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..... तो इस बार डालीगंज पुल पर नहीं लगेगा कतकी मेला
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 26 Oct 2017 02:11 PM IST
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लखनऊ में बीते कई दशकों से लगने वाला परंपरागत कतकी मेला डालीगंज पुल पर नहीं लगेगा। मेला चार नवंबर से लगना प्रस्तावित है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों के साथ-साथ डेढ़ माह तक बिगड़ने वाली यातायात व्यवस्था के मद्देनजर यह रोक लगाई है। यह जानकारी एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने दी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में मेला आयोजन से जुड़े आयोजकों को बुलाकर कहा गया है कि वह अगर मेला आयोजित करना चाहते हैं तो इसके लिए कोई नया और सुरक्षित आयोजन स्थल चुन लें। चिह्नित स्थल पर नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों की एनओसी के आधार पर ही प्रशासन इसके आयोजन की अनुमति पर विचार करेगा।
उन्होंने मनकामेश्वर मंदिर के समक्ष झूलेलाल घाट या कुड़ियाघाट पर कतकी मेला लगाए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कहा गया कि इससे गोमती नदी के प्रदूषित होने के साथ मेला में हिस्सेदारी करने वालों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी। कार्तिक माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला डालीगंज का ऐतिहासिक कतकी मेला 40 दिन तक चलता है। क्षेत्रीय लोगों द्वारा गठित आयोजन समिति इसे 100 साल पुराना बताती है।
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उन्होंने बताया कि इस संबंध में मेला आयोजन से जुड़े आयोजकों को बुलाकर कहा गया है कि वह अगर मेला आयोजित करना चाहते हैं तो इसके लिए कोई नया और सुरक्षित आयोजन स्थल चुन लें। चिह्नित स्थल पर नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों की एनओसी के आधार पर ही प्रशासन इसके आयोजन की अनुमति पर विचार करेगा।
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उन्होंने मनकामेश्वर मंदिर के समक्ष झूलेलाल घाट या कुड़ियाघाट पर कतकी मेला लगाए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कहा गया कि इससे गोमती नदी के प्रदूषित होने के साथ मेला में हिस्सेदारी करने वालों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी। कार्तिक माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला डालीगंज का ऐतिहासिक कतकी मेला 40 दिन तक चलता है। क्षेत्रीय लोगों द्वारा गठित आयोजन समिति इसे 100 साल पुराना बताती है।
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परेशान होते हैं बीमार व तीमारदार
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मेला आयोजन के कारण 40 दिन तक डालीगंज में ध्वस्त रहने वाली ट्रैफिक व्यवस्था का सबसे ज्यादा खामियाजा मेडिकल कॉलेज व लिंब सेंटर जाने वाले मरीजों व तीमारदारों को भुगतना पड़ता है। जाम के कारण मरीज घंटों रास्ते में फंसे रहते हैं। जाम के कारण गंभीर मरीजों की मौत तक हो चुकी है। इसी के चलते बीते दो साल से कार्तिक मेला के आयोजन को बंद किए जाने की मांग उठ रही थी।
बीते साल भी मेला स्थल बदलने की कवायद हुई थी। मनकामेश्वर कतकी मेला समिति ने मेला लगाने के लिए झूलेलाल घाट को हर तरीके से उपयुक्त बताया था। समिति की सदस्यों का कहना था कि मनकामेश्वर उपवन घाट पर कतकी मेला लगने से दुकानदारों को खुला स्थान मिलेगा।
वहीं डालीगंज जैसे व्यस्त रूट पर ट्रैफिक जाम की स्थिति से भी छुटकारा मिल सकेगा। कतकी मेला स्थल बदले जाने के इस प्रस्ताव पर क्षेत्रीय लोगों ने आपत्ति जताई थी। आपत्ति और आयोजन से गोमती नदी में प्रदूषण बढ़ने की आशंका चलते तत्कालिक एडीएम ट्रांस गोमती ने झूलेलाल पार्क मेला लगाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।
बीते साल भी मेला स्थल बदलने की कवायद हुई थी। मनकामेश्वर कतकी मेला समिति ने मेला लगाने के लिए झूलेलाल घाट को हर तरीके से उपयुक्त बताया था। समिति की सदस्यों का कहना था कि मनकामेश्वर उपवन घाट पर कतकी मेला लगने से दुकानदारों को खुला स्थान मिलेगा।
वहीं डालीगंज जैसे व्यस्त रूट पर ट्रैफिक जाम की स्थिति से भी छुटकारा मिल सकेगा। कतकी मेला स्थल बदले जाने के इस प्रस्ताव पर क्षेत्रीय लोगों ने आपत्ति जताई थी। आपत्ति और आयोजन से गोमती नदी में प्रदूषण बढ़ने की आशंका चलते तत्कालिक एडीएम ट्रांस गोमती ने झूलेलाल पार्क मेला लगाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।