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Corruption Case: भ्रष्टाचार के मामले में आईआरएस अफसर अरविंद मिश्रा को छह साल की सजा, डेढ़ लाख का जुर्माना
Tue, 13 Sep 2022 12:01 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 13 Sep 2022 12:01 AM IST
सार
लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत ने 23 साल पुराने रिश्वत मामले में आईआरएस अधिकारी अरविंद मिश्रा को 6 साल जेल की सजा सुनाई। आरोपी अरविंद ने बकाया प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत ली थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी और तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (आयकर) अरविंद मिश्रा को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय विक्रम सिंह ने घूसखोर तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर को छह साल के कारावास और 1.50 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके बाद कोर्ट ने दोषी को सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया।
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कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि अरविंद मिश्रा वर्ष 1989 में संघ लोक सेवा आयोग के जरिये चयनित होकर भारतीय राजस्व सेवा में आया था। अगर वह इस मामले में शामिल न होता तो वर्तमान में मुख्य आयकर आयुक्त की श्रेणी का अधिकारी होता। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों में कहा गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ ऐसा कठोर दंड दिया जाए, जिससे समाज में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाना संभव हो सके। ऐसे दोषियों के खिलाफ सहानुभूति और नम्र व्यवहार किए जाने से जहां समाज में गलत संदेश जाएगा वहीं, न्यायपालिका पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
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अभियोजन के अनुसार, वादी आरसी गर्ग ने 29 नवंबर 1999 को सीबीआई के एसपी से शिकायत की थी। इसमें बताया था कि वह अपनी पत्नी की कंपनी में प्रबंधक है और विकास नगर स्थित प्रतिष्ठान की खाली जगह को बेचना चाहता था। इसके लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र पाने के लिए आयकर विभाग के तत्कालीन उप आयुक्त सर्विसेज अरविंद मिश्रा को अर्जी दी। इसके लिए अरविंद ने 20 हजार रुपये मांगे। इसके बाद सीबीआई ने ट्रैप टीम लगाकर 30 नवंबर 1999 को 15 हजार की घूस लेते हुए अरविंद मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ 13 अगस्त 2001 को चार्जशीट लगाई थी, लेकिन इससे पहले सीबीआई ने शासन से अभियोजन की स्वीकृति नहीं ली थी। लिहाजा कोर्ट ने 30 नवंबर 2015 को इस मामले से आरोपी को डिस्चार्ज कर दिया था। बाद में सीबीआई ने अभियोजन से स्वीकृति लेकर फिर से चार्जशीट दायर की थी। इस पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और अरविंद मिश्रा को सजा सुना दी।
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