फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   jewelry sold to cover up dialysis now its time to sell farms

डायलिसिस कराने में बिक गए सारे गहने, अब खेत की बारी

Tue, 19 Feb 2019 10:37 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 19 Feb 2019 10:37 PM IST
विज्ञापन
jewelry sold to cover up dialysis now its time to sell farms
kgmu - फोटो : amar ujala
‘सप्ताह में दो बार बेटे की डायलिसिस होती है। मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। गरीबी रेखा के नीचे होने से केजीएमयू में मुफ्त में डायलिसिस हो जाती थी, लेकिन दो माह से बाहर से करानी पड़ रही है। तीन माह से यहां टरकाया जा रहा है। वहीं, प्राइवेट अस्पताल वाले तीन से चार हजार ले रहे हैं। अभी तक गहने बेच कर डायलिसिस कराता रहा, लेकिन अब बेटे को बचाने के लिए खेत बेचना पड़ेगा।’ यह दर्द झलका सांडी से आए शिवपूजन का। वह शताब्दी अस्पताल में पता करने आए थे कि मशीनें कब तक ठीक होंगी। यही स्थिति दूसरे मरीजों की भी हैं।
विज्ञापन


शताब्दी अस्पताल में डायलिसिस को बने कैश काउंटर से लेकर यूनिट तक आमतौर पर भीड़ रहती है। लेकिन, मंगलवार को अवकाश की वजह से नजारा बदला था। करीब दो दर्जन लोग यहां थे। इसमें ज्यादातर वे थे, जो विपन्न या बीपीएल श्रेणी में डायलिसिस कराते रहे हैं। कुछ ऐसे भी थे, जो शुल्क जमा कर डायलिसिस कराते हैं। कई ऐसे भी मिले, जो दो दिन से अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब सुबह पता चला कि तीन मशीनें और बंद हो गई हैं और अब सिर्फ तीन मशीन पर डायलिसिस होगी तो उनकी उम्मीदें टूट गईं। कैश काउंटर पर लोग पैसा जमा करने की जिद कर रहे थे। मौजूद कर्मचारी समझाता है कि सिर्फ तीन मशीनें हैं, जिसका बहुत जरूरी होगा, उसी का होगा। जरूरी की परिभाषा पूछने पर वह बगले झांकने लगा। लिफ्ट से आगे बढ़ने पर जमीन पर लेटे मरीज मिले। 
विज्ञापन


डायलिसिस यूनिट के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड  सभी को रोके रखा था। डायलिसिस हो रही है या नहीं, यह सुनते ही सबके कान खड़े हो जाते हैं। कोई भाई के शरीर में सूजन आ जाने की बात बताता तो कोई बेटे की कराह का हवाला देकर मदद मांगता। मीडिया से होने की जानकारी देने पर फिर सबकी आंखों की चमक गायब हो जाती है। यह भी कहते हैं कि आप लोग ही कुछ करिये। डायलिसिस यूनिट के कर्मचारी खुद को असहाय बताते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने कहा, बेहद गंभीर मरीजों की ही डायलिसिस कर रहे हैं। वक्त पर डायलिसिस होती रहने से मरीज की उम्र पांच से 10 साल बढ़ जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

कई दिन के इंतजार बाद आया नंबर

jewelry sold to cover up dialysis now its time to sell farms
डेमो - फोटो : demo pic
उन्नाव के संतू की हालत चलने-फिरने की नहीं है। वह चार दिन से डायलिसिस का इंतजार कर रहा था। सीएमएस सहित कई लोगों की सिफारिश के बाद मंगलवार को नंबर आया। साथ में मौजूद मां खुश थी। हालांकि, आगे क्या होगा, यह सोच कर सुबकने लगती है। कहती है अब तो परमात्मा का ही आसरा है। उसके पास निजी अस्पताल जाने को पैसे नहीं हैं।

निजी अस्पताल जाने की हिम्मत नहीं
हरदोई से आए विजय के बेटे की मंगलवार सुबह पहली शिफ्ट में डायलिसिस हुई। बताते हैं कि दो तीन बार निजी अस्पताल में डायलिसिस करा लिया, लेकिन अब हिम्मत नहीं है। कई दिनों से प्रयास के बाद आज नंबर आया। दिनभर इंतजार के बाद कई लोगों को शाम को मरीज को प्राइवेट अस्पताल लेकर भागना पड़ा।

लगातार बिगड़ रही मरीज की हालत
सीतापुर से आए प्रेम ने बताया कि उसके रिश्तेदार की डायलिसिस हो रही है। करीब दो माह से यहां मना कर दिया जा रहा है। मरीज कुछ भी खाने पर उल्टी कर दे रहा है। डॉक्टर ने एकमात्र उपाय डायलिसिस बताया है, लेकिन यहां सुनवाई नहीं हो रही है। हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed