फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   its official that mukhtar ansari leaves kashi

काशी की रस्साकसी में डॉन मुख्तार ने छोड़ा मैदान

Thu, 10 Apr 2014 06:49 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 10 Apr 2014 06:49 PM IST
विज्ञापन
its official that mukhtar ansari leaves kashi

काशी से मोदी के लिए राह आसान होने का संकेत है या फिर कांग्रेस का जुगाड़, मुख्तार अंसारी ने काशी का मैदान फिलहाल छोड़ दिया है।

विज्ञापन


गुरुवार को मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने एलान कर दिया कि मुख्तार कौमी एकता दल के प्रत्याशी के रूप में सिर्फ घोसी लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे।

हालांकि, इसकी अटकलें काफी दिनों से चल रही थीं कि मुख्तार कांग्रेस की मदद करने के लिए मैदान छोड़ सकते हैं। गुरुवार शाम अफजाल के बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया।
विज्ञापन


हालांकि, अफजाल ने बताया कि मुख्तार अपनी आगे की योजना का एलान 15 अप्रैल को करेंगे।

मुख्तार नहीं, साझा उम्मीदवार होगा मैदान में

its official that mukhtar ansari leaves kashi
अब कौमी एकता दल नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए किसी बड़े सेक्युलर राजनीतिक दल के साझा उम्मीदवार को अपना समर्थन दे सकती है। इसकी पूरी संभावना थी कि बाहुबली मुख्तार अंसारी वहां से मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ें। हुआ भी वही।


दरअसल मोदी को तगड़ी चुनौती देने के मकसद से कौमी एकता दल ने पिछले दिनों सभी गैरभाजपाई दलों के सामने प्रस्ताव रखा था कि सभी दल मुख्तार अंसारी को समर्थन दें या किसी साझा प्रत्याशी के लिए उनका समर्थन लें।


दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने बताया कि ‘सेक्युलर दलों ने उनके प्रस्ताव पर गंभीरता दिखाई और काफी सकारात्मक रिस्पांस मिला। उम्मीद है दो-तीन दिन में कोई ऐसी तस्वीर सामने आएगी, जिसमें मोदी को कड़ी चुनौती मिलती दिखेगी।’

मीटिंग में सामने आईं थीं दो बातें

its official that mukhtar ansari leaves kashi

गौरतलब है कि 27 मार्च को अफजाल अंसारी के गाजीपुर स्थित आवास पर मुख्तार को चुनाव लड़ाने के मसले पर दल के नेताओं को एक बैठक हुई थी, जिसमें दो तरह की राय सामने आई।

एक पक्ष का कहना था कि मुख्तार को हर हाल में वाराणसी से भी लड़ना चाहिए तो कुछ लोग इस बात के पक्षधर थे कि बनारस से नहीं लड़ना चाहिए।

ऐसे लोगों का तर्क था कि एक तो सेक्युलर मतदाताओं के बंटने के आधार पर मोदी को मदद करने की तोहमत लगेगी, दूसरा ध्रुवीकरण की भी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जो हर नजर में मोदी को लाभ पहुंचाने वाली होंगी।

विज्ञापन

मुख्तार की छवि भी थी एक वजह

its official that mukhtar ansari leaves kashi

अफजाल ने बताया कि महसूस किया गया कि मुख्तार को लड़ाने को लेकर जब दल में दो तरह की राय है तो सेक्युलर मतदाताओं और खासकर मुसलमानों में भी भ्रम की स्थिति में होगी।

ऐसे में मुख्तार को लड़ाने के फैसले पर पुनर्विचार को मजबूर होना पड़ा होगा। मुख्तार की गिनती अतीक अहमद जैसे माफियाओं में होती है।

आखिर में यह तय हुआ कि मुख्तार के लिए सभी दलों से इस आधार पर समर्थन मांगा जाए कि पिछले लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ उन्होंने औरों से अधिक वोट हासिल किए थे।

पर हमें एहसास था कि कुछ दल मुख्तार की छवि को लेकर नाक-भौं सिकोड़ सकते हैं। लिहाजा यह वैकल्पिक प्रस्ताव गया कि सभी दल सहमति कर साझा प्रत्याशी खड़ा करें। उस स्थिति में हम उनको समर्थन देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed