{"_id":"589c11214f1c1b905237a9b9","slug":"interview-of-bjp-om-prakash-mathur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":" ‘काम बोलता है’ नारे की पोल खोलता है सपा कांग्रेस गठबंधन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘काम बोलता है’ नारे की पोल खोलता है सपा कांग्रेस गठबंधन
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 10 Feb 2017 11:40 AM IST
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ओम प्रकाश माथुर
- फोटो : demo pic
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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के प्रभारी ओमप्रकाश माथुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘काम बोलता है’ नारे की पोल सपा-कांग्रेस गठबंधन खोल रहा है।
यदि काम बोलता तो अखिलेश यादव को कांग्रेस से गठबंधन कर बैसाखी का सहारा नहीं लेना पड़ता। माथुर कहते हैं, ट्रिपल तलाक के मुद्दे को चुनाव के दौरान जनता के सामने उठाएंगे और उसे ठीक भी करेंगे। माथुर ने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :
भाजपा की चुनावी तैयारी क्या है? क्षेत्रों से क्या फीडबैक आ रहा है?
भाजपा पहली पार्टी है जिसने बूथ स्तर तक की रिपोर्ट के साथ प्रतिदिन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की जानकारी ली। रोज 20 से 30 आम सभाएं हो रही हैं। इन सभाओं में जैसी भीड़ आ रही है, उससे मेरा विश्वास है कि भाजपा के पक्ष में जबरदस्त माहौल है।
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सपा-कांग्रेस गठबंधन का भाजपा पर कितना असर पड़ेगा?
ये वही गठबंधन है जिसने दिल्ली में साथ रहकर यूपीए वन और यूपीए 2 की सरकार में देश को लूटा था। आम आदमी के मन में भाव पैदा हुआ है कि पहले शायद लूट में कमी रह गई है, इसलिए ये दोनों मिलकर यूपी को लूटने की भी तैयारी कर रहे हैं।
अखिलेश यादव काम और विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं?
काम बोलता तो सपा को कांग्रेस की बैसाखी का सहारा क्यों लेना पड़ा? इससे साफ है कि अखिलेश यादव कमजोर हैं। उनके नारे ‘काम बोलता है’ की पोल यह गठबंधन खोलता है। उनको लगता है कि वे सरकार नहीं बना पाएंगे या सभी 403 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकते। इसीलिए उन्होंने खुद पहल कर कांग्रेस से समझौता किया और उसे 105 सीटें दीं।
यूपी की जनता भाजपा को वोट क्यों दे?
बीते 15 वर्षों में जनता बसपा और सपा को बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी है। एक पार्टी सिर्फ माया की पार्टी हो गई दूसरी पार्टी अपने परिवार में ही खो गई। दोनों दलों के नेताओं के चुनाव के शपथ पत्र में दर्शाई संपत्ति से साफ है कि बीते 15 वर्षों में इनकी जायदाद में किस तरह बढ़ोतरी हुई है। परिवारवाद, बिगड़ी कानून-व्यवस्था, व्यक्तिवाद व भ्रष्टाचार से परेशान होकर जनता भाजपा को वोट दे रही है।
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यदि काम बोलता तो अखिलेश यादव को कांग्रेस से गठबंधन कर बैसाखी का सहारा नहीं लेना पड़ता। माथुर कहते हैं, ट्रिपल तलाक के मुद्दे को चुनाव के दौरान जनता के सामने उठाएंगे और उसे ठीक भी करेंगे। माथुर ने बुधवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :
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भाजपा की चुनावी तैयारी क्या है? क्षेत्रों से क्या फीडबैक आ रहा है?
भाजपा पहली पार्टी है जिसने बूथ स्तर तक की रिपोर्ट के साथ प्रतिदिन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की जानकारी ली। रोज 20 से 30 आम सभाएं हो रही हैं। इन सभाओं में जैसी भीड़ आ रही है, उससे मेरा विश्वास है कि भाजपा के पक्ष में जबरदस्त माहौल है।
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सपा-कांग्रेस गठबंधन का भाजपा पर कितना असर पड़ेगा?
ये वही गठबंधन है जिसने दिल्ली में साथ रहकर यूपीए वन और यूपीए 2 की सरकार में देश को लूटा था। आम आदमी के मन में भाव पैदा हुआ है कि पहले शायद लूट में कमी रह गई है, इसलिए ये दोनों मिलकर यूपी को लूटने की भी तैयारी कर रहे हैं।
अखिलेश यादव काम और विकास के नाम पर वोट मांग रहे हैं?
काम बोलता तो सपा को कांग्रेस की बैसाखी का सहारा क्यों लेना पड़ा? इससे साफ है कि अखिलेश यादव कमजोर हैं। उनके नारे ‘काम बोलता है’ की पोल यह गठबंधन खोलता है। उनको लगता है कि वे सरकार नहीं बना पाएंगे या सभी 403 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकते। इसीलिए उन्होंने खुद पहल कर कांग्रेस से समझौता किया और उसे 105 सीटें दीं।
यूपी की जनता भाजपा को वोट क्यों दे?
बीते 15 वर्षों में जनता बसपा और सपा को बहुत अच्छी तरह से समझ चुकी है। एक पार्टी सिर्फ माया की पार्टी हो गई दूसरी पार्टी अपने परिवार में ही खो गई। दोनों दलों के नेताओं के चुनाव के शपथ पत्र में दर्शाई संपत्ति से साफ है कि बीते 15 वर्षों में इनकी जायदाद में किस तरह बढ़ोतरी हुई है। परिवारवाद, बिगड़ी कानून-व्यवस्था, व्यक्तिवाद व भ्रष्टाचार से परेशान होकर जनता भाजपा को वोट दे रही है।
मोदी से प्रभावित होकर दूसरे दलों से आए
ओम प्रकाश माथुर
- फोटो : demo pic
भाजपा को 70 से अधिक बाहरी प्रत्याशियों को टिकट देने की जरूरत क्यों पड़ी?
70 में से 50 ऐसे लोग हैं जो लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में आए थे, लेकिन वे भी पहले हमारे ही थे। हां, 20-22 लोग ऐसे हो सकते हैं जो अभी आए हों। प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित होकर उत्तर प्रदेश ही नहीं, मणिपुर, आसम, केरल तक में दूसरे राजनीतिक दलों से लोग भाजपा में आए हैं।
बाहरी लोगों को टिकट देने से हुई नाराजगी को कैसे नियंत्रित करेंगे?
पहली बार ऐसा माहौल है कि यूपी में भाजपा की सरकार बन रही है। इसलिए हर कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहता है, टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी स्वाभाविक है। हालांकि यह क्षणिक थी, व्यक्तिगत रूप से लोगों से मिलकर नाराजगी दूर कर रहे हैं।
असंतोष नहीं थमा तो क्या करेंगे?
समझाने की कोशिश कर रहे हैं, नहीं समझेंगे तो कार्रवाई करेंगे। टिकट देना अलग बात है, कार्यकर्ता का सम्मान बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।
भाजपा शासित राज्यों में ट्रिपल तलाक का मुद्दा क्यों नहीं उठाते?
हमने जनता के बीच एक मुद्दा दिया है। सबको साथ में लेकर चलना पड़ेगा, हमारी मान्यता है कि इस मुद्दे को उठाएंगे और ठीक भी करेंगे।
भाजपा फिर ध्रुवीकरण के मुद्दे पर क्यों आई?
विरोधी क्या कह रहे हैं इससे मतलब नहीं है। हमारा मुद्दा है सरकार बनाना। सरकार बनाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया केतहत सौहार्दपूर्ण तरीके से जो भी करना होगा, हम करेंगे।
70 में से 50 ऐसे लोग हैं जो लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में आए थे, लेकिन वे भी पहले हमारे ही थे। हां, 20-22 लोग ऐसे हो सकते हैं जो अभी आए हों। प्रधानमंत्री मोदी से प्रभावित होकर उत्तर प्रदेश ही नहीं, मणिपुर, आसम, केरल तक में दूसरे राजनीतिक दलों से लोग भाजपा में आए हैं।
बाहरी लोगों को टिकट देने से हुई नाराजगी को कैसे नियंत्रित करेंगे?
पहली बार ऐसा माहौल है कि यूपी में भाजपा की सरकार बन रही है। इसलिए हर कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहता है, टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी स्वाभाविक है। हालांकि यह क्षणिक थी, व्यक्तिगत रूप से लोगों से मिलकर नाराजगी दूर कर रहे हैं।
असंतोष नहीं थमा तो क्या करेंगे?
समझाने की कोशिश कर रहे हैं, नहीं समझेंगे तो कार्रवाई करेंगे। टिकट देना अलग बात है, कार्यकर्ता का सम्मान बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।
भाजपा शासित राज्यों में ट्रिपल तलाक का मुद्दा क्यों नहीं उठाते?
हमने जनता के बीच एक मुद्दा दिया है। सबको साथ में लेकर चलना पड़ेगा, हमारी मान्यता है कि इस मुद्दे को उठाएंगे और ठीक भी करेंगे।
भाजपा फिर ध्रुवीकरण के मुद्दे पर क्यों आई?
विरोधी क्या कह रहे हैं इससे मतलब नहीं है। हमारा मुद्दा है सरकार बनाना। सरकार बनाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया केतहत सौहार्दपूर्ण तरीके से जो भी करना होगा, हम करेंगे।