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जलालपुर-पारा के फ्लाईओवर : सेतु निगम टीम रजिस्ट्री लेकर गई, वापस नहीं लौटी

Wed, 25 Jun 2025 01:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jun 2025 01:54 AM IST
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Jalalpur-Para flyover: Bridge Corporation team took the registry and did not return
जलालपुर-पारा के फ्लाईओवर
लखनऊ। ये कुछ उदाहरण हैं उन पीड़ितों के, जिनके मकान और दुकान जलालपुर-पारा फ्लाईओवर की जद में आ रहे हैं। इसी तरह 87 मकान और दुकानें हैं, जो फ्लाईओवर के रूट में पड़ रहे हैं, मगर इनके मालिकों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। सेतु निगम की टीम दिसंबर 2024 में ही इन सभी की जमीन की रजिस्ट्री लेकर गई थी। सात माह गुजर चुके, मगर किसी को एक धेला नहीं दिया गया।
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153 करोड़ रुपये की लागत वाला जलालपुर-पारा फ्लाईओवर अफसरों की जल्दबाजी, मनमानी और सुस्ती का उदाहरण है। फ्लाईओवर का प्रोजेक्ट बना दिया गया, काम भी शुरू हो गया, मगर इसे जिस रास्ते से गुजराना है, वहां जमीन का अधिग्रहण किया ही नहीं गया। जब इसका 25 फीसदी काम पूरा हुआ तो इस पुल की जद में आने वाले जलालपुर-पारा के लोगों ने विरोध कर दिया, जिससे काम ठप हो गया। अब निर्माण ठप हैं, मगर सेतु निगम के अफसर प्रभावितों के मुआवजे का इंतजाम और जमीन का अधिग्रहण तक नहीं कर सके हैं।
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केस 1 - दुकान पर लगा चुके लाल निशान



राजाजीपुरम के डी-8 निवासी प्रदीप पांडेय की मकान संख्या डी-2 में दुकान है। वह ऑटोमोबाइल का कारोबार करते हैं। पुल निर्माण की जद में उनकी आधी दुकान आ गई है। सेतु निगम ने इसे तोड़ने के लिए लाल निशान लगा दिया है। मुआवजा देने के लिए दिसंबर में दुकान की रजिस्ट्री भी ले ली थी, मगर अब तक मुआवजा नहीं दिया।
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केस 2 - मकान व दुकान तोड़ने का अल्टीमेटम



जलालपुर-पारा निवासी सनी वर्मा का 2000 वर्ग फीट का मकान है। इसका 200 वर्गफुट का हिस्सा फ्लाईओवर की जद में आ चुका है। मकान के इस हिस्से को तोड़ने के लिए आए दिन सेतु निगम से अल्टीमेटम मिल रहे हैं, मगर मुआवजा देने की सुध नहीं है।

सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा लेने पर दबाव

जलालपुर-पारा के लोगों ने बताया कि सेतु निगम मुआवजा बहुत कम राशि में तय करना चाहता है। वह सर्किल रेट का केवल दोगुना मुआवजा ऑफर कर रहा है, जबकि लोग चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसी विवाद के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।


रक्षामंत्री तक पहुंच चुका प्रकरण

पार्षद नागेंद्र सिंह ने बताया कि मुआवजे के विवाद का प्रकरण रक्षामंत्री एवं सांसद राजनाथ सिंह के पास भी पहुंच चुका है। इस प्रकरण पर प्रोजेक्ट महाप्रबंधक को तलब किया गया था। उम्मीद है कि पीड़ितों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलेगा।
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