सांसद बनने का मतलब यह नहीं है कि संपूर्ण संविधान लागू करने की मांग छोड़ दूं: सावित्री बाई फुले
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बहराइच से भाजपा सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले ने कहा कि उन्हें टिकट की कोई परवाह नहीं है, संविधान की रक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है। आज संविधान की समीक्षा की बात कही जा रही है। अगर संविधान अपने मौजूदा मूल स्वरूप में नहीं बचा तो दलित एमएलए या एमपी नहीं बन पाएंगे। सामान्य सीट पर उन्हें कोई भी चुनाव नहीं लड़ाएगा। फुले ने अपने आंदोलन और भविष्य की रणनीति पर संवाददाता अजीत बिसारिया से खुलकर बात की।
सवाल - राजनीति में आपकी आगे की रणनीति क्या है?
जवाब - तमाम सरकारें आईं और गईं, पर इस देश में संविधान को संपूर्ण रूप से आज तक लागू नहीं किया गया है। इसके लिए संघर्ष ही मेरे भविष्य की एकमात्र रणनीति है।
सवाल - जाति व्यवस्था को खत्म करने की मांग के साथ ही जातिगत जनगणना की आपकी मांग कैसे जायज ठहराई जा सकती है?
जवाब - सामाजिक समता के लिए जाति व्यवस्था खत्म होना जरूरी है। जातिगत जनगणना से ही सामाजिक न्याय मिल सकता है। भागीदारी के अनुसार हिस्सेदारी के लिए भी जातिगत जनगणना जरूरी है।
सवाल - क्या आप आक्रामक तेवरों के चलते भाजपा से अलग नहीं जा रहीं ?
जवाब - सांसद बनने का मतलब यह नहीं है कि संपूर्ण संविधान लागू करने की मांग छोड़ दूं। कानून होने के बावजूद पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। दलितों पर हमले जारी हैं। संविधान नहीं बचा तो मैं भी सांसद नहीं रह पाऊंगी।
सवाल - आपका सीधा आरोप हैं कि भाजपा सरकार में आंबेडकर की मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं?
जवाब - देखिए! मीडिया बयान को तोड़-मरोड़ कर छाप रहा है। हम यह नहीं कह रहे कि भाजपा से जुड़ेलोग मूर्तियां तोड़ रहे हैं। यह काम अराजक तत्व कर रहे हैं। पीड़ा यह है कि इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए भाजपा को आगे आना चाहिए। सरकार चाहे कोई भी हो, दलितों व अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। आंकड़े कम या ज्यादा हो सकते हैं।
सवाल - कहा जा रहा है कि भाजपा से असंतोष का कारण आपके इस्तीफे से खाली बलहा विधानसभा सीट पर मनमुताबिक व्यक्ति को टिकट नहीं दिया जाना है?
जवाब - बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान की समीक्षा की बात हो रही है। आरक्षण की समीक्षा की बात भी कही जा रही है। मेरे आंदोलन में उतरने का यही कारण है।
'रैली में छाया नीला रंग, बसपा की तरफ बढ़ने का इशारा तो नहीं'
सवाल - आंदोलन की वजह यह आशंका तो नहीं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा आपको चुनाव नहीं लड़ाएगी?
जवाब - (हंसते हुए) मैं टिकट की परवाह नहीं करती। मेरे लिए संविधान की रक्षा अधिक महत्वपूर्ण है।
सवाल - लखनऊ में हुई आपकी रैली में नीला रंग छाया था। क्या यह बसपा के साथ नजदीकी बढ़ने की ओर तो इशारा तो नहीं?
जवाब - नीला रंग बाबा साहेब का रंग है। इसलिए इस रंग से हमें कोई दूर नहीं कर सकता।
सवाल - कहीं आप बसपा से लोकसभा टिकट की ओर तो नहीं देख रहीं?
जवाब - अभी टिकट को लेकर कोई विचार ही नहीं कर रही है। पूरा ध्यान आंदोलन पर केंद्रित है। समय आने पर देखा जाएगा।
सवाल - सपा-बसपा के गठबंधन पर आपके विचार?
जवाब - इस बारे में न कुछ सोचा और न ही कोई जानकारी।
सवाल - आप कह रहीं है कि देश में संपूर्ण संविधान लागू नहीं है। इसके लिए कोर्ट में जाने की कोई योजना?
जवाब - जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी जा सकते हैं।