{"_id":"59b397024f1c1bf87f8b5407","slug":"kgmu-lucknow-suspended-four-teachers-after-found-guilty-of-private-practice","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट से नहीं मिली राहत केजीएमयू ने किया चार शिक्षकों को सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट से नहीं मिली राहत केजीएमयू ने किया चार शिक्षकों को सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:56 PM IST
विज्ञापन
केजीएमयू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केजीएमयू ने अपने चार शिक्षकों डॉ. पारुल वर्मा, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. शिऊली और डॉ. शैलेंद्र सिंह को छह माह के लिए सस्पेंड कर दिया है। ये सभी अब वहां न तो शिक्षण कार्य और न ही इलाज करेंगे।
विज्ञापन
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निरीक्षण में इन शिक्षकों का नाम दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी मिला था। इसके बाद एमसीआई ने इनके पंजीकरण को छह माह के लिए निलंबित किया था।
विज्ञापन
इसके विरोध में तीन शिक्षक कोर्ट गए थे। जहां से अगली सुनवाई तक उन्हें स्टे मिल गया था। बीते शनिवार को कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद इन सभी को निलंबित कर दिया गया है।
विज्ञापन
डॉ. पारुल वर्मा चर्म रोग विभाग, डॉ. संजीव कुमार जनरल सर्जरी, डॉ. शिऊली फोरेंसिक मेडिसिन और डॉ. शैलेंद्र सिंह आर्थोपैडिक विभाग में हैं।
फरवरी 2016 में एमसीआई ने निरीक्षण के बाद इनके नाम केजीएमयू के अतिरिक्त एक-एक अन्य मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों की सूची में पाए थे।
इसके बाद एमसीआई की एथिकल कमेटी ने इनके पंजीकरण अगस्त 2016 में ऑर्डर करके तीन माह के लिए निलंबित कर दिए। इसके बाद शिक्षकों ने एमसीआई में अपील की तो उन्होंने पंजीकरण निलंबन की समयसीमा बढ़ाकर छह माह कर दी।
इसका आदेश 2 फरवरी 2017 को जारी कर दिया गया। इसके बाद शिक्षकों ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। इस पर उन्हें मामले पर कोई फैसला आने तक पहले की तरह कार्य करने के आदेश जारी किए गए।
31 अगस्त को हाईकोर्ट ने शिक्षकों की अपील को खारिज करते हुए कहा कि वह इसके लिए उपयुक्त प्राधिकारी से संपर्क करे। कोर्ट का ये आदेश केजीएमयू पहुंचने के बाद सभी चार शिक्षकों को शिक्षण व इलाज के कार्य से निलंबित कर दिया गया।