{"_id":"5bbb3399867a5568584b9f7d","slug":"india-international-science-festival-health-conclave-in-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"तीस के बाद शादी से युवतियों में हो सकता है इस बीमारी का खतरा, यहां पढ़ें वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीस के बाद शादी से युवतियों में हो सकता है इस बीमारी का खतरा, यहां पढ़ें वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 08 Oct 2018 04:08 PM IST
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डॉ सुजाता देव
- फोटो : amar ujala
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30 साल की उम्र पार करने के बाद शादी करने वाली युवतियों में बांझपन का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में 25 तक शादी और 30 की उम्र से पहले बच्चे को जन्म देना हितकर है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ ओवरी के अंडे कम होने लगते हैं। यह कहना है केजीएमयू की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता देव का। वह इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के तहत बायो केमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित हेल्थ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रही थीं।
डॉ. देव ने बताया कि बदलती परिस्थितियों में बच्चियों के युवा होने का समय घटा है। खानपान सहित कई तरह के बदलाव की वजह से पहले की तुलना में वे अब जल्दी युवा हो रही हैं तो दूसरी तरफ बांझपन की समस्या भी बढ़ी है। इसका प्रमुख कारण एक तरफ तनाव है तो दूसरी तरफ देर से प्रसव के लिए खुद को तैयार करना है।
कॅरिअर के चक्कर में देर से विवाह होना अब समस्या बनती जा रही है। यही वजह है कि बांझपन की शिकार होने वाली ज्यादातर महिलाएं शहरी होती हैं। इसी तरह महिलाओं को तनाव से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।
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डॉ. देव ने बताया कि बदलती परिस्थितियों में बच्चियों के युवा होने का समय घटा है। खानपान सहित कई तरह के बदलाव की वजह से पहले की तुलना में वे अब जल्दी युवा हो रही हैं तो दूसरी तरफ बांझपन की समस्या भी बढ़ी है। इसका प्रमुख कारण एक तरफ तनाव है तो दूसरी तरफ देर से प्रसव के लिए खुद को तैयार करना है।
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कॅरिअर के चक्कर में देर से विवाह होना अब समस्या बनती जा रही है। यही वजह है कि बांझपन की शिकार होने वाली ज्यादातर महिलाएं शहरी होती हैं। इसी तरह महिलाओं को तनाव से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए।
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शोध से जगी हैं उम्मीदें
डेमो
इसका असर हार्मोन्स पर पड़ता है। हार्मोंस में होने वाले बदलाव की वजह से भी बांझपन की समस्या होती है। इस दौरान नरसिंह वर्मा ने डायबिटीज, डॉ. अब्बास अली मेहंदी ने हेवी मेटल, डॉ. शैली अवस्थी ने बाल रोग पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की संयोजक शिवानी पांडेय ने सभी के प्रति आभार जताया।
एचआईवी, मलेरिया, डेंगू सहित सभी बीमारियों में नए शोध हो रहे हैं। इससे उम्मीदें बढ़ी हैं। इसका फायदा लोगों को मिलेगा, लेकिन सफाई व्यवस्था सबसे ज्यादा कारगर है। अपने आसपास साफ-सफाई रखकर हम तमाम बीमारियों को दूर कर सकते हैं। डेंगू, मलेरिया वगैरह की बेहतर वैक्सीन आ रही है। इससे इलाज में काफी आसानी होगी। लेकिन तब तक हमें खुद जागरूक रहकर इन बीमारियों से बचना होगा। - डॉ. ज्योत्सना अग्रवाल, आरएमएल संस्थान
एचआईवी, मलेरिया, डेंगू सहित सभी बीमारियों में नए शोध हो रहे हैं। इससे उम्मीदें बढ़ी हैं। इसका फायदा लोगों को मिलेगा, लेकिन सफाई व्यवस्था सबसे ज्यादा कारगर है। अपने आसपास साफ-सफाई रखकर हम तमाम बीमारियों को दूर कर सकते हैं। डेंगू, मलेरिया वगैरह की बेहतर वैक्सीन आ रही है। इससे इलाज में काफी आसानी होगी। लेकिन तब तक हमें खुद जागरूक रहकर इन बीमारियों से बचना होगा। - डॉ. ज्योत्सना अग्रवाल, आरएमएल संस्थान