हैं। दो डर्सो लैटरल और दो डर्सो मीडियल। जांच में पता चला कि मुख्य रूप से डर्सो मीडियल की एक नस पूरी तरह सुरक्षित है। उसकी सहायक नसें भी ठीक मिलीं। उसी नस के आधार पर सर्जरी की गई। पेशाब के अधूरे रास्ते को सर्जरी से पूरा किया गया। उम्र के साथ लिंग का विकास होता रहेगा। प्रो. कुरील का दावा है कि 2015 से अब तक हाइपोस्पेडियास के करीब 150 ऑपरेशन कर चुके हैं। इस बीमारी में नसों की खोज को लेकर उनकी शोध रिपोर्ट इंटरनेशनल अमेरिकन जर्नल 2015 में छप चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed