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लखनऊ चिड़िया घर में भी आइसोलेशन वार्ड तैयार, सीसीटीवी की निगरानी में रहेंगे वन्यजीव

Wed, 08 Apr 2020 07:11 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 08 Apr 2020 07:11 PM IST
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isolation ward ready in  lucknow zoo, animals will be kept under surveillance
जू में तैयार किया गया आइसोलेशन वार्ड।श् - फोटो : amar ujala
कोरोना से बचाव की एडवाइजरी जारी होने के बाद लखनऊ जू के आइसोलेशन वार्ड में इलाज की तैयारी पूरी हो गई है। वार्ड बन चुके हैं और उनकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे से की जाएगी।
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वार्ड में लगाए गए सीसीटीवी के दो लिंक चिकित्सक कक्ष और निदेशक कक्ष में हैं। कोई जानवर संदिग्ध दिखा तो उसे आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। यह कवायद शुरू हो चुकी है। 
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निदेशक जू आरके सिंह के मुताबिक, जू का 50 फीसदी से अधिक स्टाफ  वन्यजीवों की देखरेख में लगा हुआ है। वन्यजीवों के बाडे़ में जाने वाले स्टाफ  कीपर, सफाई कर्मी, सपोर्ट स्टाफ व चिकित्सक दल को सैनिटाइज किया जा रहा है।
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वार्डों में जाने वाले स्टाफ  गमबूट, मास्क, ग्लव्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाडे़ में जीवों को खाना डिसइंफेक्ट करके खिलाया जा रहा है। यह प्रक्रिया बीते कई वर्षों से अपनाई जा रही है। सीजेडए से जो एडवाइजरी जारी की गई है, उस पर काम चल रहा है।

लॉकडाउन और लंबा खिंचा तो जू में हो जाएगा वेतन और खुराक का जबरदस्त संकट

कोरोना संक्रमण के दौर में बीते 19 दिनों से बंद चल रहे लखनऊ जू पर वेतन और खुराक दोनों का संकट आ सकता है। दर्शकों के न आने से जू की आय बंद है। एक ट्रस्ट होने के चलते इसके अधिकतम खर्चे टिकट खरीद से ही पूरे होते हैं।

अगर लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो जू के स्टाफ के वेतन के साथ आने वाले दिनों में वन्यजीवों की खुराक पर भी संकट आ सकता है। लगभग 72 एकड़ में फैले जू में 90 से अधिक प्रजातियों के एक हजार से अधिक वन्यजीव हैं।

वन्यजीवों की देखरेख के स्टाफ के अलावा चिकित्सक, सपोर्टिंग स्टाफ और प्रशासकीय स्टाफ  मिलाकर करीब 200 अधिकारी व कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर ही 60 लाख के आसपास तक खर्च होता है।

जू की टिकट से मासिक आय करीब 75 लाख रुपये है। सरकार से हर साल जू को छह करोड़ रुपये अनुदान मिलते हैं। जू प्रशासन के मुताबिक, जू के वन्यजीवों की खुराक, वेतन समेत अन्य खर्च हर माह करीब सवा करोड़ रुपये हैं।

एक ट्रस्ट होने के नाते तमाम खर्चे टिकटों की बिक्री से होने वाली आय पर ही निर्भर है। 16 मार्च से जू बंद है। आय शून्य है। ऐसे में बजट बिगड़ न जाए, इसको लेकर हम अधिकारियों से बजट मांगने की तैयारी कर रहे हैं। अभी जू को मिलने वाली राशि भी नहीं आई है।

स्टाफ को दर्शक समझकर दौड़ते चले आते हैं चिम्पैंजी-बंदर और वन्यजीव

लॉकडाउन के चलते लखनऊ जू में वन्यजीव दर्शकों से दूर हैं। जू का शांत माहौल भी उनके लिए एक नया अनुभव है। हालांकि जू के चिकित्सक डॉ. अशोक कश्यप बताते हैं कि वन्यजीवों के लिए आदमियों से घुलना-मिलना आसान नहीं होता।

शेर व बाघ जैसे बड़े जानवर कीपर को ही पहचानते हैं। उन्हीं को रिस्पॉन्स करते हैं। चिम्पैंजी या बंदर प्रजाति जरूर मानवीय गतिविधियों पर रिस्पांस करते हैं। वहीं निदेशक जू आरके सिंह ने बताया दिन में राउंड लेने के दौरान और वन्यजीव तो कोई खास गतिविधि नहीं दिखाते, लेकिन जेसन चिंपैंजी टहलता हुआ बाड़े के किनारे चला आता है। 

शेर, बाघ तेंदुआ या हिरण प्रजाति के वन्यजीव अपने स्वभाव के चलते मानवीय गतिविधियों से दूर रहते हैं। ऐसे में बंदी के चलते दर्शकों के ना आने पर वह अपनी प्रकृति का ही आनंद ले रहे हैं।

डॉ. अशोक ने बताया कि हुक्कू बंदर कालू अपवाद कहा जा सकता था। उसे दर्शकों की आवाज और बोली पर जवाब देने की आदत थी। इसीलिए वह दिनभर लोगों की आवाज पर जवाब दिया करता था।

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