पीडब्ल्यूडी में क्लर्क से जूनियर इंजीनियर बनने वालों का होगा डिमोशन, ये है वजह-
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पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता (जेई) के पद पर प्रोन्नति पाने वाले अधिसंख्य बाबू डिमोट किए जाएंगे। जांच में उनके दस्तावेज अमान्य पाए जाने के बाद यह फैसला हुआ है।
जांच अधिकारी व मुख्य अभियंता एचएन पांडेय ने बताया कि निजी संस्थानों से इंजीनियरिंग करने का दावा करने वाले कर्मचारियों का डिप्लोमा अमान्य पाया गया है। अब हर व्यक्ति के दस्तावेज की अलग-अलग जांच कर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
2013 में पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता के 5 फीसदी पद बाबुओं की पदोन्नति से भरे जाने का नियम बना। इसके तहत इंजीनियरिंग का वैध डिप्लोमा करने वाले बाबू इसके पात्र माने गये।
इस संशोधन के बाद तमाम बाबुओं ने राजस्थान के एक विश्वविद्यालय समेत कई निजी संस्थानों से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल कर लिया।
सपा सरकार के दौरान इसी डिप्लोमा के आधार पर 122 बाबुओं को जेई बना दिया गया। जबकि नियुक्ति से पहले डिप्लोमा का सक्षम संवैधानिक संस्था से सत्यापन करवाया जाना चाहिए था।
दूरस्थ शिक्षा से इंजीनियरिंग अमान्य : यूजीसी
इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राय मांगी गई, तो उसका कहना था कि किसी भी दूरस्थ शिक्षा केंद्र के माध्यम से ली गई इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा अमान्य है। इसके बाद ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) और डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) ने भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से लिए गए डिप्लोमा अमान्य करार दिया।
मुख्य अभियंता पांडेय ने बताया कि अभी यह नहीं बताया जा सकता कि प्रमोशन पाने वाले कितने बाबू डिमोट किए जाएंगे। क्योंकि अब सभी के दस्तावेजों की अलग-अलग जांच कराई जाएगी।