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केंद्रीय मंत्री बोले- दिया बजट ही नहीं खर्च कर पाता है यूपी

Sun, 15 Nov 2015 10:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 15 Nov 2015 10:58 PM IST
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Kalraj Mishra speaks about policy execution in UP.

खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी के मंच पर रविवार को उस वक्त खूब जबानी घमासान हुआ, जब उद्घाटन के लिए वहां केंद्र के लघु उद्यम मंत्री कलराज मिश्र और राज्य के खादी ग्रामोद्योग मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पहुंचे।

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न सिर्फ दोनों मंत्रियों ने एक-दूसरे की सरकारों के विकास कार्यों में अपेक्षित ध्यान न देने की बात कही, बल्कि दोनों सरकारों के बड़े अफसर भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। यहां तक कि कलराज मिश्र के भाषण के दौरान राज्य के प्रमुख सचिव खादी ग्रामोद्योग मुकुल सिंघल ने कुछ कहना चाहा तो केंद्रीय मंत्री ने उन्हें रोक दिया।
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आबादी के अनुपात में नहीं मिल रहा यूपी को पैसा
मुकुल सिंघल राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज के ग्राउंड में रविवार को दस दिवसीय आंचलिक खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी शुरू हुई। उद्घाटन समारोह में मुकुल सिंघल ने कहा-प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में यूपी का लक्ष्य उसकी आबादी के अनुपात से काफी कम है, जबकि संचालन की स्थिति दूसरे राज्यों के मुकाबले काफी बेहतर है।
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उन्होंने केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि चाहें तो वे इसकी जांच कराकर देख लें। मई-2015 में इस योजना में खादी बोर्ड को सब्सिडी देने के लिए 42 करोड़ रुपये का बजट दिया गया, जो बाद में घटाकर 35 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बजट को बढ़ाकर 70-90 करोड़ रुपये किए जाने की जरूरत है।

केंद्र पर ये आरोप भी लगाए

Kalraj Mishra speaks about policy execution in UP.

उन्होंने कहा कि केंद्र के पूनी संयंत्र ठीक से नहीं चल रहे हैं। ऐसी व्यवस्था की जाए कि खादी संस्थान पूनी संयंत्रों से ही पूनी खरीदें। उन्होंने स्कीम ऑफ फंड फॉर रिजेनरेशन ऑफ ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज (स्फूर्ति) को अच्छा बताते हुए इसमें राज्य की पर्याप्त सहभागिता न होने की बात कही। कहा इससे राज्य सरकार के अधिकारियों और संस्थाओं का मनोबल गिरता है।

राज्य सरकार ऑनलाइन मार्केटिंग के प्रयास कर रही है, केवीआईसी के माध्यम से भी प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन की व्यवस्था हो। वैल्यू एडिशन करने पर खादी संस्थानों को कीमत निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन केवीआईसी के ऑडिट नियमों में बदलाव न होने के कारण इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

छह महीने में खादी का उत्पादन 19 फीसदी बढ़ा : झा
सिंघल के बाद खादी ग्रामोद्योग आयोग के सीईओ एके झा को बात रखने के लिए बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि छह महीने में खादी का उत्पादन 19 फीसदी बढ़ा है। पिछले 60 बरसों में इतनी प्रगति नहीं हुई। बिक्री में भी 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ड्रेस मैटेरियल में रेडीमेड गारमेंट्स का 70 प्रतिशत तक हिस्सा करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ महीने पहले मुकुल सिंघल ने पूनी संयंत्र के बारे में दिल्ली में उनसे मिलकर सुझाव दिए थे। यह आदेश जारी कर दिया गया है कि खादी संस्थान पूनी संयंत्रों से ही पूनी खरीदेंगे। बाहर से तभी खरीदेंगे जब तय समय के भीतर आपूर्ति नहीं मिलेगी। इसी का नतीजा है कि पूनी संयंत्रों की बिक्री 3-4 गुना बढ़ चुकी है।

केंद्र सरकार के बजट न देने से प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित

Kalraj Mishra speaks about policy execution in UP.

राज्य के खादी ग्रामोद्योग मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी ने भी पीएमईजीपी में आबादी के अनुपात में बजट के प्रावधान की बात दोहराई। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सीएम अखिलेश यादव ने रिबेट की राशि अदा करने की घोषणा की थी।

इसके तहत 108.99 करोड़ रुपये का बजट रिलीज किया जा चुका है। इस वित्तीय वर्ष में भी इस मद में 54 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। लेकिन मई में पीएमईजीपी का लक्ष्य कम होने से बैंक में जो 3315 आवेदन गए हैं, उन पर विचार नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि कताई करने वाले 70-80 रुपये रोज ही कमा पाते हैं। उन्हें मनरेगा मजदूरों के बराबर भी मजदूरी नहीं मिल पा रही है। यूपी में भारत सरकार के 10 प्रशिक्षण केंद्र हैं, लेकिन अग्रिम बजट न मिलने से प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।

वहीं, इस बार राज्य सरकार 4 की जगह 9 प्रदर्शनियां लगवा रही है । उन्होंने लखनऊ, बरेली, मेरठ के अलावा देवरिया या कुशीनगर में निफ्ट सेंटर खोलने की जरूरत भी बताई।

कलराज मिश्र ने यूपी के लिए किए काम का दिया हिसाब

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केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि मुकुल सिंघल कह रहे हैं कि कम पैसा मिला। पिछले वित्त वर्ष में पीएमईजीपी के तहत यूपी को 171 करोड़ रुपये दिए थे। नवंबर 2014 में तत्कालीन लघु उद्योग मंत्री भगवत सरन गंगवार की मौजूदगी में समीक्षा की तो पता चला तब तक महज 50 करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। इस साल 143 करोड़ रुपये का टार्गेट है। 6667 इकाइयां स्थापित होंगी और 54 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।

उन्होंने कह, डीएम को कहिए प्रोजेक्ट जल्दी सैंक्शन करवाएं, बैंक को समय से लोन देने के लिए कहें। प्रभावी योजनाएं बनाइए, पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। मशीनें खरीदने के लिए भी पैसे दे रहे हैं। ट्रेनिंग भी दिलवा रहे हैं। ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पूर्वांचल पर ज्यादा ध्यान देने का सुझाव दे रहे हैं। देवरिया में एक ट्रेनिंग सेंटर खोला गया है। वहां से ट्रेनिंग लेकर 20 लड़कों ने मशीनें भी खरीद ली हैं। अब बैंक यह शिकायत नहीं कर पाएंगे कि प्रोजेक्ट जमा करने वाले युवा ट्रेंड नहीं हैं।

लोन देने में बैंकों की हीलाहवाली के खिलाफ जागरूकता लाने की जरूरत है। रायबरेली और मैनपुरी में पूनी के केंद्र हैं। प्रयास है कि पूनी कम न पड़े। बंद पड़ी संस्थाओं को भी चालू करवाएंगे। स्फूर्ति योजना को लेकर कहा जा रहा है कि राज्य सरकार से राय नहीं ली जा रही है। लेकिन यह सच नहीं है।

राज्य सरकार की स्वीकृति के बिना क्लस्टर पास ही नहीं हो सकता। इस पर प्रमुख सचिव मुकुल सिंघल ने कुछ कहना चाहा तो कलराज मिश्र ने उन्हें रोक दिया। कहा कि यूपी के हर जिले में 1-2 क्लस्टर बनाने की योजना है। प्रस्ताव तो भेजिए। साथ ही सुझाव दिया कि खादी आयोग और खादी बोर्ड मिलकर प्रदर्शनियां लगाएं, तो स्थितियां काफी बदल सकती हैं।

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