यूपी-नेपाल सीमा पर भी सक्रिय हैं आईएस के मॉड्यूल
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आतंकी संगठन इस्लामिक एस्टेट (आईएस) ने यूपी में नेपाल सीमा तक अपनी जड़ें जमाई हुई हैं। इसकी पुष्टि आईएस के संदिग्ध आतंकी रिजवान से पूछताछ में हुई है।
खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में रिजवान ने कुबूल किया है कि वह पिछले कुछ महीनों में कई बार नेपाल सीमा के पार गया था।
रिजवान से पूछताछ कर रही मुंबई एटीएस के अलावा केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने प्रदेश के आला पुलिस अफसरों को इस बात की जानकारी दी है।
हालांकि रिजवान ने अभी इस बाबत कोई पुख्ता सूचना नहीं दी है कि वह नेपाल सीमा पार कर कहां और किससे मिलने गया था। रिजवान पिछले करीब दो साल से आईएस से जुड़ा हुआ था।
पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि आतंकी संगठन की गतिविधियों में शामिल रहने के लिए उसने कंप्यूटर पर ई-मेल व सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना सीखा था। बाद में वह मोबाइल फोन पर भी सोशल मीडिया व मेल का इस्तेमाल करने लगा था।
वारदात को अंजाम देने की साजिश में हुआ था शामिल
सूत्रों के अनुसार रिजवान स्वीकार कर चुका है कि वह लखनऊ में अगस्त 2015 में अलीम के घर पर हुई बैठक में किसी वारदात को अंजाम देने की साजिश में शामिल हुआ था।
इसके अलावा वह और अलीम आईएस के लिए नए सदस्यों को जोड़ने में लगे हुए थे। इसके लिए उन्होंने कुछ युवकों को चिह्नित किया था और उनसे संपर्क बढ़ा रहे थे, लेकिन किसी को सीधे तौर पर जोड़ा नहीं जा सका था।
आईएस के लिए अहम भूमिका निभा रहे थे रिजवान और अलीम
अलीम जहां लखनऊ व अन्य स्थानों में वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहा था, वहीं रिजवान घटना के बाद संगठन के सदस्यों की छिपने के लिए जगह तैयार कर रहा था। इस सिलसिले में उसने गोवा में एक सेफ हाउस भी बनाया था।
विरोधाभासी बयान दे रहे अलीम और रिजवान
रिजवान ने जहां मुंबई एटीएस की पूछताछ में कुबूल किया है कि अलीम के लखनऊ स्थित घर पर हुई बैठक में आठ लोग शामिल थे, वहीं अलीम ने एनआईए के अफसरों को बताया है कि उसके घर पर सिर्फ छह लोग ही मौजूद थे। जांच अधिकारियों के मुताबिक अलीम ने अपने लैपटॉप के बारे में जो जानकारी दी, उसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूपी में कई आतंकी संगठनों के स्लीपिंग मॉड्यूल
यूपी में सिर्फ आईएस के अलावा कई अन्य आतंकी संगठनों के स्लीपिंग मॉड्यूल भी सक्रिय हैं। इस बार आईएस की सक्रियता सामने आई है।
इससे पहले वर्ष 2007 में लखनऊ कचहरी से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मकसूद अहमद और मोहम्मद सईद भाग निकलने में कामयाब हो गए थे।
मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब को आतंकी ट्रेनिंग देने वाले इन दोनों आतंकियों को यहां कचहरी लॉकअप के शौचालय में किसी ने असलहे मुहैया कराए थे, जिनका इस्तेमाल कर वे यहां से भागे थे।
पुलिस और खुफिया एजेंसियां आज तक उस मॉड्यूल की जानकारी हासिल नहीं कर सकी हैं जिसने इन दोनों की मदद की थी।
ऐसे ही सिलसिलेवार कचहरी बम विस्फोट के मामले में फैजाबाद, वाराणसी और लखनऊ में आतंकियों को स्थानीय मॉड्यूल का सहयोग मिलने की बात सामने आई थी।
मध्य प्रदेश के खंडवा जेल से फरार होकर यूपी के बिजनौर जिले में छिपने वाले सिमी के आतंकियों को भी स्थानीय मॉड्यूल से सहयोग मिला था।