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कल्याण हो सकते हैं 2017 में यूपी में भाजपा का चेहरा

Mon, 04 Jan 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 04 Jan 2016 12:43 AM IST
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Kalyan Singh may be the UP BJP face in 2017.

यूपी में 2017 के चुनावी समर में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह भी भाजपा का चेहरा हो सकते हैं। रविवार को कल्याण से बातचीत के दौरान साफ तौर पर इस बात के संकेत मिले। कई सवालों के बाद उन्होंने कहा, ‘पार्टी च्वाइस, माई च्वाइस’।

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सिंह ने कहा कि हमेशा पार्टी ने ही उनकी भूमिका तय की है। भविष्य में पार्टी का फैसला ही उनके लिए सर्वोपरि होगा। कहा कि फिलहाल वह राजस्थान के राज्यपाल हैं और उस भूमिका में संतुष्ट है। वह रविवार को यहां पत्रकारों के इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।
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उन्होंने कहा कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है कि यूपी में भाजपा के पास चेहरों का संकट है। यूपी में भाजपा के पास एक से बढ़कर एक चेहरा है। नाम बताने पर वह टाल गए। मुस्कराते हुए कहा कि एक का नाम लेंगे तो दूसरा नाराज हो जाएगा। दूसरे का नाम लेंगे तो बाकी नाराज हो जाएंगे। पर, यह बात सही नहीं है कि भाजपा के पास यूपी में कोई चेहरा नहीं है।
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चर्चाओं को इन वजहों से बल

कल्याण की वापसी की चर्चाओं को यूं ही कहकर नहीं टाला जा सकता। इसकी वजह भी है। पार्टी के पास इस समय कल्याण सिंह का कोई ऐसा विकल्प नहीं है जो एक साथ पार्टी की कई जरूरतों को पूरी करता हो।

इसलिए लगाए जा रहे हैं कयास

Kalyan Singh may be the UP BJP face in 2017.

यूपी के दो बार मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह भले ही संविधानिक पद पर होने के चलते सक्रिय राजनीति से दूर हों, पर पिछड़े वर्ग का होने के साथ ही वे प्रखर हिंदुत्ववादी चेहरा माने जाते हैं।

वे भाजपा के उन चंद नेताओं में हैं, जिनकी सूबे में व्यक्तिगत जान-पहचान है और इसकी अच्छी-खासी तादाद है। नौकरशाही में उनकी प्रशासनिक क्षमता की चर्चा आज भी जब-तब सुनाई देती है।

उनकी सरकार में होने वाली भर्तियों की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन को भी लोग अभी तक नहीं भूले हैं। प्रदेश में 2017 के चुनावी समर में ये सब मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे, इस बात के संकेत साफ तौर पर अभी से दिखाई देने लगे हैं।

अखिलेश व मायावती को दे सकते हैं टक्कर

Kalyan Singh may be the UP BJP face in 2017.

यही नहीं, भाजपा का मुकाबला सपा और बसपा से होने की संभावना है। दोनों दलों का नेतृत्व पिछड़े और दलित चेहरों के पास है। उस नाते भी भाजपा को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जो मुलायम और मायावती की जातीय गोलबंदी का जवाब बन सके।

इस कसौटी पर भी कल्याण ही खरे उतरते हैं। वे भले ही दलित वर्ग से न आते हों, लेकिन उनकी सरकार द्वारा दलितों की भलाई के लिए शुरू की गई योजनाएं इन वर्गों के बीच भाजपा की पकड़ व पैठ मजबूत बना सकती हैं।

इन्कार में इकरार की झलक
वैसे तो कल्याण कहते हैं कि राजस्थान के राज्यपाल के रूप में वे पूरी संतुष्टि से काम कर रहे हैं। पर, वे जिस तरह यह भी कहते हैं कि उनकी इच्छा तो राज्यपाल बनने की भी नहीं थी, लेकिन पार्टी ने फैसला कर दिया तो उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया। इसलिए उनकी इच्छा की बात ही नहीं है।

यूं ही नहीं हैं यूपी की राजनीति में वापसी की चर्चा

Kalyan Singh may be the UP BJP face in 2017.

भले ही कल्याण साफ तौर पर कुछ न बोल रहे हों, लेकिन उनकी बातों ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि यूपी की सक्रिय राजनीति में उनकी वापसी की चर्चाएं यूं ही नहीं हैं।

बंसल व कल्याण की गुफ्तगू से भी बल
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की रविवार को कल्याण सिंह से मुलाकात से भी कल्याण की सक्रिय राजनीति में वापसी की चर्चाओं को और बल मिलता है।

बंसल व कल्याण के बीच लगभग पौन घंटा एकांत में बातचीत हुई। बाद में भाजपा के प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने भी बंसल की मौजूदगी में कल्याण से मुलाकात की। इससे भी माना जा रहा है कि कहीं न कहीं कल्याण को लेकर पार्टी के भीतर कुछ न कुछ चल रहा है।

चर्चा यह भी है कि मुलाकात के दौरान प्रदेश अध्यक्ष के संभावित नामों पर भी कल्याण के साथ इन लोगों की बातचीत हुई है। बंसल और पांडेय के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने भी कल्याण से मुलाकात की।

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