फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Internet addiction disorder in youngster

इंटरनेट यूज करते हैं तो हो सकती है ये बीमारी!

Tue, 21 Jul 2015 04:12 PM IST
टीम दुनिया 360/अमर उजाला,नोएडा
टीम दुनिया 360/अमर उजाला,नोएडा Updated Tue, 21 Jul 2015 04:12 PM IST
विज्ञापन
Internet addiction disorder in youngster

इंटरनेट जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है,मगर इसकी लत आपको बीमार भी कर सकती है। अगर आप घंटों वर्चुअल दुनिया से जुड़े रहते हैं,तो इंटरनेट एडिक्शन डिस्ऑर्डर के शिकार हो सकते हैं।

विज्ञापन


‘इंटरनेट एडिक्शन डिस्ऑर्डर’का असर दिमाग पर ठीक वैसे ही पड़ता है,जैसे ड्रग्स या नशीली दवाओं के सेवन से नुकसान होता है। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस की स्टडी के अनुसार इंटरनेट की बुरी लत दिमाग को कमजोर करने के साथ कई अन्य तरह से नुकसान पहुंचाती है।
विज्ञापन


सफदरजंग अस्पताल की सीनियर रेजिडेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. छवि भसीन कहती हैं कि क्या आप जानते हैं कि घंटों इंटरनेट से चिपके रहने की आदत एक मानसिक बीमारी ′इंटरनेट एडिक्शन डिस्ऑर्डर′ (आईएडी) का कारण बन रही है?
विज्ञापन
विज्ञापन


ऑनलाइन गेमिंग,पोर्नोग्राफी और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अधिक समय बिताना ज्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है। ये आईएडी के शुरुआती लक्षण हैं। मगर,धीरे-धीरे व्यक्ति को इसकी लत लग जाती है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि नेट का प्रयोग न कर पाने से गुस्सा,बेचैनी,चिड़चिड़ापन होने लगता है।

इंटरनेट एडिक्‍शन डिस्‍ऑर्डर के ये हैं लक्षण

Internet addiction disorder in youngster

आईएडी से ग्रस्त व्यक्ति पांच से दस घंटे का समय इंटरनेट पर बिताने लगता है। घर से बाहर निकलना,दोस्तों और परिवार को कम समय देना,खाना-पीना कम कर देना जैसे लक्षण सामने आते हैं।

हाथ एवं कलाई में दर्द,सूखी आंखें,वजन बढ़ना या घटना,हर काम कंप्यूटर के सामने बैठकर करना और अपने कमरे में अकेला रहते हुए राहत महसूस करना इस बीमारी के लक्षण होते हैं। कुछ शोधों में पाया गया है कि ‘इंटरनेट एडिक्‍शन डिस्‍ऑर्डर’से ग्रस्त लोग शराब और ड्रग्स जैसी चीजों को भी अपनाने लगते हैं।

‘इंटरनेट एडिक्‍शन डिस्‍ऑर्डर’ से ग्रस्त मरीज खुद को भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करने लगता है और उसका खुद पर नियंत्रण कम होने लगता है। हमेशा बेचैनी महसूस करना,तनाव,भूख न लगना,नींद न आना जैसी समस्या बढ़ जाती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के एक शोध के अनुसार इस बीमारी में मरीज हमेशा व्याकुल रहने लगता है। यही नहीं,किसी काम में मन न लगना,किसी भी काम पर फोकस न कर पाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।

ऐसे मिलेगी इस बीमारी से निजात

Internet addiction disorder in youngster

स्मार्टफोन,सोशल नेटवर्किंग साइट्स और पोर्नोग्राफी जैसी चीजें,धीरे-धीरे इंटरनेट का एडिक्ट बना देती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैर्लिफोर्निया के शोध के अनुसार इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को इंटरनेट का प्रयोग कम करना चाहिए। 

इसकी बजाय किताबों और संगीत को अपना दोस्त बनाइए। परिवार, दोस्तों के साथ समय बिताने से यह आदत धीरे-धीरे कम हो सकती है। पिछले कुछ समय में ‘इंटरनेट एडिक्‍शन डिस्‍ऑर्डर’के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। 

′इंटरनेट एडिक्‍शन डिस्‍ऑर्डर′का उपचार दवाइयों के साथ-साथ बिहेवियर थेरेपी से किया जाता है। इसका आभास रोगी को नहीं होता। ग्रुप के साथ या अकेले भी यह थेरेपी दी जाती है। मरीज को धीरे-धीरे इंटरनेट की लत छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। अगर वह दस घंटे इंटरनेट प्रयोग करता है, तो उसे पहले आठ घंटे फिर छह घंटे और फिर इससे भी कम इंटरनेट प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाता है। इसकी जगह दूसरी गतिविधियों की और मरीज को आकर्षित किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed