पाक के परमाणु हमले की धमकी पर रक्षामंत्री का करारा जवाब
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रक्षा मंत्री मनोहर परीकर ने कहा कि वन रैंक वन पेशन की बहुत जल्द खुशखबरी मिलेगी। रक्षा मंत्रालय ने अपना काम समय पर पूरा कर लिया है लेकिन इसमें दो-तीन और मंत्रालय जुड़े हुए हैं।
इसीलिए थोड़ा समय लग रहा है। वह पूरी ईमानदारी से इस काम को पूरा करने में लगे हैं। जल्द ही परिणाम सामने दिखाई देंगे। रक्षा मंत्री गुरुवार को यहां पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा परमाणु हमले की धमकी देने के प्रश्न पर परीकर ने कहा, मैं भारत का रक्षा मंत्री हूं। इस तरह की बयानबाजी से कोई फायदा नहीं होता। जहां तक देश की सुरक्षा की बात है तो हम अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
भारत-पाक सीमा पर गोलीबारी की घटनाएं बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, पिछली सरकार के समय जितनी गोलीबारी होती थी उसमें कमी आई है।
नार्थ ईस्ट में जिस तरह म्यांमार में घुसकर भारतीय सेना ने आतंकियों को मार गिराया है, उसी तरह की रणनीति पाकिस्तान में भी अपनाने के प्रश्न पर रक्षा मंत्री ने कहा कि ये गोपनीय ऑपरेशन होते हैं। इस तरह सार्वजनिक रूप से उसे नहीं बताया जा सकता।
जन सुविधाओं के लिए देंगे सेना की जमीनें
रक्षा मंत्री ने कहा कि जन सुविधाओं के इस्तेमाल में आने वाले पुल, सड़क, बिजली, पानी जैसी परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्रालय अपनी जमीनें देगा।
राज्य सरकार को यदि किसी जन सुविधा के प्रोजेक्ट के लिए सेना की जमीन की जरूरत है तो वह सीधे रक्षा मंत्रालय को लिख सकती है।
दिल्ली मेट्रो सहित कई स्थानों पर मेट्रो के लिए सेना ने अपनी जमीनें दी हैं, लेकिन जहां भी राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है उन जमीनों को सरकार नहीं देगी। लखनऊ में गोमतीनगर को जोड़ने वाले पुल को बनाने के लिए सेना ने एनओसी दी है।
हालांकि सेना अपनी उतनी ही जमीन देगी जितनी उस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, सेना को आम जन की सुविधाओं का पूरा ख्याल है। यही कारण है कि सेना ने अपने कई हवाई अड्डे यात्री विमानों के लिए खोले हैं।
छावनी परिषदों में ठप हैं विकास के काम
वहीं रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि छावनी परिषदों में विकास के काम रुके पड़े हैं। छोटे-छोटे मसलों के व्यावहारिक हल ढूंढने होंगे। छावनी परिषद यदि कोई नई नीति बना रही है तब तक पुरानी नीति के तहत काम होते रहने चाहिए। रक्षा मंत्रालय के पास सबसे ज्यादा शिकायतें कैंट बोर्ड से जुड़ी हुई आती हैं। इसका मुख्य कारण इन समस्याओं का समय पर निस्तारण न होना है। उन्होंने गुरुवार को यह बातें कहीं।
रक्षा मंत्री मध्य कमान में आने वाली 23 छावनी परिषदों के चुने हुए सदस्यों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, इस तरह के ओरिएंटेश्न कार्यक्रम से नए आने वाले प्रतिनिधियों को काफी कुछ सीखने को मिलता है। इन्हें न सिर्फ अपने अधिकारों का पता चलता है बल्कि वे जनता की समस्याओं को भी ठीक ढंग से पेश करते हैं।
उन्होंने सदस्यों से कहा कि छावनी परिषद की सात मुख्य समस्याएं हैं। इन पर विचार करना चाहिए। इनमें से कई समस्याओं पर सरकार काम कर रही है। शीघ्र ही इसके परिणाम दिखेंगे। परिषद की जो भी दिक्कतें हैं उन्हें दूर किया जाएगा। इससे पहले रक्षा संपदा निदेशालय के महानिदेशक रविकांत चोपड़ा ने कहा कि सात राज्यों की 23 छावनी के चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए यह कार्यक्रम हो रहा है, जो दो दिन चलेगा।
कार्यक्रम के अंत में रक्षा संपदा निदेशालय की प्रधान निदेशक दीपा बाजवा ने सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया। इस मौके पर मध्य कमान के कार्यवाहक जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल जीएस शेरगिल भी मौजूद थे।
रक्षा मंत्री ने बताईं सात समस्याएं
1-छावनी क्षेत्र में बंद सड़कों को खुलवाना
2-छावनी अधिनियम की खामियां
3-प्रॉपर्टी का हस्तांतरण व नामांतरण
4-पुरानी ग्रांट का विवाद
5-जमीनों की लीज का नवीनीकरण
6-छावनी क्षेत्र में फ्री होल्ड के विवाद
7-बिल्डिंग बाइलॉज को मंजूरी
कैंटोनमेंट डवलपमेंट प्लान को मंजूरी जल्द
मनोहर परीकर ने कहा कि कैंटोनमेंट डवलपमेंट प्लान को इसी वित्तीय वर्ष में मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद 62 छावनियों में विकास काम तेजी से होंगे। इस योजना में जन सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
कैंटोनमेंट बोर्ड एक्ट 2006 में बदलाव पर भी सरकार विचार कर रही है। इस एक्ट के कारण ही छावनी परिषद में चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकार कम हुए हैं।