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सर्वे: मुंबई, चेन्नई से ज्यादा लखनऊ में नौकरियां
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 20 Aug 2013 01:39 PM IST
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नौकरी का इंतजार कर रहे सूबे के युवाओं के लिए एक अच्छा संकेत है। मुंबई, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में जहां नौकरियां कम हो रही हैं, वहीं लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद जैसे तेजी से उभरते शहरों में नौकरियों के अवसर बढ़े हैं।
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राजधानी लखनऊ में पिछले साल की अपेक्षा इस साल 58 प्रतिशत नौकरियां बढ़ी हैं तो उद्योग नगरी कानपुर में 53 प्रतिशत। कुंभनगरी इलाहाबाद और ताजनगरी आगरा व अलीगढ़ जैसे शहरों में भी नौकरियां बढ़ी हैं। सूबे में नौकरियों की ग्रोथ 39 प्रतिशत रही है।
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उद्योग संगठनों की प्रतिष्ठित संस्था एसोचैम ने वित्त वर्ष 2012-13 और 2013-14 की पहली तिमाही (मार्च से जून) में देश भर में नौकरियों के अवसर को लेकर एक सर्वे किया है। इसमें ये संकेत उभर कर सामने आए हैं।
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एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने सोमवार को सर्वे के निष्कर्ष जारी किए। रावत के अनुसार, एसोचैम ने 56 शहरों और 32 सेक्टर (शिक्षा, आईटी, बैंकिंग आदि) में पिछले साल और इस साल की पहली तिमाही में निकली नौकरियों का अध्ययन किया।
इसके लिए 3000 कंपनियों को बेस बनाया गया। सर्वे में आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में औसत 39 प्रतिशत की ग्रोथ सामने आई है।
इन शहरों में इस अवधि में 5230 नए जॉब निकले जबकि पिछले साल इसी बीच 3750 नौकरियां निकली थीं। सर्वे के अनुसार आर्थिक राजधानी मुंबई में अवसर जहां तेजी से घटे हैं, वहीं विकास को लेकर काफी सराहना बटोरने वाले बिहार में भी अवसर कम हुए हैं।
उभरते शहरों की ओर कंपनियों का आकर्षण बढ़ा : रावत
एसोचैम के महासचिव डीएस रावत का कहना है कि उद्यमियों को इस बात का अंदाजा हो गया है कि प्रतिभाएं सिर्फ मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में नहीं होतीं।
प्रतिभाएं छोटे शहरों और कस्बों में भी होती हैं। यह बात भी उभर आई है किछोटे शहरों की प्रतिभाएं बड़े शहरों में अपने टैलेंट के हिसाब से अवसर के लिए जाती हैं।
यदि उन्हें उनके पास के शहर में उनके हिसाब से मौके मिलें तो उन्हें वहीं रोका जा सकता है। कंपनियों को इस बात का भी अंदाजा हो गया है कि बड़े शहरों की अपेक्षा छोटे शहरों में वह कम खर्च पर प्रतिभाओं को आकर्षित कर सकती हैं और सस्ता प्रोडक्ट तैयार हो सकता है।
ऐसे में टायर-टू व टायर -थ्री के शहरों में वे अपना विस्तार कर रही हैं। बड़े शहरों की अपेक्षा छोटे शहरों में बढ़ते अवसर को इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
यूपी के हर शहर में बढ़े अवसर
रावत ने बताया कि इस साल लखनऊ में 2690 नौकरियां निकलीं। यह इस साल निकली कुल नौकरियों का 51 प्रतिशत है। 830 नौकरियों के साथ मेरठ का 16 प्रतिशत शेयर रहा।
कानपुर, इलाहाबाद, आगरा और अलीगढ़ में क्रमश: 13 प्रतिशत, 10 प्रतिशत, सात प्रतिशत व तीन प्रतिशत नए अवसर सृजित हुए।
पिछले साल की अपेक्षा नई नौकरियों के सृजन में इस साल लखनऊ का ग्रोथ 58 प्रतिशत, कानपुर का 53 प्रतिशत, मेरठ और इलाहाबाद का 21 प्रतिशत रहा, जबकि आगरा और अलीगढ़ ने आठ प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है।