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व्यायाम से भी खराब हो सकते हैं घुटने

Sun, 02 Nov 2014 02:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 02 Nov 2014 02:20 PM IST
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Instant exercise can also damage knees.

जोड़ों का दर्द और रिप्लेसमेंट का काम हेल्थ सेक्टर का बूमिंग सेक्टर है। दस में से तीन व्यक्ति इस तरह की समस्या से पीड़ित हैं। सड़क हादसों ने इस तरह की समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है।

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हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास मरीजों की भीड़ लगी है। आजकल एक और बात देखने में आई है कि अचानक व्यायाम से भी बीमारी बढ़ रही है।

इसलिए सलाह यही है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के व्यायाम करने से बचना चाहिए। जोड़ों की चोट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यह जानकारी केजीएमयू के ऑर्थोपैडिक सर्जरी विभाग के 63वें स्थापना दिवस समारोह पर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रो. एएन श्रीवास्तव ओरेशन में ऑर्थो सर्जन डॉ. संजीव केएस मार्या ने दी।
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उन्होंने बताया कि टेलीविजन चैनलों पर योगा और जॉगिंग के फायदे देखने के बाद लोग अचानक व्यायाम करने लगते हैं। अचानक आपका योगा, जॉगिंग और सिट्अप्स घुटनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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अचानक शुरू किए गए एक्सरसाइज से जॉइंट की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और कई बार तेज झटका या मुड़ जाने पर सेल्स और टिशु टूट जाते हैं।

नजरअंदाज ना करें जोड़ों का दर्द

Instant exercise can also damage knees.

लगातार व्यायाम करने के बाद टिशु और सेल्स पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं और तब दर्द घातक हो जाता है।

इसके बाद जोड़ों में सूजन, जोड़ को छूने से डर लगना, कमजोरी के साथ सुस्ती, जोड़ों से आवाज होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

ऐसी स्थिति में सही समय पर स्पेशलिस्ट ऑर्थो सर्जन से राय लेनी चाहिए क्योंकि जरा सी देरी आपको नुकसान पहुंचा सकती है।


दर्द हो तो जमीन पर बैठने से बचें
डॉ. संजीव के मुताबिक घुटने के दर्द से पीड़ित मरीज या जिसकी सर्जरी हुई है उसको जमीन पर पालथी मारकर कभी नहीं बैठना चाहिए। नी-रिप्लेसमेंट के बाद मरीज को किसी हालत में जमीन पर नहीं बैठना चाहिए।

जमीन पर बैठने से घुटने के जॉइंट्स में दिक्कत होती है और लगातार ऐसा होने पर परेशानी बढ़ जाती है। सर्जरी के बाद संभल कर रहना चाहिए।

खानपान का रखें विशेष ख्याल

Instant exercise can also damage knees.

केजीएमयू के प्रो. आरएन श्रीवास्तव ने बताया कि लोग अपनी आदतों को सही रखें तो जोड़ों के दर्द से बचा जा सकता है।

विटामिन और कैल्शियम युक्त भोजन के साथ नियमित वॉक किया जाए तो कभी सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

मोटापा घुटने के दर्द का प्रमुख कारण है और शरीर का वजन संतुलित रखा जाए तो इसके दर्द से बचा जा सकता है।
बढ़ रहे हैं रेफरल केस

हड्डी की बीमारी मरीजों के लिए मुसीबत है। डॉ. संजीव ने केजीएमयू के यंग डॉक्टर्स को बताया कि सर्जरी के बाद मरीज की केयर अधिक जिम्मेदारी से करनी चाहिए।

सर्जरी होगी तो उसमें रिस्क तो होता ही है लेकिन सर्जरी के बाद किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो उसे दोबारा ठीक करने के लिए सर्जरी करने से बचना चाहिए।

फिक्सेशन किस तरह का हो और उसकी केयर कैसे होनी है जिससे मरीज को नुकसान न हो इसका पूरा ख्याल रखना चाहिए।

स्कोलियोसिस का होगा इलाज

Instant exercise can also damage knees.

ऑर्थो सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. विनीत शर्मा ने बताया कि रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना गंभीर बीमारी है। केजीएमयू में इसका इलाज जल्द शुरू कराया जाएगा।

रीढ़ की हड्डी की यह बीमारी वट्रीबा के बढ़ने में गड़बड़ी पर होती है। स्कोलियोसिस का इलाज एक लंबी प्रक्रिया है।

दवाओं की फिक्स डोज बना रही बीमार

दवाओं की फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। मरीज को बुखार की शिकायत होने पर वह बुखार के साथ पेट में जलन सिर में दर्द और गैस की दवा भी खा रहा है।

दवाओं का ऐसा कॉम्बिनेशन मरीजों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को होता है जो इन कॉमन दवाओं का इस्तेमाल बिना डॉक्टरी सलाह के लेते हैं।

दवाओं के खतरों से बचने का उपाय है कि डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।

ये जानकारी केजीएमयू के फॉर्मोकोलॉजी विभाग में प्रो. एमएल गुजराल और प्रो. केपी भार्गव ओरेशन में नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के फॉर्मोकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सीडी त्रिपाठी ने दी।

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