ट्रॉमा सेंटर फुल, स्ट्रेचर पर हुआ इलाज
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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की ऐसी भीड़ उमड़ी की इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक मरीजों से खचाखच भर गया। कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा तो गंभीर रोगियों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
सुबह से उमड़ी मरीजों की भीड़ शाम चार बजे तक बनी रही जिसकी वजह से अव्यवस्था रही और कई मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज शुरू करना पड़ा।
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की भीड़भाड़ से वार्ड से लेकर जांच केंद्र तक अफरातफरी का माहौल रहा। कई मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर बलरामपुर और सिविल अस्पताल रेफर किया जाने लगा।
सबसे अधिक परेशानी न्यूरो के मरीजों को हुई। दोपहर एक बजे तक न्यूरो सर्जरी, मेडिसिन वार्ड, सर्जरी वार्ड और ऑर्थो सर्जरी वार्ड पुरी तरह फुल हो गए।
इसके बाद भी मरीजों का तांता लगा तो पहले से भर्ती मरीजों को आनन-फानन में गांधी वार्ड में शिफ्ट किया जाने लगा।
बिना इलाज लौट गए मरीज
सुबह से शाम चार बजे तक भीड़भाड़ से अफरा-तफरी का माहौल रहा। न्यूरो मेडिसिन और सर्जरी वार्ड के बाहर कई मरीज बरामदे में स्ट्रेचर पर लेटे रहे।
ठाकुरगंज के मानवेंद्र सड़क हादसे में बुरी तरह चोटिल हो गए उन्हें सिर में गंभीर चोट आई। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बेहोश हुए तो डॉक्टरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
सुबह करीब 11.30 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो डॉक्टरों ने बेड खाली न होने की बात कहकर लौटा दिया। परिवारीजन नाजुक हालत में मानवेंद्र को दूसरे अस्पताल लेकर चले गए।
सीतापुर के मनोहर (30) को पेट में भयंकर दर्द के बाद बृहस्पतिवार को दोपहर करीब एक बजे ट्रॉमा सेंटर लाया गया। डॉक्टर ने जांच की तो पता चला कि दर्द से राहत दिलाने के लिए पेट का ऑपरेशन करना पड़ेगा।
लेकिन सर्जरी वार्ड में जगह न होने के चलते भर्ती नहीं किया गया। डॉक्टर ने यूरिनल बैग लगा कर बेड खाली होने पर ट्रॉमा लाने की बात कही।