‘सर प्लीज पास कर दीजिए, यहां नकल नहीं मिल पा रही है’
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‘सर प्लीज पास कर दीजिए’ नर्सिंग कालेज में पढ़ाई नहीं हुई है और यूनिवर्सिटी कैंपस में एग्जाम होगा यह पता नहीं था। नर्सिंग में एडमिशन नकल के भरोसे लिया था, अब यहां नकल ही नहीं मिल रही है।
अगर पास नहीं हुए तो भविष्य खराब हो जाएगा। फीस भी बेकार चली जाएगी।’ कुछ इसी तरह का ब्योरा नर्सिंग स्टूडेंटों की कॉपी में देखकर परीक्षक के साथ छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी प्रशासन भी हैरान है।
विवि प्रशासन का कहना है कि नकल के दम पर नर्सिंग की पढ़ाई चिंतित करने वाली है। यह मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ है। क्योंकि किसी भी मरीज के इलाज में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
स्टूडेंट्स छोड रहे हैं कोरी कॉपियां
यूनिवर्सिटी से संबद्ध सात नर्सिंग कॉलेजों के एग्जाम इस बार यूनिवर्सिटी में हो रहे हैं। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने इन कॉलेजों में सामूहिक नकल की शिकायत के बाद यह फैसला लिया था।
इसका कई स्टूडेंटों ने विरोध भी किया था। परीक्षा तीन तारीख को यूनिवर्सिटी कैंपस के होटल मैनेजमेंट हाल में शुरू हुई। केंद्राध्यक्ष बायोटेक डिपार्टमेंट के देव बक्श सिंह ने बताया कि रोजाना 20 से 26 स्टूडेंट एग्जाम छोड़ रहे हैं, जो स्टूडेंट परीक्षा दे रहे हैं, वे कॉपी नहीं भर पाते हैं।
ज्यादातर स्टूडेंटों की कॉपी कोरी रहती हैं, कई कॉपियां तो ऐसी हैं जिनमें स्टूडेंटों ने कालेजों को कोसते हुए पास करने की सिफारिश तक लिखी है। तमाम स्टूडेंट क्वेश्चन पेपर का मैटर कॉपी में लिखकर चले जाते हैं। इसकी जानकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन को दी जा चुकी है।