यूपीः एसटीएफ ने सब्जी तोलने वाले तराजू पर तौलवाया बम
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कोर्ट में एसटीएफ के हर गवाह ने अलग-अलग थ्योरी बता दी। गिरफ्तारी,विस्फोटक बरामदगी सब संदिग्ध साबित हो गई। एसटीएफ ‘फिदायीन आतंकी’को पकड़ने बिना तैयारी ही निकल पड़ी। वह विस्फोट कर खुद को पुलिस बल के साथ उड़ा सकता है,लेकिन ऑपरेशन पर जाते हुए पुलिसकर्मी गवाही के लिए लोगों को पकड़ पकड़ कर जीप में साथ ले जाने का प्रयास कर रहे थे।
जब आरोपी को पकड़ा गया तो पुलिस उससे बरामद विस्फोट को तोलने के लिए आम बेचने वालों को तराजू और बाट के साथ मौके पर ले आई। यह सब हास्यास्पद है। कहीं बम होने की आशंका हो तो नागरिकों को वहां से दूर किया जाता है ताकि जान माल का नुकसान न हो। लेकिन एसटीएफ ने इसकी गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया।
आतंकी बताकर गिरफ्तार किए गए याकूब के मामले में निर्णय देते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कुछ ऐसी ही टिप्पणियां करते हुए एसटीएफ द्वारा रची कहानी की धज्जियां उड़ाई।
एसटीएफ की भूमिका पर भी कोर्ट को संदेह
जज ने स्पष्ट कहा कि एसटीएफ ने जिस तरह याकूब की गिरफ्तार के ऑपरेशन को अंजाम देना बताया है वह स्वयं में संदेहास्पद है। ऑपरेशन की कहानी के अनुसार टीम को फिदायीन के चारबाग पर होने की सूचना मिलने के बाद जिस तरह एसआई विनय गौतम ने टीम बनाकर ऑपरेशन शुरू किया।
इस दौरान पुलिस को सूचित कर दिया गया था कि आतंकी के पास विस्फोटक है और वह पुलिस बल को उड़ा सकता है। लेकिन पुलिस ने सामान्य ऑपरेशन की तरह कार्रवाई की। अभियुक्त से मौके पर ही पूछताछ शुरू कर दी गई।
एसटीएफ ने यह भी बताया कि इसी दौरान याकूब ने एक अन्य आरोपी नासिर हुसैन उर्फ आरिफ के बारे में बताया कि वह भारी मात्रा में विस्फोटकों के साथ चारबाग में एक लॉज में रुका हुआ है।
इसके बाद भी एसटीएफ ने होटल पर छापा नहीं मारा,बल्कि याकूब को 12-15 किमी दूर गोमतीनगर में अपने ऑफिस लेकर आ गई। वहीं नासिर हुसैन को एक अन्य एसआई बृजमोहन पाल के नेतृत्व में अवैध सामान के साथ गिरफ्तार दिखाया,हालांकि बाद में वह कोर्ट में दोषमुक्त करार दिया गया।
पाकिस्तान से ट्रेनिंग लिया फिदायीन है याकूब
एसटीएफ के अनुसार आतंकी संगठन हूजी भारत के युवकों का ब्रेन वॉश करके देश में आतंकी हमले करवाता है। इसके लिए युवकों को बांग्लादेश ले जाया जाता है,जहां उनके भारतीय पासपोर्ट ले लिए जाते हैं।
उन्हें बांग्लादेश के पासपोर्ट देकर कराची भेजा जाता है। यहां पहाड़ों पर हथियार चलाने और विस्फोटक तैयार कर ब्लास्ट कराने की ट्रेनिंग दी जाती है। फिर इन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जाता है।
वहां से भारतीय पासपोर्ट उन्हें लौटा कर भारत भेज दिया जाता है। ऐसे ही एक ट्रेनिंग पाए आतंकी याकूब उर्फ शाकिर उर्फ लंबू के बारे में एसटीएफ को 21 जून 2007 को सूचना मिली कि वह लखनऊ में विस्फोट कराने की तैयार कर रहा है। एसटीएफ मौके पर एक गवाह के साथ पहुंची और बाल विद्या मंदिर के सामने से उसे दोपहर ढाई बजे गिरफ्तार किया। तलाशी में उसके कपड़ों में दो काले रंग के विस्फोटक भरे पैकेट मिले। इसमें तीन टाइमर घड़ियां,तीन डेटोनेटर, लाल रंग के तार के गुच्छे,9 वोल्ट की बैट्री मिली। एसटीएफ ने आम के ठेले वाले से पैकेटों का वजन कराया जो साढ़े किलो के थे।