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Lucknow News: गाजे-बाजे के साथ निकाली कलश यात्रा
Sun, 01 Dec 2024 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 01 Dec 2024 12:18 AM IST
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अमेठी के परशुरामपुर में निकली कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु।
अमेठी सिटी। ब्लॉक अमेठी के परशुरामपुर में श्रीमद्भागवत कथा को लेकर शनिवार को सुबह प्रवाचक भागवत भूषण आचार्य संतोष महराज की मौजूदगी में भव्य कलश यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई, जो कथा स्थल से प्रारंभ होकर गांव स्थित शिव मंदिर, सराय कांधा के माता दुर्गा मंदिर, बाबा धाम, हनुमान मंदिर, माता काली मंदिर, पिपलेश्वर महराज धाम होते हुए कथा स्थल पर आकर समाप्त हुई। इस दौरान कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
इसके बाद दोपहर में भागवत कथा शुरू हुई। प्रवाचक संतोष महराज ने बताया कि कई जन्मों के पुण्य जब एकत्रित होते हैं, तब भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने अधम पापी धुंधकारी और गोकर्ण कथा का वर्णन करते हुए कहा कि कालांतर में जब गोकर्ण अपने गांव पहुंचे तो वहां प्रेत बने धुंधकारी की मुक्ति को लेकर उपाय सोच रहे थे, तभी धुंधकारी ने कहा कि श्राद्ध तर्पण 100 बार करने के बाद भी मुक्ति नहीं होगी। दूसरे कोई उपाय से ही मुक्ति संभव है।
गोकर्ण ने भगवान सूर्य का रथ रोक कर उपाय पूछा तो भगवान भास्कर ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मुक्ति का मार्ग बताया। गोकर्ण यज्ञ मंडप में आह्वान कर बांस के क्षेत्र में धुंधकारी को स्थापित किया। धुंधकारी ने सात दिन की श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और दिव्य विमान आया जो मुक्त हुए धुंधकारी को परमधाम ले गया।
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कलश यात्रा में देव प्रकाश पांडेय, शिवमूर्ति पांडेय, करुणा शंकर पांडेय, राम प्रकाश मिश्र, उमाशंकर गुप्त, नीरज सिंह, पंडित मेवा लाल, राकेश मिश्र, अनिल मिश्रा, मोहन पांडेय, रविंद्र तिवारी, संदीप पांडेय, रामशंकर पांडेय, विंदेश्वरी दुबे, अजय तिवारी, शिव प्रसाद पांडेय, राकेश पांडेय, श्यामशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
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इसके बाद दोपहर में भागवत कथा शुरू हुई। प्रवाचक संतोष महराज ने बताया कि कई जन्मों के पुण्य जब एकत्रित होते हैं, तब भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने अधम पापी धुंधकारी और गोकर्ण कथा का वर्णन करते हुए कहा कि कालांतर में जब गोकर्ण अपने गांव पहुंचे तो वहां प्रेत बने धुंधकारी की मुक्ति को लेकर उपाय सोच रहे थे, तभी धुंधकारी ने कहा कि श्राद्ध तर्पण 100 बार करने के बाद भी मुक्ति नहीं होगी। दूसरे कोई उपाय से ही मुक्ति संभव है।
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गोकर्ण ने भगवान सूर्य का रथ रोक कर उपाय पूछा तो भगवान भास्कर ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मुक्ति का मार्ग बताया। गोकर्ण यज्ञ मंडप में आह्वान कर बांस के क्षेत्र में धुंधकारी को स्थापित किया। धुंधकारी ने सात दिन की श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और दिव्य विमान आया जो मुक्त हुए धुंधकारी को परमधाम ले गया।
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कलश यात्रा में देव प्रकाश पांडेय, शिवमूर्ति पांडेय, करुणा शंकर पांडेय, राम प्रकाश मिश्र, उमाशंकर गुप्त, नीरज सिंह, पंडित मेवा लाल, राकेश मिश्र, अनिल मिश्रा, मोहन पांडेय, रविंद्र तिवारी, संदीप पांडेय, रामशंकर पांडेय, विंदेश्वरी दुबे, अजय तिवारी, शिव प्रसाद पांडेय, राकेश पांडेय, श्यामशंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।