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संभल जाएं वर्ना सबके लिए जहर बन सकता है ये खाना

Tue, 21 Jul 2015 01:24 PM IST
दीप्ति ओझा/ अमर उजाला,लखनऊ
दीप्ति ओझा/ अमर उजाला,लखनऊ Updated Tue, 21 Jul 2015 01:24 PM IST
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junk food increasing depression symptoms in kids

आज की भागमभाग वाली जिंदगी में मां भी बच्चों की सेहत के प्रति लापरवाह हो चली हैं। उनके टिफिन में फटाफट बनने वाले स्नैक्स या रेडीमेड आइटम रखने लगीं हैं।

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ऐसे खाने से लाडला न सिर्फ डिप्रेशन में जा रहा है बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास को भी प्रभावित कर रहा है। जंकफूड से शरीर में प्रोटीन, विटामिन्स की कमी हो जाती है, खासकर बच्चों में विटामिन बी-12 की मात्रा कम हो जाती है। बच्चे एनीमिया की चपेट में आ रहे हैं। जंक फूड बच्चे ही नहीं, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है।
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गाइनोकॉलोजिस्ट डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. अमिता पाण्डेय कहती हैं कि आजकल की यंग गर्ल्स में से 20 फीसदी पीसीओएस (पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) से परेशान हैं।
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कारण है जंक फूड के प्रति दीवानगी, कम एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल का अनियमित हो जाना। जंकफूड से मेटॉबालिक डिसऑडर्स हो रहे हैं। स्वास्थ्य की दिक्कतें भी बढ़ रही हैं।

गर्भवती महिलाओं में डायबटीज और मोटापा सामने आ रहा है। उनमें एक उम्र के बाद कैंसर ऑफ एंडोमेट्रियम (अंर्तगर्भाशय का कैंसर) कॉमन होता जा रहा है।

केजीएमयू में क्लीनिकल ह्यूमेटोलॉजी के हेड डॉ. एके त्रिपाठी कहते हैं, दो-चार महीने में एकाध बार जंकफूड तो ठीक है पर इसके लगातार सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती चली जाती है। जंकफूड जब भी खाएं, साथ में खूब सारा सलाद और हरी सब्जियां जरूर खाएं।

बच्चे हैं आसान शिकार

junk food increasing depression symptoms in kids

अस्मिता स्लो लर्नर्स अकादमी की कंसल्टिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. अल्पना रस्तोगी कहती हैं, बच्चों में डिप्रेशन, एकाग्रता में कमी, एंग्जाइटी डिस्ऑर्डर की समस्या बढ़ती जा रही है।

जंक फूड सीधे हमारे प्रतिरोधक क्षमता पर अटैक करता है। बच्चे इसके आसान शिकार होते हैं। आजकल एक और दिक्कत आम हो चली है। वह है बच्चों का पढ़ाई या किसी भी काम में मन न लगना। इसके पीछे भी अनहेल्दी इटिंग हैबिट माना जा रहा है। बड़ों में भी इससे मानसिक व शरीरिक दिक्कतें बढ़ रही हैं।

वरिष्ठ आयुर्वेद पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. देवेश कुमार श्रीवास्तव के अनुसार जंकफूड में केवल फैट और कैलोरीज होती हैं। रेशेदार कुछ भी नहीं होता। इसमें मैदा, चीनी, नमक, रिफाइंड का बहुत ज्यादा प्रयोग होता है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर डालता है।

एक रिसर्च का तो दावा है कि जंकफूड से बच्चों का अनियंत्रित तरीके से वजन बढ़ रहा है और वे बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। हमारे शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन हर तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। जंक फूड से पेट की समस्याएं सबसे ज्यादा बढ़ रहीं हैं।

अगर आप ऑफिस जाते हैं तो
•फ्लास्क में लस्सी या छाछ रखा जा सकता है।
•एक फल जरूर रखें। शेड्यूल ज्यादा हेक्टिक हो तो शिकंजी और टिफिन जरूर ले जाएं। टिफिन में स्टफ्ड पराठे, पोहा, उत्पम, प्लेन दोसा और नारियल की चटनी रख सकते हैं।
•बाहर से कुछ खाना पड़े तो लइया चना, भेलपुरी, फ्रूट चाट का सेवन किया जा सकता है।
•खाने में सलाद और सब्जी का सेवन प्रचुर मात्रा में करें। इससे जंकफूड से हुए नुकसान को भी खत्म किया जा सकता है। ब्रेक फास्ट अच्छा, लंच हल्का और डिनर भी हल्का लें। स्मॉल और फ्रीक्वेंट डाइट अच्छी मानी जाती है। पेट बहुत ज्यादा भरा या खाली न रहे।

आ सकती हैं ये समस्याएं

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•जंक फूड से ब्रेन, किडनी, फेफड़े प्रभावित होते हैं।
•अमाशय के लिए सबसे ज्यादा घातक हैं।
•हार्ट कोरोनरी डिसीस को खुला न्यौता।
•बच्चे भी बीपी और टाइप-टू शुगर की चपेट में।
•शारीरिक व मानसिक रोगों का सबसे बड़ा कारण।
•हाइपरटेंशन, अवसाद और ध्यान न लगा पाने की दिक्कत।
•गुस्सा, अस्थिरता, चिड़चिड़ापन।
•महिलाओं में हार्मोनल डिसऑर्डर से अनियमित माहवारी की समस्या।
•इन्फर्टिलिटी का भी बन रहा कारण।
•मोटापा और ब्लड प्रेशर का कारक।
•रोग प्रतिरोधक क्षमता और एनर्जी में गिरावट।
•पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और कैंसर ऑफ एंडोमेट्रियम का कारक।
•त्वचा के लिए भी नुकसानदायक।
•थकान, कमजोरी और आलस्य का कारण।
•नींद न आने की समस्या।

ये देसी फूड अपनाएं...

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•बर्गर के बजाए घर पर बनी आलू या दाल की टिक्की खाएं।
•फ्रैंकी के बजाए घर पर ही पनीर या वेज रोल बनाएं।
•फ्रेंच फाइज के लिए आलू को फ्राई कर ऊपर से काला नमक, भुना जीरा और हींग का तकड़ा दें।
•सत्तू का पराठा, दाल का भरा पराठा या बाटी चोखा।
•रोटी दाल न खाने का मन हो तो दाल में आटे की टिक्की डालकर दाल दूल्हा बनाएं (दलटिक्की)। अरबी के पत्ती की पकौड़ियां चटनी के संग खाई जा सकती है।
•सैंडविच बनाने के लिए व्हाइट के बजाए ब्राउन ब्रेड का इस्तेमाल करें।
•नूडल्स खाने का मन है तो मोटी सेंवई को सब्जियों और सॉस के साथ बनाएं।
•चिली पनीर और मंचूरियन के बजाए मिक्सवेज और पनीर पुलाव बनाएं।
•कोल्ड ड्रिंक्स के बजाए नींबू की शिकंजी, छाछ और लस्सी का सेवन करें।
•कॉफी के बजाए ग्रीन टी का सेवन ज्यादा कारगर है।
•आम के सीजन में पना, जलजीरा, आम की चटनी, आम का गलका बनाकर सेवन करें।
•दूध की दलिया न खानी हो तो सब्जियां और टमाटर डालकर नमकीन दलिया बनाएं।
•भीगे हुए चने, अंकुरित दालों के साथ खीरा, ककड़ी, टमाटर नमक डालकर खाएं।
•दाल के फरे बनाने में भी आसान हैं और पौष्टिक भी।
•रोटी पराठे से तंग आ गए हों तो मेथी, मूली, मिक्स वेज, पनीर, पालक पराठे चटनी के संग खाएं।

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