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तबादला: कानपुर के कमिश्नर डॉ. लोकेश एम. नोएडा के सीईओ बनाए गए, रितु माहेश्वरी आगरा भेजी गईं
Thu, 20 Jul 2023 12:12 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 20 Jul 2023 12:12 AM IST
सार
शासन ने 19 जूलाई को कुछ महत्वपूर्ण तबादले किए। इन तबादलों में कानपुर के कमिश्नर डॉ. लोकेश एम. नोएडा के सीईओ बनाए गए हैं।
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कानपुर के कमिश्नर लोकेश एम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शासन ने 19 जुलाई को कुछ महत्वपूर्ण तबादले किए। प्रदेश सरकार ने बुधवार को तीन आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव कर दिया है। कानपुर के कमिश्नर डॉ. लोकेश एम. को नोएडा का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है। आगरा के कमिश्नर अमित गुप्ता को कानपुर का कमिश्नर और नोएडा की सीईओ ऋतु माहेश्वरी को आगरा का कमिश्नर बनाया गया है।
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प्राधिकरणों में नियम विरुद्ध तबादलों पर खलबली, गुपचुप चली कैंची
औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में कुछ अधिकारियों की दुबारा तैनाती को लेकर उठे सवालों का असर अब दिखने लगा है। नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु माहेश्वरी के तबादले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने तबादलों में हुई गड़बड़ी को गंभीरता से लिया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि सरकार के निशाने पर अभी कुछ ऐसे अधिकारी हैं, जिनको अथॉरिटी से हटाया जा सकता है।
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दरअसल हाल में ही नोएडा अथॉरिटी में कई ऐसे अधिकारियों की दुबारा तैनाती की गई है, जो विभिन्न जांचों में घिरे हुए हैं। तबादला नीति का खुला उल्लंघन कर किए गए तबादलों पर एक तरफ कोई भी बोलने से बच रहा है तो दूसरी तरफ सभी को नई जिम्मेदारी के साथ प्राधिकरणों के लिए रिलीव भी कर दिया गया। हालांकि नीति विरुद्ध तबादलों का खुलासा होने के बाद कुछ अधिकारियों के अधिकारों पर गुपचुप कैंची भी चला दी गई है।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक जांच या कार्यवाही से बचने के लिए फिलहाल ये कदम उठाया गया है। साथ ही ऐसे अधिकारियों को आश्वस्त किया गया हैै कि हालात सामान्य होने पर ''मलाई वाले अधिकार'' वापस मिल जाएंगे। सबसे ज्यादा खलबली नोएडा, ग्रेटर नोएडा और कानपुर में मची है। घोटाले में फंसी एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के एक साल के अंदर दोबारा उसी जगह ट्रांसफर पर सवाल खड़े हुए तो ट्विन टावर मामले में फंसे एक अधिकारी को भी सालभर के अंदर वापस बुला लेने के फैसले को गंभीरता से लिया गया है।
इसके अतिरिक्त कानपुर सहित प्रदेश के अन्य प्राधिकरणों में विभिन्न मामलों में आरोपियों को बड़ी जिम्मेदारी देने का नकारात्मक असर भी बड़े अधिकारियों पर पड़ा है। आरोपों में फंसे चार अधिकारियों ने तो दावा कर दिया कि जांच का मतलब ये नहीं कि उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि उन्हें फंसाने की साजिश के तहत जांच चल रही है और क्लीन चिट मिल चुकी है। क्लीन चिट के दस्तावेज मांगने पर सभी मुकर गए।
मालूम हो कि मंगलवार को मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेश सम्मेलन में हुए समझौतों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। प्रदेश को देश का औद्योगिक केन्द्र बनाने के लिए उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए अलग नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। औद्योगिक विकास की राह में किसी भी अड़चन को रोकने के लिए उन्होंने जीरो टालरेंस नीति अपनाई है।