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डॉक्टर्स का कमाल: बड़ी आंत से बना दिया यूरिनरी ब्लैडर

Sat, 03 Jan 2015 04:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 03 Jan 2015 04:13 PM IST
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kgmc doctors gives hope to bladder cancer patients.

केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने बड़ी आंत से यूरिनरी ब्लैडर बनाकर मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिया। 60 से अधिक मरीजों में इसका सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है।

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उनके इस कारनामे को ब्रिटिश जरनल ऑफ यूरोलॉजी और साउथ एशियन जरनल ऑफ कैंसर ने कवर पेज पर जगह दी है। अभी तक विश्व भर में छोटी आंत से ही यूरिनरी ब्लैडर बनाए जा रहे थे।
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केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग ने यूरिनरी ब्लैडर के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को एक विकल्प उपलब्ध करा दिया है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एसएन शंखवार और प्रो. विश्वजीत ने बताया कि कैंसर के कारण यूरिनरी ब्लैडर को सर्जरी कर हटाना पड़ता है। ऐसे में मरीज के शरीर से बाहर एक पाउच लगा दिया जाता है।
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जिसमें यूरिन इकठ्ठा होता है। इस पाउच (कांड्यूल) की वजह से मरीज के शरीर से बदबू आती रहती है और उसके भर जाने पर उसे खाली भी करना होता है। मरीज को इसी दिक्कत से बचाने के लिए उसकी बड़ी आंत के 40 सेंटीमीटर हिस्से को काटकर यूरिन ब्लैडर बनाया जाता है और उसे यूरेटर से जोड़ दिया जाता है।

इसमें तीन सप्ताह के बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है और सामान्य लोगों की तरह ही मूत्र त्याग करता है। प्रो. विश्वजीत ने बताया कि आंत से बने ब्लैडर की खासियत यह होती है कि ये पेशाब की थैली की तरह कार्य करता है। इस ब्लैडर की कार्यप्रणाली की जांच यूरोडायनमिक मशीन से की जाती है।

सर्जरी में लगते हैं पांच घंटे

kgmc doctors gives hope to bladder cancer patients.

प्रो. विश्वजीत ने बताया कि इस सर्जरी में चार से पांच घंटे का समय लगता है। पहले मरीज के पेट को खोलकर उससे कैंसरग्रस्त ब्लैडर को बाहर निकालते हैं।

इसके बाद छोटी आंत और बड़ी आंत की जांच करते हैं। बड़ी आंत सही पाए जाने पर उसके 40 सेमी. हिस्से को काटकर निकाल लेते हैं। इसके बाद कटी हुई आंत को वापस जोड़ दिया जाता है।

जिस हिस्से को बाहर काटकर अलग करते हैं उसका पाउच बनाया जाता है। इसके बाद उसे यूरेटर से जोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिकतम पांच घंटे का समय लगता है।

एक सप्ताह तक मरीज को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रखना पड़ता है।  एक सप्ताह बाद मरीज को लिक्विड भोजन की इजाजत दी जाती है। तीन सप्ताह में मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है और सामान्य तरीके से मूत्र त्याग कर सकता है।

प्रो. एसएन शंखवार ने बताया कि यूरिनरी ब्लैडर (पेशाब की थैली) के कैंसर का मुख्य लक्षण बिना दर्द के पेशाब में खून आना है। यदि इन लक्षणों के साथ खून और उसके थक्के निकलें तो मरीज को यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।

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