तीन तलाक खत्म करने से बेहतर है लड़की को भी तलाक का हक दिया जाए: कल्बे सादिक
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि तीन तलाक सुन्नी समुदाय का मसला है शिया पहले से ही इसके मुखालिफ हैं। शरीयत में तीन तलाक के मामले को और गहराई से समझने की जरूरत है। इस्लाम में निकाह करना आसान है, तलाक देना बहुत मुश्किल है।
मगर मुसलमानों में अशिक्षा और जागरूकता की कमी की वजह से सारी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। मुसलमानों के तमाम मसलों पर बातचीत में मौलाना सादिक ने बेबाक राय रखी। पेश है प्रमुख अंश...
सवाल: तलाक के मामले में केंद्र के हलफनामे पर क्या कहेंगे?
जवाब: शरीयत के मामले में सरकार की दखलअंदाजी ठीक नहीं है। हर मुसीबत की जड़ अशिक्षा और जागरुकता की कमी है। इस्लाम अपने में मुकम्मल व पुख्ता मजहब है। इसमें किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं, हां समझने और अक्ल का इस्तेमाल करने की जरूरत है। साथ ही शरीयत का मामला धार्मिक नेता जानेगा या राजनेता? राजनेताओं को देश की चिंता होनी चाहिए और धार्मिक नेताओं की मजहबी चिंता के लिए छोड़ देना चाहिए। जब तक किसी धर्म की समझ नहीं होगी, आप कोई फैसला कैसे कर सकते हैं?
'मुस्लिम महिलाएं आलिमों से बात करें'
सवाल: तीन तलाक खत्म हो जाए तो क्या हर्ज है, इससे तो औरतों की हालत सुधरेगी ही?
जवाब: तीन तलाक खत्म करने से बेहतर है कि लड़की को भी तलाक देने का हक दिया जाए। साथ ही, मर्द को निकाह के वक्त ही तलाक से होने वाली मुसीबतों का एहसास कराया जाए। इससे हालात सुधरेंगे।
सवाल: ट्रिपल तलाक के खिलाफ मुस्लिम ख्वातीनों के बीच से विरोध के स्वर उभर रहे हैं?
जवाब: मुस्लिम महिलाओं का सड़क पर उतरना ठीक नहीं है। उन्हें शरीयत के मुताबिक आलिमों से बात करनी चाहिए, सड़क पर प्रोटेस्ट करने और उलमा व मौलवी को बुरा-भला कहने से हल नहीं निकलने वाला। शरीयत में महिलाओं को बराबरी का हक दिया गया है वे अपने हक की बात करें।
सवाल: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरीयत की दुहाई देता है, आप कितने सहमत हैं?
जवाब: शरीयत को समझना ही इस्लाम का मकसद है। शरीयत को समझ लेंगे तो समझा भी सकेंगे। बिना समझे शरीयत की दुहाई से कोई फायदा नहीं है। अगले को पता ही नहीं है कि सही इस्लाम और शरीयत क्या है, तो वह गफलत में जो दिखता है उसी को सही मानेगा।
'पश्चिमी देशों की सोच को हिंदुस्तान का मजहब नहीं मानेगा'
सवाल: ट्रिपल तलाक तमाम मुस्लिम देशों में पाबंदी है तो इंडिया में क्यों नहीं ?
जवाब: ट्रिपल तलाक पर कई मुस्लिम देशों में पाबंदी है। लेकिन बहुत से देशों में यह बरकरार है । जिन देशों इस पर रोक लगाई है उनके उलमा को बुलाकर समझना चाहिए कि उनका फॉर्मूला क्या है और उसका फायदा उठाना चाहिए।
सवाल:क्या तलाक के मामले को कॉमन सिविल कोड से जोड़ना मुनासिब है?
जवाब: देखिए, तीन तलाक का मामला अलग है और कॉमन सिविल कोड अलग है। यहां यह लागू नहीं हो सकता। कॉमन सिविल कोड पश्चिमी अवधारणा है। उसके खुलेपन को हिंदुस्तान का कोई मजहब स्वीकार नहीं करेगा। यहां की सोसाइटी, खासकर इस्लामिक, में तमाम मुद्दों पर पर्दादारी है।
सवाल: पर्सनल लॉ बोर्ड मुस्लिम महिलाओं की तालीम, सेहत व अन्य मुददों को क्यों नहीं उठाता? तीन तलाक पर ही क्यों टिका है?
जवाब: पर्सनल लॉ बोर्ड ने महिलाओं को बहुत आगे किया है और कर रहा है। उनकी शिक्षा के साथ सेहत और शादी-विवाह को लेकर काफी काम कर रहा है। इस्लाम में महिलाओं को बराबरी का हक दिया गया है जिसके तहत पर्सनल लॉ बोर्ड काम कर रहा है। उन्हें बोर्ड में शामिल कर मंच से बोलने व अपनी बात रखने का मौका देता है।