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गरीबों के पैसे का ब्याज खा रहा आवास विकास परिषद
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Wed, 06 Nov 2013 11:58 AM IST
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आवास विकास परिषद ने कम आय वर्ग के लोगों के लिए भूखंड और फ्लैट की योजनाएं तो उनको राहत देने के लिए निकाली थीं।
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मगर अब ये योजनाएं परिषद की कमाई का साधन बन गई हैं।
प्रत्येक माह लगभग 50 लाख रुपये का ब्याज परिषद के खातों में आवेदकों के जमा धन से आ रहा है, मगर लॉटरी कब होगी, इसका जवाब हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी नहीं दे रहे हैं।
अवध विहार योजना के ईडब्ल्यूएस और एलआईजी स्कीम और वृंदावन के छोटे भूखंडों की स्कीम में लगभग 33000 लोगों ने आवेदन किया है।
जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई का लगभग 66 करोड़ रुपये परिषद के खाते में बतौर पंजीकरण राशि जमा करवा दिया है।
परिषद की दो योजनाओं की लॉटरी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। मजे की बात यह है कि राजधानी के लिए लांच की गई इन्हीं दोनों स्कीमों में सबसे अधिक आवंटियों ने पंजीकरण करवाया है।
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अवध विहार ईडब्ल्यूएस और एलआईजी फ्लैट
परिषद की प्रस्तावित अवध विहार योजना में करीब 1500 फ्लैटों की स्कीम छह महीने पहले निकाली गई थी।
जिसमें ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की कीमत करीब पांच लाख और एलआईजी का मूल्य लगभग 8 लाख रुपये है। इसमें लगभग 16000 आवेदन हाउसिंग बोर्ड को प्राप्त हुए हैं।
इन लोगों ने लगभग 32 करोड़ रुपये जमा किए हैं। एलिजीबिलिटी लिस्ट बनने के बावजूद लॉटरी नहीं हो सकी है।
वृंदावन में छोटे क्षेत्रफल के प्लॉट
सालों बाद जब प्लॉटों की स्कीम निकाली गई तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला।
दो महीने बीते चुके हैं, लेकिन लॉटरी का नंबर नहीं आया। 40 से 65 वर्ग मीटर के प्लॉटों के लिए बतौर पंजीकरण राशि 15 हजार और 30 हजार रुपये जमा करवाए गए।
लगभग 17000 आवंटी इस योजना में पंजीकरण राशि जमा कर चुके हैं। यह आंकड़ा लगभग 34 करोड़ रुपये का है।
किस बात का इंतजार, पता नहीं
एलिजीबिलिटी लिस्ट बन गई और आवंटियों की पंजीकरण राशि भी जमा हो गई तो परिषद को लॉटरी करने के लिए किस बात का इंतजार है।
इसको आवेदक समझ नहीं पा रहे हैं। अधिकारियों का आश्वासन एक सप्ताह और 15 दिन का है, मगर वास्तविक तिथि का अंदाजा किसी को भी नहीं है।