यूपी में बड़ी जीत ने बढ़ाया नड्डा का कद, सपा-बसपा गठबंधन से निपटने का मिला इनाम
लोकसभा चुनाव में प्रदेश के प्रभारी रहे जगत प्रसाद नड्डा को भाजपा का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पीछे यूपी के राजनीतिक समीकरणों ने काम किया। नड्डा ने बतौर प्रभारी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नक्शे कदम पर चलते हुए भाजपा गठबंधन को 64 सीटें जिताने में अहम किरदार अदा किया।
देश के सबसे बड़े राज्य में बड़ी जीत से भाजपा व संघ में नड्डा का कद बढ़ा। इनाम के रूप में उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। जेपी नड्डा की ताजपोशी कुछ उसी तरह हुई है जिस तरह 2014 में अमित शाह की हुई थी। 2014 में जिस समय शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया था, तब भाजपा की स्थिति राज्य में काफी कमजोर थी।
शाह ने प्रभारी के रूप में ना सिर्फ संगठनात्मक जमीन मजबूत की बल्कि प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जिताने का करिश्मा भी कर दिखाया था। शाह के सामने 2014 में भाजपा को खड़ा करने की चुनौती थी, तो 2019 में भाजपा के सामने सपा-बसपा गठबंधन के सामने बेहतर प्रदर्शन की चुनौती। इसी से निपटने से लिए पीएम मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी की जिम्मेदारी नड्डा को सौंपी। नड्डा ने उनकी कसौटी पर खरा उतरते हुए 64 सीटें दिलाकर साबित कर दिया कि वह शाह के उपयुक्त उत्तराधिकारी है।
चुनाव प्रबंधन पर नजर रखने के अलावा क्षेत्रों व जिलों का किया दौरा
उन्होंने लगातार पांच महीने तक न सिर्फ चुनाव प्रबंधन पर नजर रखी, बल्कि क्षेत्रों व जिलों का दौरा भी किया। बूथ कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क और संवाद की शैली से जमीनी सच्चाई समझकर रणनीति बनाई।
नड्डा ने चुनावी टीम को लगातार सक्रिय रखा और चुनावी गणित की हकीकत जानने के लिए पार्टी से इतर लोगों से भी मिले। यही कारण रहा कि भाजपा सपा-बसपा गठबंधन को बेअसर बना दिया।