2136 करोड़ का बीमा पर किसानों को सिर्फ 1.65 करोड़!
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2136 करोड़ रुपये का बीमा हुआ। केंद्र व राज्य सरकार के साथ-साथ किसानों ने 141 करोड़ प्रीमियम चुकाए।...पर बारिश और ओलावृष्टि से फसलों की बर्बादी पर किसानों को मिले महज 1.65 करोड़ रुपये।
यह हाल है संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का। बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसलों की बर्बादी से किसान कराह रहा है। आत्महत्या कर रहा है...। दूसरी तरफ मोटा प्रीमियम लेने वाली बीमा कंपनियां से किसानों को अदा प्रीमियम के बराबर भी मदद नहीं मिल पा रही है।
संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत मौजूदा रबी की फसलों के लिए सूबे में 6.47 लाख किसानों की फसलों का 2136 करोड़ का बीमा किया गया। यह स्कीम सूबे के 65 जिलों में लागू है।
नियम तो कहता है किसी आपदा के दौरान 50 फीसदी फसल के खराबे पर किसानों को बीमित राशि का 25 फीसदी तत्काल किसानों को मिल जाना चाहिए।
यानी अब तक किसानों के हाथ में 534 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम होनी चाहिए थी। पर, तमाम कोशिशों के बावजूद 7581 किसानों को 1.65 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
मौसम आधारित बीमा योजना की मदद का है इंतजार
इसके अलावा दस जिलों में लागू मौसम आधारित बीमा योजना में 10.50 करोड़ रुपये अदाकर 1.51 लाख किसानों का 182.05 करोड़ का बीमा कराया गया था। इसमें फसल कटने के बाद बीमा कवर देने की व्यवस्था है। इसके नतीजे का इंतजार है।
पहली बार नहीं हो रहा ऐसा
खरीफ: 2265 करोड़ का बीमा किया, 113 करोड़ मुआवजा दिया
ऐसा पहली बार नहीं हुआ। बीते खरीफ सीजन की ही बात करें तो दोनों बीमा योजनाओं को मिलाकर 7.36 लाख किसानों का 2265.50 करोड़ का बीमा कराया गया था। इसके लिए 213.45 करोड़ का प्रीमियम अदा किए गए।
मगर किसानों को सिर्फ 113 करोड़ रुपये ही मिले। साफ है कि बीमा कंपनियों के लिए ही ये योजनाएं फायदेमंद साबित हो रही हैं।
...तो उठाएंगे कदम
मामले पर प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद का कहना है कि संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत किसानों को तत्काल 25 फीसदी मदद मिलनी चाहिए। इसके लिए बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। कंपनियों को 22 अप्रैल को राहत के ब्यौरे के साथ फिर बुलाया गया है। यदि इसमें संतोषजनक सुधार नहीं पाया गया तो कंपनियों के सीनियर अफसरों को बुलाया जाएगा। जरूरी हुआ तो अन्य कदम भी उठाएंगे।