उद्योगपतियों के गिरोह में शामिल हैं मोदी: अखिलेश
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प्रदेश में लोकसभा चुनाव अंतिम दौर में पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूर्वांचल में ताबड़तोड़ प्रचार करके आखिरी मुकाबले में आगे निकलने में जी-जान से लगे हैं।
उनका मानना है कि भाजपा को बहुमत मिलने नहीं जा रहा है और वह 150 सीटों तक ही सिमटकर रह जाएगी। तीसरे मोर्चे के सवाल पर अखिलेश कहते हैं कि कई राज्यों में गैरकांग्रेस व गैरभाजपा दलों को काफी सीटें मिलने जा रही हैं।
चुनाव बाद बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे। नरेंद्र मोदी के गुजरात मॉडल को पूरी तरह खारिज करते हुए अखिलेश का कहना है कि वे केवल प्रचार में आगे हैं जबकि हम काम कर रहे हैं। यूपी जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं गुजरात में नहीं हैं।
मोदी उद्योगपतियों के गिरोह के
सवाल-प्रदेश में पांच चरण के चुनाव हो चुके हैं। क्या उम्मीदें देख रहे हैं पार्टी की?
जवाब-हम तो शुरू से कह रहे हैं कि सपा हर चरण में आगे बढ़ेगी। हम हर चरण में दो, तीन या चार सीटें ज्यादा जीत रहे हैं।
पांचवें चरण में जिन सीटों पर मतदान हुआ, वहां पिछली बार सपा ने तीन सीटें जीती थीं। इस बार हम छह सीटें जीतने जा रहे हैं।
सेक्युलर सोच वाले सपा के पक्ष में
जवाब-कहां जीत रहे हैं? रोज-रोज कोई नाटक करते हैं। सच तो यह है कि वे लड़ाई से बाहर हो गए हैं। गिनती क्यों नहीं बता रहे कि कितनी सीटें जीत रहे हैं?
समझ गए हैं कि हार होने जा रही है। वजह है कि तमाम सेक्युलर लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए सपा के पक्ष में मतदान किया है। सपा ने मोदी बुखार उतारकर रख दिया है।
सवाल-भाजपा के लोग यूथ के नरेंद्र मोदी के साथ ‘कनेक्ट’ होने की बात कह रहे हैं?
जवाब-बिल्कुल झूठ। यूथ को लैपटॉप और टेक्नोलॉजी हम दे रहे हैं और ‘कनेक्ट’ मोदी के साथ हो रहा है? कहां हो रहा है? हमने लैपटॉप देकर उनकी आगे की पढ़ाई आसान की है। दुनिया से उन्हें जोड़ा है। यूथ पूरी तरह हमारे साथ है।
बसपा जाति के सहारे
सवाल-चुनाव में जातियों को लेकर बड़ी बहस छिड़ी है?
जवाब-कुछ लोग हैं जो जाति पर लड़ रहे हैं। इनमें बसपा की नेता भी हैं। चुनाव में मुद्दों की बात होनी चाहिए लेकिन वह जाति पूछ रही हैं।
कांग्रेस भी यही कर रही है। उद्योगपतियों की कोई जाति नहीं होती है। बड़े लोग हैं। इनका अपना गिरोह होता है। टाटा, बिड़ला की कोई जाति पूछता है? इसी तरह मोदी, रिलायंस बजाज, अडानी हैं। इनकी कोई जाति नहीं है। ये (नरेंद्र मोदी) जितने रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं, उससे साबित होता है कि उद्योगपतियों के गिरोह के ही आदमी हैं।
इनकी जाति नहीं पूछनी चाहिए। दिन में कई-कई बार रंग बदलते हैं। नेताजी तो कहते हैं कि कुर्ता बदलते हैं लेकिन हमारा कहना है कि ये रंग बदलते हैं। जनता इनकी असलियत जान चुकी है।
उन्हें 'बुआ' सुनना बुरा लगता है
जवाब-यह कांग्रेस व अन्य लोगों का स्तर है, हमारा नहीं। हमारी बुआ और इनके बीच क्या अंतर है। हम तो फिर भी बुआ का सम्मान करते हैं।
बता दीजिए कोई मुख्यमंत्री जो बुआ कहता हो। अब अगर सम्मान बुरा लगता है तो हम क्या करें।
गंगा को लेकर राजनीति
जवाब-यह पूरी तरह गलत है। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा को हार सामने दिखाई दे रही है, इसलिए वह इस तरह का विवाद खड़ा करके राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में लगी है। जनता सब जान चुकी है। ये अब चाहे जितना नाटक कर लें कुछ होने वाला नहीं है। मैं भी कल वाराणसी जा रहा हूं रोड शो करने।
सवाल-छठे चरण में क्या संभावनाएं देख रहे हैं पार्टी की?
जवाब-और अच्छा करेंगे। अंतिम चरण में सपा को सबसे ज्यादा सीटें मिलने जा रही हैं। सेक्युलर लोगों का सपा को अच्छा समर्थन मिल रहा है। माहौल हमारे पक्ष में है।