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दोनों हाथ और पैर की पांचों उंगलियां गंवाने के बाद लिख डाली किताबें

Tue, 29 Dec 2015 02:04 PM IST
Updated Tue, 29 Dec 2015 02:04 PM IST
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kamini srivastav wrote books with foot

चार साल की उम्र में एक रेल दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और बाएं पैर की पांचों उंगलियां गंवाने के बावजूद साहित्य सृजन में निशक्तता को कभी आड़े नहीं आने दिया।

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जोश और जज्बे की मिसाल कायम करते हुए काकोरी में बाल विकास परियोजना अधिकारी कामिनी श्रीवास्तव ने अपनी दूसरी किताब और कहानी संग्रह ‘डोर’ पैरों से लिखकर पूरी की। इसका विमोचन सोमवार को हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शंभूनाथ ने किया।
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प्रेसक्लब में आयोजित विमोचन समारोह में मौजूद कामिनी श्रीवास्तव ने बताया कि अपनी नौकरी के साथ ही इन कहानियों को उन्होंने लिखा। पैरों की मदद से लेखन करने वाली कामिनी इससे पहले एक काव्य संग्रह ‘खिलते फूल, महकता आंगन’भी लिख चुकी हैं।
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कामिनी दूसरे लोगों के लिए बनी उदाहरण

kamini srivastav wrote books with foot

इसका विमोचन राज्यपाल राम नाईक ने किया था। अब की बार उन्होंने अपनी 11 कहानियों के संग्रह को प्रकाशित कराया है। कामिनी ने बताया कि उनकी तीसरी किताब पूर्व प्रधानमंत्री और सशक्त महिला की छवि वाली इंदिरागांधी पर होगी। यह एक काव्य रचना है, जिसमें इंदिरागांधी के जीवन के सशक्त पहलुओं को उभारा गया है। इससे महिलाओं को अपने जीवन में प्रेरणा मिल सकेगी।

डॉ. शंभूनाथ ने कामिनी श्रीवास्तव की जिजीविषा को दूसरे लोगों के लिए भी उदाहरण बताया। उनका कहना था कि समाज में घट रही घटनाओं को काफी संवेदना के साथ उन्होंने कहानी का रूप दिया है। कामिनी ने बताया कि डोर असल में एक कहानी का टाइटल है, जिसमें कम उम्र में शादी की समस्याओं को दिखाया गया है। बाकी कहानियों में एसिड अटैक, एकल परिवार की मुश्किलें, स्त्री विमर्श को पिरोया गया है।

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