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Lucknow News: लारी में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की स्थिति देखने पहुंचे डीन
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लारी में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की स्थिति देखने पहुंचे डीन
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह मंगलवर को लारी कार्डियोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने व्हील चेयर और स्ट्रेचर की स्थिति भी देखी।
विभाग में व्हील चेयर और स्ट्रेचर की अनुपलब्धता की शिकायत के बाद कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर डीन और प्रवक्ता प्रो. केके सिंह अन्य संकाय सदस्यों के साथ सुबह करीब 10 बजे लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने ओपीडी पहुंचकर मरीजों का हाल जाना। ओपीडी हाल मरीजों से पूरी तरह भरा हुआ था और काफी मरीज खड़े भी थे। यहांलिखी गई दवाओं की उपलब्धता उन्होंने हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के दवा काउंटर पर जांची। प्रो. केके सिंह के अनुसार ज्यादातर दवाएं उपलब्ध थीं। निरीक्षण के दौरान निजी मेडिकल स्टोर के एजेंट नजर नहीं आए। उनके मुताबिक उस समय पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध थे। प्रो. केकेसिंह के अनुसार कई बार तीमारदार मरीज को जांच के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाते हैं। इसके बाद स्ट्रेचर और व्हीलचेयर वहीं छोड़ दिए जाते हैं। इस वजह से मौके पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिल पाते हैं। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
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विभाग में व्हील चेयर और स्ट्रेचर की अनुपलब्धता की शिकायत के बाद कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर डीन और प्रवक्ता प्रो. केके सिंह अन्य संकाय सदस्यों के साथ सुबह करीब 10 बजे लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने ओपीडी पहुंचकर मरीजों का हाल जाना। ओपीडी हाल मरीजों से पूरी तरह भरा हुआ था और काफी मरीज खड़े भी थे। यहांलिखी गई दवाओं की उपलब्धता उन्होंने हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के दवा काउंटर पर जांची। प्रो. केके सिंह के अनुसार ज्यादातर दवाएं उपलब्ध थीं। निरीक्षण के दौरान निजी मेडिकल स्टोर के एजेंट नजर नहीं आए। उनके मुताबिक उस समय पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध थे। प्रो. केकेसिंह के अनुसार कई बार तीमारदार मरीज को जांच के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाते हैं। इसके बाद स्ट्रेचर और व्हीलचेयर वहीं छोड़ दिए जाते हैं। इस वजह से मौके पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिल पाते हैं। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
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