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कोर्स के हिसाब से कॉलेजों के संसाधनों का होगा सत्यापन

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2020 03:27 AM IST
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infrastructure of colleges to be verified according to courses
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयुक्त कॉलेज अब बगैर संसाधनों के पाठ्यक्त्रस्मों का संचालन नहीं कर सकेंगे। विवि प्रशासन ने सभी कॉलेजों को 15 जुलाई के बाद उनके यहां चलने वाले पाठ्यक्रम तथा भौतिक और बौद्धिक इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्यौरा देना होगा। विवि इस ब्यौरे का सत्यापन कराएगा। सत्यापन में गलत मिलने पर कॉलेज पर कार्रवाई की जाएगी। लविवि कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने रविवार को सभी कॉलेज के प्राचार्यों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की। बैठक में सभी कॉलेजों को एकेडमिक ऑडिट के साथ ही कई अन्य निर्देश भी दिए गए। लविवि कुलपति ने बताया कि सभी कॉलेजों को अनिवार्य रूप से एकेडमिक ऑडिट कराना होगा। इस ऑडिट में कॉलेजों को लविवि द्वारा निर्धारित फॉर्मेट पर सूचनाएं देनी होंगी। साथ ही कॉलेजों को पिछले शैक्षिक सत्र में उनके यहां हुए कामों और अगले साल की योजनाओं का पूरा ब्यौरा देने को कहा है। कॉलेजों के विकास के लिए खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां लविवि के साथ संचालित होंगी। इसमें कॉलेज और विवि दोनों के संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। खेल को लखनऊ विवि की एथलेटिक्स तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को अधिष्ठाता छात्र कल्याण के माध्यम से संचालित किया जाएगा। फैकल्टी आउटपुट की भी मांगी जाएगी रिपोर्ट अभी तक लविवि का कॉलेज की कक्षाओं पर कोई नियंत्रण नहीं रहता था। इसको ध्यान में रखते हुए विवि ने कॉलेजों से उनके शिक्षकों का आउटपुट देने को कहा है। इसमें कॉलेजों को उनके यहां के शिक्षकों द्वारा ली कक्षाओं का ब्यौरा, शोध तथा अन्य गतिविधियों की जानकारी मिल सकेगी। दािखलों पर होगी सख्ती बैठक में विवि प्रशासन ने साफ किया है कि दाखिलों में किसी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुलपति ने साफ किया कि एनसीटीई या फिर अन्य रेग्युलेटरी बॉडीज के प्रावधानों का कॉलेजों को पूरा पालन करना होगा। इसी तरह आरक्षण से संबंधित नियमों का सख्ती से पालन कराने की बात भी कही गई है। ऐसा न होने पर दाखिलों को मान्यता नहीं दी जाएगी। लविवि की वेबसाइट पर देनी होगी नियुक्ति की सूचना कॉलेजों में होने वाली नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए विवि प्रशासन ने कॉलेजों को उनकी हर नियुक्ति की सूचना विवि की वेबसाइट पर डालने के निर्देश दिए हैं। इस तरह से कॉलेजों में चोरी छिपे होने वाली नियुक्तियों पर रोक लग सकेगी।
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