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चिंताजनक है सूबे की कानून-व्यवस्था: नाईक

Sun, 03 Aug 2014 11:45 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 03 Aug 2014 11:45 AM IST
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interview of ram naik

हाल ही में सूबे के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालने वाले राम नाईक 80 की उम्र में भी जोशो-खरोश से भरपूर नजर आते हैं।

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सुबह छह बजे उनकी दिनचर्या शुरू होती है और चेहरे पर तैरती मुस्कुराहट के साथ रात नौ-दस बजे तक कामकाज निपटाते हैं।

भारतीय जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले नाईक प्रदेश की कानून-व्यवस्था को चिंताजनक तो बताते हैं लेकिन यह कहना नहीं भूलते कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसा ही महसूस करते होंगे।

वे इसमें सुधार के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने कानून-व्यवस्था और उच्च शिक्षा में सुधार के मुद्दों पर ‘अमर उजाला’ से खुलकर बातचीत की।

'जमीनी राजनीति से जुड़ा रहा हूं'

interview of ram naik

सवाल: यूपी के राज्यपाल के संवैधानिक पद की चुनौती को किस तरह देखते हैं?
जवाब: मैं समझता हूं कि यह मेरे लिए एक अवसर है, संवैधानिक पद पर रहते हुए प्रदेश को आगे ले जाने में योगदान देने का। जमीनी राजनीति से जुड़ा रहा हूं, इसलिए जेहन में वे सारी बातें हैं, जिनसे आम लोगों का हित हो सकता है।

काम करने का एक अलग आनंद है। यूपी में आया हूं। निश्चित रूप से बड़ा राज्य होने के कारण समस्याएं भी हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार है, यहां सपा की। सपा-बसपा का संघर्ष भी है। राजनीतिक द्वंद्व स्वाभाविक है। राज्यपाल के रूप में जो भी अपेक्षाएं हैं, उन्हें पूरा करने का प्रयास रहेगा।

सवाल: पूर्व में कई मौकों पर राजभवन और सरकार के रिश्ते सहज नहीं रहे?
जवाब: मेरी कोशिश रहेगी कि राजभवन और सरकार के  बीच अच्छा तालमेल बना रहे। कम से कम मेरी तरफ से ऐसा व्यवहार नहीं होगा, जिससे रिश्तों में खटास पैदा हो। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ अभी तक जिस तरह की चर्चा हुई है, उससे तो यही लगता है कि सब अच्छा ही रहेगा।

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जरूरी कदम उठाने की है जरूरत

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सवाल: कानून व्यवस्था को किस नजरिए से देखते हैं।
जवाब: कानून-व्यवस्था में मेरा सीधा कोई हस्तक्षेप नहीं है। यह राज्य सरकार का विषय है, लेकिन मेरा मानना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। इस पर सबको ध्यान देना होगा।

मैं महसूस करता हूं कि मुख्यमंत्री को भी ऐसा ही लगता होगा। कानून-व्यवस्था ठीक होनी चाहिए और इसके लिए जो भी जरूरी कदम उठाना जरूरी हों, उठाए जाने चाहिए। शपथ ग्रहण के बाद मेरे संज्ञान में मोहनलालगंज में बलात्कार के बाद महिला की हत्या का मामला आया। मैंने सरकार को पत्र लिखा।

फॉलोअप भी किया कि जांच ठीक होनी चाहिए। किडनी विवाद में सरकार से कहा है कि इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने महिला के दोनों बच्चों की दसवीं तक पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की है। मैंने कहा है कि बच्चे जब तक पढ़ना चाहें, सरकार उनका खर्च उठाए।

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'केंद्र को अभी नहीं भेजी कोई रिपोर्ट'

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सवाल: हाल ही मुरादाबाद के कांठ और सहारनपुर में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं। क्या आपने सरकार से कोई रिपोर्ट मांगी या कोई सलाह दी?
जवाब: मैंने सरकार से घटनाओं की जानकारी ली है। सहारनपुर में अनधिकृत निर्माण का मामला था। इस तरह की घटनाएं समाज और सरकार दोनों के लिए ही ठीक नहीं है। ऐसे मामलों में जागरूकता और संवेदनशीलता की जरूरत है।

सवाल:
क्या आपने केंद्र को कोई रिपोर्ट भेजी?
जवाब: अभी नहीं। राजभवन से केंद्र को मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है। पदभार संभाले अभी एक महीना नहीं हुआ। समय पर रिपोर्ट भेजेंगे।

सुधारनी है विश्वविद्यालयों की हालत

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सवाल: तात्कालिक रूप से क्या चुनौतियां देख रहे हैं?
जवाब: बीते सात-आठ दिन में जो अनुभव किया है, उसे देखते हुए बतौर कुलाधिपति विश्वविद्यालयों की हालत सुधारना ही सबसे बड़ी चुनौती लग रही है। प्रदेश में 24 विश्वविद्यालय हैं। पांच कुलपति रह गए हैं।

अलग-अलग कुलपतियों से मिल रहा हूं। कई विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपति हैं। कई कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। शिक्षकों की काफी कमी है। पद स्वीकृत हैं,लेकिन भर्तियां नहीं हो रही हैं। प्रदेश में उच्च शिक्षा की अच्छी प्रगति हो, इस ओर ध्यान रहेगा।

सवाल:
बतौर कुलाधिपति उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कोई खाका तैयार किया है आपने?
जवाब: विश्वविद्यालयों से ब्यौरा मांगा गया है कि राज्य सरकार के स्तर पर कौन-कौन से मामले लंबित हैं और क्या अपेक्षाएं हैं। राजभवन में लंबित मामलों का भी ब्यौरा मांगा गया है।

रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री से हर विश्वविद्यालय के संबंध में चर्चा करके समस्याओं के निराकरण का प्रयास करूंगा। राजभवन स्तर पर लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निबटारा कराऊंगा।

हमेशा खुले हैं राजभवन के दरवाजे

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सवाल: कई विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं। कई के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं। शिकायतों पर समय से कार्रवाई नहीं होती। इस पर क्या कर रहे हैं?


जवाब:
छह विश्वविद्यालयों में कार्यवाहक कुलपति हैं। संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी के कुलपति बिंदा प्रसाद की जांच चल रही थी। रिटायर होने से एक दिन पहले उन्हें हटाया। पूर्ववर्ती राज्यपाल ने कार्रवाई क्यों नहीं की, इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इतना विश्वास जरूर दिलाना चाहता हूं कि मेरे हाथ से कोई गड़बड़ी नहीं होगी।

सवाल: तो क्या माना जाए कि प्रदेश में विश्वविद्यालयों के ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं?
जवाब : मेरी कोशिश जरूर है।

सवाल:
आम जनता के लिए राजभवन के दरवाजे कब से खोलेंगे?
जवाब: दरवाजा तो खुला है। सुबह 11 बजे से सबसे मिलता हूं। दोपहर बाद कुलपतियों से मिलने का समय रखा है। जो भी मुझसे मिलना चाहे, मिल सकता है।

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