{"_id":"0806bbe497b27cd21ae98e8fcbaa1853","slug":"it-will-be-electric-power-crisec-after-3-days","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन दिन बाद रुला सकती है बिजली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन दिन बाद रुला सकती है बिजली
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Sat, 29 Mar 2014 08:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरी राज्यों में यूपी के अलावा उत्तराखंड और राजस्थान को भी अप्रैल में बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। वहीं, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में जरूरत से ज्यादा बिजली रहेगी।
विज्ञापन
बिजली संकट की आशंका को देखते हुए चुनाव के दौरान आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखने के लिए पावर कॉर्पोरेशन व्यवस्था में जुट गया है। मांग और उपलब्धता का नए सिरे से आकलन कराकर अतिरिक्त बिजली व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
उत्तर क्षेत्रीय विद्युत समिति (एनआरपीसी) की ऑपरेशन कोऑर्डिनेशन कमेटी की 97वीं बैठक के एजेंडा नोट के अनुसार अप्रैल में यूपी, राजस्थान और उत्तराखंड में मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम रहेगी।
विज्ञापन
एनआरपीसी ने उत्तरी ग्रिड से जुड़े राज्यों में अप्रैल में बिजली की संभावित मांग और उपलब्धता का आकलन कराया है।
इसके अनुसार प्रदेश में संभावित मांग 12 हजार 466 मेगावाट रहेगी, जबकि उपलब्धता 12 हजार 39 मेगावाट रहने का अनुमान है। यानी यूपी में 427 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी।
उत्तराखंड में अप्रैल में मांग 1 हजार 757 मेगावाट रहने का अनुमान है, जबकि उपलब्धता 1 हजार 480 मेगावाट रहने की संभावना है। उत्तराखंड में 277 मेगावाट बिजली की कमी रहने का अनुमान है।
राजस्थान में अगले महीने बिजली की मांग 7 हजार 758 मेगावाट रहने का अनुमान है, जबकि उपलब्धता 7 हजार 271 मेगावाट रहने की संभावना है। यानी राजस्थान में 487 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी।
खास बात यह है कि इस दौरान उत्तरी ग्रिड से जुड़े तीन राज्यों दिल्ली में 28 मेगावाट, हिमाचल प्रदेश में 25 मेगावाट और हरियाणा में 1 हजार 46 मेगावाट सरप्लस बिजली रहने का अनुमान लगाया गया है।
एनआरपीसी ने पूर्वानुमान जारी करते हुए कमी वाले राज्यों को जरूरत भर अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करने की हिदायत दी है ताकि ग्रिड का संचालन सही ढंग से हो सके।