लेबल हटवाकर नामी कंपनी का लगवाया और बच्चों को बांट दिए स्वेटर, शिकायत
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जिले में बेसिक के 1367 प्राथमिक और 472 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 1,87,000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इन सभी को नि:शुल्क स्वेटर बांटा गया। इनकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं। कई विद्यालयों को जो स्वेटर दिए गए हैं, उनके लेबल बदले गए हैं।
आरोप है कि लगा लेबल हटवाकर नामी कंपनी का लेबल लगवा दिया गया। यह लेबल हटाने के चक्कर में कई स्वेटरों की बुनाई भी उधड़ चुकी है। वहीं, स्वेटरों के साइज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्र की लंबाई के अनुसार स्वेटर नहीं दिए गए हैं। कक्षा छह से आठ तक के कई छात्रों को छोटे साइज के स्वेटर दे दिए गए हैं।
मानकों पर खरे नहीं हैं उतरे
शिकायतों के अनुसार स्वेटरों को मानकों पर खरा नहीं बताया जा रहा है। स्वेटर उपलब्ध कराने के लिए शासन ने कुछ नियम लागू किए हैं। बीएसए डॉ. अमर कांत सिंह ने बताया कि स्वेटर में 30 प्रतिशत ऊन और 70 फीसदी एक्रेलिक धागा होना जरूरी है।
इससे कम मानक हुआ तो स्वेटर की गुणवत्ता खराब मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद स्वेटरों के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।