यूपी सरकार ने पहली बार नियुक्त किया आर्थिक सलाहकार, विकास के इस रोडमैप पर करेंगे काम
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यूपी सरकार को पहली बार किसी आर्थिक सलाहकार की जरूरत महसूस हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ख्यातिप्राप्त अर्थशास्त्री और योजना आयोग, गुजरात व कर्नाटक सहित कई राज्यों व राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर चुके कर्नाटक मूल के केवी राजू को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। साढ़े तीन साल से वह इक्रीसेट हैदराबाद में प्रधान वैज्ञानिक हैं और पॉलिसी एंड इम्पैक्ट ग्रुप (एशियाई विभाग) का नेतृत्व कर रहे हैं। वह कर्नाटक सरकार के भी आर्थिक सलाहकार रहे हैं।
उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास के रोडमैप पर काम शुरू कर दिया है। ‘अमर उजाला’ के महेंद्र तिवारी ने राजू से बात कर उनके विजन के बारे में चर्चा की। उनका कहना है कि यूपी में जल, जंगल, जमीन के साथ कुशल मानव संपदा की थाती है। इनके बेहतर समन्वय से राज्य को प्रगति के रास्ते पर बढ़ाया जा सकता है। वह इसी को ध्यान में रखकर काम शुरू कर रहे हैं। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश :
सवाल : यूपी के बारे में क्या नजरिया है?
जवाब : मैंने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिसा और कर्नाटक सहित कई राज्यों के साथ काम किया है। हमेशा से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में काम करने की ख्वाहिश थी। यह देश का सबसे भाग्यशाली राज्य है। यहां जल-जमीन-जंगल व मानव संसाधन, सब बहुत अच्छे हैं। इन सभी के बेहतर उपयोग से यूपी को आगे ले जाया जा सकता है। इसका फायदा पूरे देश को मिलेगा। हम सभी चीजों को मिलाकर बेहतर करने का नजरिया रखते हैं।
सवाल : यूपी की पहचान अब भी एक पिछड़े राज्य के रूप में है? क्या इससे उबारने के लिए किसी रोडमैप पर काम शुरू हुआ?
जवाब : मैं अभी यूपी को जानने की कोशिश कर रहा हूं। प्रदेश में नेचुरल रिसोर्स (जल-जंगल-जमीन) कहां हैं, किस तरह से हैं, एग्रो क्लाइमेटिक रीजन कितने हैं और कहां किस तरह का उनका असर है? प्रदेश में संसाधनों का वितरण किस तरह हुआ है? इन सबका अध्ययन कर रहा हूं। इससे चुनौतियों की जानकारी हो सकेगी। इसके बाद रोडमैप पर काम होगा।
सवाल: आपके अध्ययन में आम लोगों की भी भूमिका है या ऑफिस और आंकड़ों पर ही केंद्रित होकर काम होंगे?
जवाब : समस्याओं को जानने की केंद्रीय भूमिका में आम लोग ही होंगे। बजट सत्र के बाद भ्रमण शुरू करूंगा। किसानों, आम लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं जानूंगा। अपेक्षाएं पता करेंगे। उनसे समाधान भी पूछेंगे। जो निचोड़ आएगा उस पर शासन और सरकार स्तर पर विचार-विमर्श कर रोडमैप तैयार होगा।
'बुंदेलखंड के लिए किए जा रहे हैं विशेष प्रयत्न'
जवाब : पूर्वांचल व बुंदेलखंड की चुनौतियां संज्ञान में हैं। बुंदेलखंड के लिए विशेष प्रयत्न किए जा रहे हैं। वहां जल-जमीन-जंगल की उपलब्धता, जानवरों की समस्या, फसल उत्पादकता में कमी जैसी बातों को ध्यान में रखकर दो स्तर पर काम होगा। पहला, बुंदेलखंड प्रदेश स्तर पर (समग्रता के साथ) और दूसरा जलानयन (वाटरशेड) प्रदेश के रूप में। इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनेगी जो वहां की परिस्थिति के हिसाब से लाभप्रद होगी। किसानों की आय दोगुनी करने की कार्ययोजना बुंदेलखंड में खास ढंग से लागू होगी। पूर्वांचल की चुनौतियों पर भी अलग से रणनीति बनेगी।
सवाल : रोडमैप का फोकस क्या होगा?
जवाब : नई सरकार है। नए दृष्टिकोण हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव बहुत अच्छे हैं। अधिकारियों की बहुत अच्छी टीम है। लोग गवर्नेंस में बदलाव महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में मानव संसाधन का भंडार है। आईआईटी, आईआईएम, यूनिवर्सिटी, तकनीकी व कृषि विश्वविद्यालय और आईटीआई जैसे क्वालिटी इंस्टीट्यूट उपलब्ध हैं। इन सभी के अनुभवों का लाभ उठाते हुए रोडमैप बनेगा। लोगों का सामर्थ्य कैसे बढ़े, इस पर मुख्य फोकस होगा। केंद्रीय योजनाओं व राज्य के संसाधनों का कैसे बेहतर उपयोग हो, इसे भी देखेंगे।
सवाल : प्रदेश में नीति आयोग का पुनर्गठन अटका है। इसमें क्या भूमिका रहेगी?
जवाब : इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है।
सवाल : केंद्र सरकार का बजट आ गया है और प्रदेश सरकार भी अपना बजट लाने जा रही है। आपका इस बारे में क्या नजरिया है?
जवाब : केंद्र सरकार का 2018-19 का बजट अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है। केंद्र ने ग्रामीणों, गरीबों और किसानों के आर्थिक व सामाजिक विकास पर खास ध्यान दिया है। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह यूपी को प्रमुख राज्य के रूप में लेता है और केंद्र का उसे पूरा सहयोग मिलेगा। इससे यूपी को काफी मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार का बजट भी बहुत अच्छा होगा।
इन संस्थाओं से जुड़े रहे हैं राजू
- इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद, गुजरात
- योजना आयोग नई दिल्ली
- इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, कोलंबो
- इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनामिक चेंज, बंगलुरू
- विजिटिंग रिसर्च फेलो इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन डीसी
- एशियाई विभाग पॉलिसी एंड इम्पैक्ट ग्रुप के टीम लीडर
- 2008-13 तक कर्नाटक में मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार
- साढ़े तीन वर्ष से हैदराबाद के इक्रीसेट में बतौर प्रधान वैज्ञानिक हैं
- 17 किताबें लिखी, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 110 पेपर प्रकाशित हुए हैं
- नेपाल, बांग्लादेश, कंबोडिया और मॉरीशस में भी काम किया।