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देखिए, सरकारी डॉक्टर कैसे कर रहे हैं गोरखधंधा!

Fri, 24 Jul 2015 03:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 24 Jul 2015 03:16 PM IST
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kgmu doctors involved in private practice

प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग ही नहीं केजीएमयू के डॉक्टर भी प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। ये हालत तब है जब हाईकोर्ट और राजभवन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपना रखा है।

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यहां तक कि केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. एसके अग्रवाल ने तो जिला प्रशासन के साथ मिलकर 75 डॉक्टरों का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटो के साथ सबूत सभी जगह उपलब्ध कराए थे।
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इससे प्राइवेट प्रैक्टिस पर तो रोक नहीं लग सकी लेकिन कई चिकित्सकों ने केजीएमयू को ही छोड़ दिया। वहीं कई वीआरएस लेकर दोबारा संविदा पर केजीएमयू में नौकरी और प्राइवेट प्रैक्टिस दोनों में जुटे हैं।
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केजीएमयू के चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने के मोह को कोई भी शासन-प्रशासन और अभी तक तैनात हुए कुलपति भी नहीं छुड़ा पाए हैं। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. आशीष वाखलू और फिजियोलॉजी के डॉ. संदीप भट्टाचार्य ही नहीं संस्थान के 50 फीसदी से अधिक चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए कुख्यात हैं।

यही नहीं वो अभी चोरी-छिपे लगातार प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। इनके बारे में बाकायदा भाजपा नेता विनय कटियार सहित कई सांसदों और विधायकों ने भी शिकायतें की थीं।

जनप्रतिनिधियों ने की थी शिकायत

kgmu doctors involved in private practice

विधायक भगेलू राम, राज्य सभा सांसद विनय कटियार और विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने 28 जून 2010 को राज्यपाल को पत्र लिखकर केजीएमयू के शिक्षकों, चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त रहने की शिकायत की थी।

इस पत्र के साथ उन्होंने 75 शिक्षकों की एक लिस्ट और उनकेप्राइवेट प्रैक्टिस करने की सबूत भी दिए थे। इसी आधार पर राजभवन ने केजीएमयू प्रशासन को चिठ्ठी लिखकर शिक्षकों के खिलाफ आरोपों का सत्यापन करने और उसका जवाब भेजने के आदेश दिए थे।

चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन 75 शिक्षकों की एलआईयू रिपोर्ट और प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले स्थानों की फोटो सहित रिपोर्ट राजभवन को भेजी थी।

केजीएमयू के रजिस्ट्रार योगेश कुमार शुक्ला ने बताया कि अगर कोई डॉक्टर चोरी से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहा है तो इसका पता लगाने के लिए कुलपति ने डीन को अधिकृत किया गया है। पीजीआई के बराबर वेतन व भत्ते हो गए हैं, इसके बाद भी प्रैक्टिस हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी।

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